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इक्वाडोर – विधेयकों के विरूद्ध सरकार को बेदखल करने की लड़ाई – 2

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दोनों ही विधेयक – 5 जून को पेश ‘इन हेरिटेज टैक्स‘ और 8 जून को पेश- ‘केपिटल गेन टैक्स‘- इक्वाडोर के नेशनल असेम्बली में है। जिसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और सरकार के पक्ष में हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया ने, दोनों ही विधेयकों को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है, ताकि राजनीतिक अस्थिरता फैला कर सत्ता परिवर्तन की कोशिशें को आधारहीन किया जा सके।

इक्वाडोर की दक्षिण पंथी विपक्ष और साम्राज्यवादी ताकतें इस बात को अच्छी तरह जानती हैं, कि राष्ट्रपति कोरिया की समाजवादी सरकार के रहते उनका हित सुरक्षित नहीं है। इक्वाडोर राष्ट्रपति ने, घोषित तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है, कि दोनों ही विधेयक समाज के बहुसंख्यक वर्ग के हित में है, जिसका लक्ष्य विरासत के आधार पर सम्पत्ति के हस्तांतरण को घटाना और भू-सम्पत्ति के सट्टेबाजी को नियंत्रित कर भूमि का पुर्न बंटवारा करना है। जिसका पूरा लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग को मिलना है।

यही कारण है, कि इक्वाडोर का दक्षिण पंथी विपक्ष सत्तारूढ़ ‘पीएआईएस एलांस‘ के दफ्तरों और सरकार समर्थक लोगों पर हमले कर रही है। उनका प्रदर्शन हिंसक हो गया है। साम्राज्यवादी ताकतें वेनेजुएला की असफलता भूल कर इक्वाडोर में हिंसक प्रदर्शनों के माध्यम से वेनेजुएला को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके निशाने पर राष्ट्रपति कोरिया की सरकार है। विपक्ष के नेता भी वेनेजुएला के विपक्ष की तरह ही राष्ट्रपति पद के पराजित उम्मीदवार, मेयर और नेशनल असेम्बली के सदस्य हैं। जो देश की आम जनता को बरगलाने और प्रदर्शनो में शामिल होने की अपील करते हैं।

हमारे लिये ‘विकास के जरिये समाजवाद‘ का यही सबसे गंभीर सवाल है, जिसका समाधान सर्वहारा वर्ग की तानाशाही तक पहुंचता है, और फिर एक सवाल में बदल जाता है, कि क्या अमेरिकी वैश्वीकरण और साम्राज्यवादी सैन्य हस्तक्षेप के इस दौर में यह संभव है? पूंजीवादी लोकतंत्र -वित्तीय तानाशाही- और समाजवादी लोकतंत्र -सर्वहारा की तानाशाही- के बीच का खतरा।

विपक्ष के प्रदर्शनों के विरूद्ध सरकार समर्थकों के प्रदर्शन की कार्यनीति को अंजाम दिया जा रहा है। यह संघर्ष सामाजिक संघर्ष है। जिसके राजनीतिक लक्ष्य से इंकार नहीं।

राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया ने 15 जून के प्रदर्शन की अपील की और 12 जून को उन्होंने कहा- ‘‘सरकार हार नहीं मानेगी, जैसा कि 30 सितम्बर 2010 को हमने हार नहीं माना था, जब तख्तापलट की कोशिश की गयी थी।‘‘ उन्होंने अपने ट्वीटर एकाॅउण्ट पर लिखा- ‘‘साथियों (काॅमरेडस्) 30 सितम्बर 2010 को हम नहीं हारे थे, और हम इस बार भी हार नहीं मानेंगे।‘‘ उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘‘लोकतंत्र में सभी को प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है, किंतु किसी के पास हिंसा करने का अधिकार नहीं है।‘‘ उन्होंने राजनीतिक अस्थिरता फैलाने के दक्षिणपंथी विपक्ष के प्रदर्शनों के विरूद्ध वामपंथी एवं सरकार समर्थक प्रदर्शनों की नीतियों को अंजाम दिया। जिसमें सरकार प्रदर्शनों को हिंसक होने और प्रदर्शन के दौरान आपसी संघर्षों को रोकने की कारगर भूमिका निभा रही थी। उसके सामने शांति एवं व्यवस्था बनाये रखने की चुनौती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों ने राष्ट्रीय एवं विदेशी मीडिया के सामने यह कहा कि सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों पर विपक्ष के प्रदर्शनकारियों ने ही हमले किये, जबकि उनकी तादाद सरकर समर्थकों से काफी कम थी। पुलिस दोनों के बीच इन झड़पों को रोकने में लगी थी।

