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लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता

Chile CELAC Summit_Leffलातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता, उनके हर एक निर्णय और उनकी हर एक गतिविधियों में, साफ तौर पर नजर आने लगी है। जिसके मूल में विकास के जरिये समाजवाद और बोलिवेरियन क्रांति है। राज्य को सामाजिक विकास की अनिवार्यता से जोड़ कर राजसत्ता में आम जनता की हिस्सेदारी को बढ़ाने का काम, कर्इ देशों में इस तरह किया गया है, कि राज्य सिर्फ राजनीतिक इकार्इ नहीं, बलिक सामाजिक विकास के लिये, सामाजिक इकार्इ में बदल गया है। और इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की गति तेज होती जा रही है। लातिनी अमेरिका के समाजवादी देशों ने महाद्वीप के देशों की एकजुटता के साथ, आम जनता की एकजुटता पर ज्यादा जोर दिया है। यही कारण है, कि विभिन्न समाजव्यवस्था और राजनीतिक संरचना होने के बाद भी, उनकी एकजुटता का आधार मजबूत होता जा रहा है। बोलिवर, सल्वाडोर अलेन्दे, चेग्वेरा, फिदेल कास्त्रो और अब हयूगो शावेज भी अपने देश के अलावा पूरे महाद्वीप के नायक बन चुके हैं। उनकी एकजुटता लातिनी अमेरिकी देश एवं कैरेबियन देशों के समूह -सी0र्इ0एल0ए0सी0 के दूसरे सम्मेलन में ही नजर नहीं आती, बलिक शावेज के स्वास्थ्य की चिंता और जनतंत्र दिवस के दिन 1 मिलियन लोगों के मार्च में भी नजर आता है। जिसे तोड़ने की अमेरिकी साजिशों का अभी अंत नहीं हुआ है।

बोलेविया- ”अमेरिका राजनीतिक रूप से घात लगाना बंद करे।”

6 जनवरी 2013 को बोलेविया ने कहा कि ”अमेरिकी दूतावास राष्ट्रपति इवो मोरालिस की सरकार को कमजोर करने के लिये सक्रिय रूप से काम कर रहा है।”

बोलेविया के ‘मिनिस्टर आफ प्रेसिडेन्सी’ जुआन रेमोन किवंटाना ने ए0एफ0पी0 को बताया कि ”उनके पास इस बात के अकाटय प्रमाण हैं कि अमेरिकी मिशन बोलेविया की सरकार की छवि और प्रतिष्ठा को नुक्सान पहुंचाने के लिये काम कर रहा है।” उन्होंने कहा कि ”सरकार अमेरिकी दूतावास की गतिविधियों पर नजर रख रही है, और ऐसे प्रमाण इक्टठा कर रही है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सामने रखा जाये और उनसे कहा जाये कि ‘वो राजनीतिक रूप से घातक लगना बंद करें।’ ”

बोलेविया के उच्च राजनयिक अधिकारी ने अमेरिका के द्वारा चलाये जा रहे मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान, आतंकवाद विरोधी युद्ध और मानवाधिकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ”अमेरिका के सामाजिक न्याय, जनतांत्रिक अधिकार, आर्थिक विकेंद्रीयकरण और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान की प्रगति को समझने में असफल रहा है।” वह अपने निजी स्वार्थ और साम्राज्यवादी हितों के लिये, लातिनी अमेरिकी देशों में हो रहे सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिवर्तनों की दिशा बदलने की साजिशें रचता रहा है। वह एकसाथ सैनिक एवं वैधानिक तख्तापलट की कार्यवाही को अंजाम देना चाहता है, जैसा कि उसने गये साल पराग्वे में किया। जिसे लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों ने एकसाथ खारिज कर दिया। आम जनता अपने देश के अपदस्थ राष्ट्रपति र्फनाण्डो लूगो के पक्ष में प्रदर्शन कर रही है, और लातिनी अमेरिकी देशों ने अमेरिका समर्थित पराग्वे की सरकार को मान्यता देने से इंकार कर दिया।

‘अपने देश की सरकार बनाने का अधिकार, उस देश की जनता को है’ की सोच के तहत इन देशों ने पराग्वे से सभी, आर्थिक एवं राजनीतिक सम्बंधों को तब तक के लिये स्थगित कर दिया है, जब तक चुनी हुर्इ वैधानिक सरकार की बहाली नहीं हो जाती है।