राष्ट्रपति ने सरकार समर्थकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा- ‘‘शांति एवं आपकी उपस्थिति के लिये धन्यवाद! धन्यवाद क्यूटो, धन्यवाद गुआयाकिल, धन्यवाद इक्वाडोर! धन्यवाद साथियों आपके इस बड़े सहयोग और महान कार्य के लिये।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘दक्षिण पंथी हमले हम पर होते रहेंगे। उनके पास पैसे हैं, और वो अपने इरादों को पूरा करने के लिये दृढ़ हैं। वो हमें 2016 तक थका देना चाहते हैं, किंतु हम थके नहीं हैं। हमारी ताकत बढ़ी है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘इन विधेयकों का प्रभाव सिर्फ देश के धनवान लोगों पर पड़ेगा, देश की 90 प्रतिशत आबादी को इसका लाभ मिलेगा। यह उनके हित में है।‘‘

इक्वाडोर में बढ़ते तनाव और वहां की राॅफेल कोरिया सरकार के संभावित तख्तापलट की योजना पर चर्चा करने के लिये वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने ‘‘कम्यूनिटी आॅफ लैटिन अमेरिकन एण्ड कैरेबियन स्टेटस्‘‘ की आपात बैठक की। 13 जून को मदुरो ने कहा- ‘‘यह समय है कि हम अपनी पूरी एकजुटता को इक्वाडोर के लोगों और राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के प्रति व्यक्त करें।‘‘

दक्षिण पंथी विपक्ष और उनके पक्ष में खड़ी साम्राज्यवादी ताकतों के सामने महाद्वीपीय एकजुटता और समाजवादी देशों का -इक्वाडोर की सरकार को- समर्थन सबसे बड़ी समस्या है। जिससे पार पाना उनके बस में नहीं है। लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के संगठन ने राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया और इक्वाडोर की आम जनता के प्रति भरपूर सहयोग एवं समर्थन व्यक्त किया।

16 जून को बोलेविया के राष्ट्रपति इवो मोरालिस ने इक्वाडोर के राष्ट्रपति के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा- ‘‘हमारी एकजुटता, हमारा समर्थन और सम्मान राष्ट्रपति कोरिया के साथ है।‘‘ उन्होंने लातिनी अमेरिका के दक्षिणपंथी प्रदर्शनकारियों से कहा- ‘‘वो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी सरकारों का सम्मान करें।‘‘ उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘अब जब कि प्रस्तावित विधेयकों को स्थगित कर दिया गया, जिसकी वजह से हिंसक प्रदर्शनों की शुरूआत हुई, तब विरोध प्रदर्शन का कोई न्याय सम्मत कारण नहीं है।

इसी दौरान क्यूबा ने भी इक्वाडोर की आम जनता, समाजवादी क्रांति और इक्वाडोर की सरकार के समर्थन में वक्तव्य जारी किया। वक्तव्य में कहा गया है, कि ‘‘वह राज्य जो कुछ लोगों के समर्थन और सहयोग पर टिकी सरकार के द्वारा चलायी जाती है, जिसे मीडिया, सोसल नेटवर्क और बड़े बहुराष्ट्रीय प्रेस का समर्थन हासिल है, वो इक्वाडोर की आम जनता के द्वारा चुनी गयी, वैधानिक सरकार को बद्नाम करना चाहते हैं। वो एक ऐसा संकट पैदा करना चाहते हैं, जिससे देश में हिंसा फैले और एक सुस्थिर और शांत देश को अस्थिर कर दे।‘‘ क्यूबा ने ऐसी ताकतों के खिलाफ अपने वक्तव्य में इक्वाडोर की आम जनता वहां के नागरकि, क्रांतिकारी सरकार और उसके लीडर कााॅमरेड राॅफेल कोरिया के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