इक्वाडोर में राष्ट्रपति चुनाव और असिथरता पैदा करने की अमेरिकी योजना

rafael-correa-1इक्वाडोर के राष्ट्रपति राफेल कोरिया ने कहा कि ”17 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले, सीआर्इए उन्हें मारने की कोशिश कर सकता है।” उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि ”लातिनी अमेरिका में संयुक्त राज्य की भागीदारी के इतिहास को देखते हुए यह कहा जा सकता है, कि राजनीतिक असिथरता पैदा करने के लिये यह जानकारी विश्वसनीय है।” कोरिया ने चिली के पत्रकार पेटि्रषो मेरि बेल की रिपोर्ट का जिक्र किया। चिली के इस पत्रकार ने इक्वाडोर की सरकार को यह सूचित किया है कि सीआर्इए के षडयंत्र की वजह से, राष्ट्रपति कोरिया का जीवन खतरे में है।”

अपने चुनाव अभियान के दौरान कोस्टल प्रांत के दौरे पर गये कोरिया ने कहा कि ”लातिनी अमेरिका के मामले में सीआर्इए ऐसा पहले भी कर चुकी है। इसलिये इस रिपोर्ट पर विश्वास करने लायक आधार है।” राजधानी क्वेटो में अमेरिकी दूतावास के प्रमुख एडम नन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ”संयुक्त राज्य इक्वाडोर की चुनावी प्रक्रिया में कभी भी अपने को शामिल नहीं करेगा।” उन्होंने चिली के पत्रकार के दावे का खण्डन किया। कोरिया ने माना है कि ”हम अमेरिकी राजदूत की बातों पर विश्वास करते हंंै।” लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ”सीआर्इए जैसी एजेनिसयां अपने खुद के एजेण्डे का पालन करती हैं और उस देश के अधिकारवादी संगठनों से अपना सम्बंध बना लेती हैं और उन्हीं के जरिये अपने आपरेशन को अंजाम देती हैं।”

चिली के पत्रकार ने राष्ट्रपति कोरिया की हत्या और राजनीतिक असिथरता पैदा करने की आशंका के बारे में 3 महीना पहले अपनी चिंता को तब सार्वजनिक किया था, जब उन्होंने अपने रिपोर्ट को जारी किया था। उन्होंने कहा था कि ”सीआर्इए इक्वाडोर को असिथर करने का अवसर ढूंढ रहा है।” उन्होंने कहा कि ”कोरिया के जीवन पर सबसे बड़ा खतरा 15 जनवरी को तब हो सकता है, जब वो राष्ट्रपति चुनाव के लिये अपना नामांकन भरेंगे।” अपने एक साक्षात्कार में बेल ने कहा कि ”हमें राष्ट्रपति से तीन गुणा ज्यादा सतर्क रहना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि ”मैं कोरिया का कटटर समर्थक नहीं हूं, मगर लातिनी अमेरिका का एक नागरिक होने के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि इक्वाडोर को असिथर करने के लिये 44 मिलियन डालर के सीआर्इए के इस षडयंत्र के प्रति इक्वाडोर की सरकार को इसकी जानकारी दूं।” बेल का विश्वास है कि ”यह पैसा उग्रवादी, अराजकतावादी वामपंथी और रूढि़वादी कटटरपंथी संगठनों में कोरिया की शाख गिराने के लिये बांटा जायेगा।”

बेल ने अपने रिपोर्ट में लिखा है कि ”इस षडयंत्र के पीछे सीआर्इए का प्रमुख उददेश्य अमेरिका के माण्टा मिलिट्री बेस को इक्वाडोर में बंद करना और विकिलिक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को राजनीतिक शरण देने की अमेरिकी नाराजगी है।”

इक्वाडोर के राष्ट्रपति कोरिया को वेनेजुएला के राष्ट्रपति हयूगो शावेज की नीतियों को पूरी तरह मानने वाले राष्ट्रपति के रूप में जाना जाता है। जिन्होंने अपने देश में गरीबी को घटाने और समाजिक विकास को बढ़ाने का काम किया है। यही कारण है कि इक्वाडोर का गरीब तबका ही नहीं पढ़ा-लिखा मध्यम वर्ग भी कोरिया का प्रबल समर्थक है।