वेनेजुएला की तरह इक्वाडोर की सुरक्षा भी लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की सामूहिक सुरक्षा की समाजवादी सोच से जुड़ी है। इसलिये राॅफेल कोरिया ने यदि विधेयकों को अस्थायी रूप से स्थगित किया है, तो यह सिर्फ इक्वाडोर के लिये नहीं, बल्कि महाद्वीप के समाजवादी देशों में फैलाये जा रहे हिंसा, अव्यवस्था और अस्थिरता को, इस योजना के तहत संभालने की नीति है, कि मुद्दों को देश और महाद्वीप की आम जनता के बीच चर्चा के लिये डाल देना चाहिये। जिसमें सकरार की नीतियां और सामाजिक हित साफ हो। यह भी साफ हो कि दक्षिणपंथी ताकतें क्या चाहती हैं? राॅफेल कोरिया ने यही किया। यह विपक्ष को मुद्दा विहीन बनाना नहीं है, कि विधेयकों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, बल्कि यह मुद्दों को आम जनता के बीच लाना है। जिस पर बहस जरूरी है।

यदि राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया ने इक्वाडोर की आम जनता पर यकीन किया है, तो यह मानी हुई बात है, कि उन्होंने विपक्ष को हिंसक प्रदर्शनों के बजाये विधेयकों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहस के लिये आमंत्रित किया है। विपक्ष के लीडर और बैंकर्स गियेरमो लासो ने अपने ट्वीटर एकाउण्ट के जरिये राष्ट्रपति को सार्वजनिक बहस के लिये आमंत्रित किया था। पहले उन्होंने विधेयकों पर चर्चा की पेशकश की, फिर उन्होंने इसे आर्थिक ढांचे पर बहस में बदला, और फिर उन्होंने इसे संवैधानिक सुधारों पर बहस में बदल दिया। उनकी पेशकश राजनीतिक अस्थिरता फैलाने के लिये हिंसक प्रदर्शनों को आधार देना था।

दक्षिण पंथी साजिशों की नीतियां हमेशा ही जटिल होती हैं, ताकि आम जनता के बीच अनिश्चयता और समझ की अस्थिरता बनी रहे। उनके पास नया कुछ भी नहीं है। जो काम और जिन नीतियों के तहत वेनेजुएला में अस्थिरता और अनिश्चयता फैलाने के लिये, अलग-अलग मुद्दों को खड़ा किया गया, उन्हीं को लेकर इक्वाडोर को अस्थिर करने की कोशिशें हो रही हैं। इसके बाद भी उनकी सफलता सुनिश्चित नहीं हो पा रही।

बहुराष्ट्रीय मीडिया -जिन्होंने दक्षिण पंथी ताकतों को हमेशा समर्थन दिया है- ‘‘सीएनएन‘‘- स्पेनिश ने विपक्ष के प्रदर्शनों की शुरूआत के बाद इक्वाडोर में एक सर्वेक्षण कराया, जिसके अनुसार राष्ट्रपति कोरिया की स्थिति काफी मजबूत है। उन्हें देश की आम जनता का समर्थन हासिल है।

इक्वाडोर के संविधान के अनुसार- ‘‘वहां की आम जनता को यह अधिकार प्राप्त है, कि वह सरकार द्वारा पारित आदेशों को रद्द कर सकती है।‘‘ जिसकी शुरूआत वाद दायर से होती है, और मतदान करने का उन्हें अधिकार है। सीएनएन ने लोगों के सामने यह सवाल रखा था, कि ‘‘यदि इन विधेयकों को रद्द करने के प्रस्ताव पर मतदान करवाया जाता है, तो क्या राष्ट्रपति कोरिया जीत जायेंगे?