अमेरिका की नाराजगी इक्वाडोर के प्रति इसलिये भी है कि वह उसके अंतर्राष्ट्रीय नीतियों का प्रबल विरोधी है। उसने अमेरिकी सरकार द्वारा र्इरान और लातिनी अमेरिकी देशों के बढ़ते सम्बंधों के खिलाफ पारित अधिनियम का खुले तौर पर विरोध किया है। अपने एक साक्षात्कार में इक्वाडोर के विदेशमंत्री रिकार्डो पटिनो ने कहा कि ”इक्वाडोर र्इरान के साथ अपने सम्बंधों को बनाये रखेगा। वह इस मामले में दृढ़ है।” उन्होंने अमेरिकी नीति की निंदा करते हुए कहा कि ”वाशिंगटन को यकीन है कि जब वह एक देश के साथ अपने सम्बंधों को समाप्त कर ले, तो दुनिया के बाकी देशों को भी इसका अनुशरण करना चाहिये।” उन्होंने जोर दे कर कहा कि ”क्वेटो अपने सम्बंध र्इरान, चीन, रूस, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और उन सभी देशों के साथ अपने सम्बंधों को बनाये रखेगा, जो उसके परम्परागत मित्र देश हंै।” उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह लातिनी अमेरिकी देशों को अपनी नीतियों से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा- ”यह कानून सिर्फ अमेरिकी हितों के लिये है, ना कि वैशिवक शांति के लिये। जिसे हम स्वीकार नहीं कर सकते हैं।” उन्होंने विश्वास जताया कि ” ‘कम्यूनिटी आफ लैटिन अमेरिकन एण्ड कैरेबियन स्टेटस’ भी इक्वाडोर के इस रवैये का समर्थन करेगा।”

इक्वाडोर में राष्ट्रपति का चुनाव 17 फरवरी को है। जिसमें वर्तमान राष्ट्रपति राफेल कोरिया के अलावा 6 अन्य उम्मीदवार हैं। चुनाव अभियान 15 जनवरी से शुरू हो गया है। राफेल की सिथति विवादहीन रूप से अच्छी है। वेनेजुएला के शावेज की तरह ही इक्वाडोर की आम जनता उनके पक्ष में है। अमेरिका समर्थित प्रतिक्रियावादी शकितयों की चिंता भी यही है। क्योंकि उन्होंने वेनेजुएला में देख लिया है कि उनकी संयुक्त शकितयां भी आम जनता को प्रभावित नहीं कर सकीं।

वेनेजुएला में बोलिवेरियन क्रांति का जनतंत्र दिवस

chavez23 जनवरी को वेनेजुएला में लगभग 10 लाख लोगों ने जनतंत्र दिवस के दिन, बोलिवेरियन क्रांति की रक्षा के लिये, काराकस की सड़कों पर मार्च किया और राष्ट्रपति भवन के सामने जमा हुए। 23 जनवरी 1958 में ही आम जनता और सैन्य आंदोलन ने मार्कोस जिमिनस की तानाशाही को उखाड़ फेंका था। और वेनेजुएला में लोकतंत्र की नयी पहल हुर्इ। 23 जनवरी को आयोजित इस मौके पर वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति और मंत्रियों ने आम जनता के साथ मार्च किया। इस जुलूस में सामाजिक संगठन पार्टी, कामगर समूह और जन संगठनों ने हिस्सा लिया। आम जनता की भारी हिस्सेदारी थी। उपराष्ट्रपति निकोलस मादुरो भी प्रोपैटि्रया से आये बोलिवेरियन मिलिसिया के साथ मार्च में शामिल हुए।

हयूगो शावेज की गैर मौजूदगी में आयोजित इस रैली को सम्बोधित करने जब निकोलस मादुरो बढ़े, लाखों-लाख लोगों ने एक साथ नारे लगाये। लोगों ने कहा- ”शावेज और मादुरो के साथ हम महफूज हैं।” उन लोगों ने भी इस रैली में भाग लिया जिन्होंने वेनेजुएला की मारकोस की तानाशाही को उखाड़ फेंकने में अपनी सक्रिय हिस्सेदारी निभार्इ थी। जहां भूख, गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और दमन के बीच लोगों की गुमशुदगी की पीड़ा को झेला था। निकोलस मादुरो ने अपने सम्बोधन में गुजरे हुए उस भयावह कल का उल्लेख करते हुए लोकतंत्र और बोलिवेरियन क्रांति को बनाये रखने की एकजुटता पर बल दिया।

देश की राजधानी काराकस के अलावा भी वेनेजुएला के अन्य हिस्सों में भी रैलियां निकाली गयीं।