24 घण्टे के इस सर्वेक्षण मतदान के बाद 60.1 प्रतिशत लोगों ने कहा, कि राष्ट्रपति कोरिया जीत जायेंगे, जबकि 39.9 ने कहा कि उन्हें वापस बुला लिया जायेगा।‘‘ उल्लेखनिय यह है, कि सीएनएन-स्पेनिश गुआयाकिल शहर में कराये गये इस सर्वेक्षण को प्रभावित करने के लिये वहां के मेयर जैमी नेबोत के इण्टरव्यू को भी प्रसारित कर रहा था, जो कोरिया विरोधी विपक्ष के नेताा भी हैं। इसलिये माना यही जा रहा है, कि राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के पास 60 से 80 प्रतिशत आम इक्वाडोरवासियों का समर्थन है। वो दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के ख्याति प्राप्त जननेता हैं, जिन्होंने इक्वाडोर को स्थिरता दी और सरकार को आम जनता के पक्ष में खड़ा किया।

2007 में जब राॅफेल कोरिया ने राष्ट्रपति का पदभार संभाला इक्वाडोर दशकों से जारी आर्थिक तबाही का शिकार था। 1999 के वित्तीय संकट ने ‘बैंक बेल आउट‘ को अनिवार्य बना दिया था और उसी के परिणाम स्वरूप बेरोजगारी, मुद्रा स्फिति और गरीबी अपने चरम पर थी। इक्वाडोर के सामने कोई भविष्य नहीं था ना ही मौजूदा संकट से उबरने की राहें थीं। ‘नागरिक क्रांति‘ ने राष्ट्रपति कोरिया के साथ समाजवादी दिशा को खोलने का काम किया। उन्होंने इक्वाडोर को दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का एक ‘स्थिर अर्थव्यवस्था‘ के रूप में विकसित किया। उसकी वामपंथी सरकार ने कई समाजवादी सुधार किये जिसकी वजह से लगभग 1.1 मिलियन लोगों को भीषण गरीबी से बाहर निकालना संभव हो सका। मौजूदा विधेयकों की दिशा भी वही है, जिसे आधार बना कर हिंसक प्रदर्शनों की शुरूआत की गयी थी, ताकि राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया की सरकार को सत्ता से बेदखल किया जा सके।

राष्ट्रपति का जनाधार मजबूत है, इसके बाद भी सच यह है, कि सरकार के आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजनायें और सामाजिक आंदोलनों के बीच की कडि़यां कमजोर हैं। यही कारण है कि नवउदारवादी-बाजारवादी अर्थव्यवस्था और उसकी सामाजिक संरचना के विरूद्ध मजदूरों के अधिकार सम्बंधि कानून और निजी कम्पनियों के राष्ट्रीयकरण जैसे मुद्दाों पर भी मतभेद हो जाता है। जिसका लाभ दक्षिण पंथी ताकतें उठाना चाहती हैं। और वो एक सीमा तक सफल भी हो जाती हैं।

राष्ट्रपति कोरिया की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है, कि नागरिक क्रांति और ऐतिहासिक रूप से ताकतवर सामाजिक आंदोलनों के बीच सकारात्मक, उत्पादक और सामंजस्यपूर्ण जिन सम्बंधों का अभाव है, उसे स्थापित करे।

राॅफेल कोरिया और उनकी प्रमुख चुनावी मोर्चा पीएआईएस एलाॅन्स ने साल 2006 से अब तक सात राष्ट्रीय चुनावों और जनमत संग्रहों ने जीत हासिल की है, इसके बाद भी जमीनी स्तर पर संगठन का अभाव है, जो कि लगातार लोगों को एकजुट करे और नागरिक क्रांति के कार्यक्रमों के बारे में जनचेतना पैदा करे और क्रांति की रक्षा करे।

राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के पास सामाजिक आंदोलन से जुड़े पृष्टभूमि का अभाव है, जैसा कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति शाॅवेज और अब निकोलस मदुरो का है, बोलेविया के राष्ट्रपति इवो मोरालिस या क्यूबा, राउल कास्त्रो का है। इसमें कोई दोराय नहीं, कि राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया की सामाजिक एवं समाजवादी सम्बद्धता विवादों से परे है, इसके बाद भी उन्हें जनअभियानों को बढ़ाने और सरकार को संगठित रूप से सड़कों पर उतारने की जरूरत है। माना यही जा रहा है, कि दक्षिण पंथी चुनौतियों के विरूद्ध राॅफेल कोरिया जमीन संगठनों को मजबूत करेंगे, ताकि नागरिक क्रांति और इक्वाडोर में समाजवादी भविष्य को सुनिश्चित कर सकें।

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