वेनेजुएला के विपक्ष के द्वारा भी उस दिन मिरांडा-कारावास के स्टेडियम में 6,000 लोगों की रैली का आयोजन किया गया।

माना यही जा रहा है कि वेनेजुएला में जनतंत्र और समाजवाद की राहें सुसिथर हो गयी हैंं। सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से जागरूक उस वर्ग का उदय हो चुका है, जिसका लक्ष्य एक शोषणविहीन समाज की रचना करना है। वह सिर्फ अपने देश ही नहीं, पूरे महाद्वीप के देश और अब दुनिया के बारे में भी सोचने लगी है।

10 जनवरी को हजारों-हजार लोगों ने, वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में, हयूगो शावेज की अनुपसिथति के बाद भी, उनके समर्थन में एक रैली का आयोजन किया। उस वक्त शावेज क्यूबा की राजधानी हवाना में कैंसर का इलाज करा रहे थे। उनकी सिथति ऐसी नहीं थी कि वो नेशनल असेम्बली के समकक्ष औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह में भाग ले सकें। उनकी अनुपसिथति का लाभ उठाते हुए विपक्ष ने संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार के बने रहने पर कर्इ सवाल खड़े किये। जिसके विरूद्ध एक बड़े रैली का आयोजन हुआ। जिसमें 27 लातिनी अमेरिकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष एवं प्रतिनिधियों ने वेनेजुएला में 6 वर्षीय नये सत्र के शुरूआत के पक्ष में अपनी सहमति दी। 6 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालन के द्वारा संविधान की नयी व्यवस्था का शावेज के नये कार्यकाल की शुरूआत को, उनकी गैर मौजूदगी के होते हुए भी मान्यता दी।

सुबह से ही दसों हजार शावेज समर्थक अलग-अलग हिस्सों से देश की राजधानी में जमा होने लगे। उन्होंने लाल कपड़े पहन रखे थे। एक अंतहीन लाल समुद्री लहरों की तरह लोग राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने ”मैं ही शावेज हूं।” और ”शावेज हमारे दिलों में रहते हैं” के पोस्टर लिये हुए थे। उप-राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और अन्य मंत्रीगण रैली में दोपहर में पहुंचे। उनके साथ वहां बोलेविया के राष्ट्रपति इवो मोरालिस, उरूग्वे के राष्ट्रपति जोस मुजिका, निकारागुआ के राष्ट्रपति डैनियल ओरटेंगा और लातिनी अमेरिकी तथा कैरेबियन देशों के राजनीतिज्ञ एवं प्रतिनिधि थे। जिन्होंने लोगों को सम्बोधित किया और एकजुटता की भावनात्मक अपीलें की।

पराग्वे के पूर्व राष्ट्रपति फर्नाण्डो लूगो ने कहा- ”कौन कह सकता है कि शावेज यहां मौजूद नहीं हैं? वो यहां मौजूद हर किसान, हर एक महिला और हम सबों में हैं। शावेज सिर्फ वेनेजुएला के नहीं, बलिक पूरे लातिनी अमेरिका की विरासत हैं।”

बोलेविया के राष्ट्रपति इवो मोरालिस ने लातिनी अमेरिका की एकजुटता के लिये शावेज सरकार के महत्व को दर्शाते हुए कहा कि ”दोस्तों! हमारे भार्इ शावेज की चिंता सिर्फ वेनेजुएला के लोगों को नहीं है, बलिक उन सभी को है, जो इस संघर्ष का हिस्सा हैं। उनके प्रति सम्मान और एकजुटता प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम संगठित रहें और हमारे देशों के बीच एकजुटता कायम रहे।”

डोमेनिका के राष्ट्रपति अलेयूड विलियम्स ने कहा- ”हम पूरे उत्साह के साथ वेनेजुएला का समर्थन करते हैं और हम अपने दोस्त निकोलस मादुरो से यह कहने आये हैं कि आपके राष्ट्रीय नेता इस वक्त मुशिकल समय से गुजर रहे हैं, मगर आप डोमेनिका को अपना विश्वसनिय मित्र देश मान सकते हैंं।”

अल सल्वाडोर के उपराष्ट्रपति सांचेज केरीन ने कहा- ”वेनेजुएला ने खुद को लातिनी अमेरिका के पथ-प्रदर्शक के रूप में बदल लिया है, जो क्यूबा की क्रांति ने 1960 में किया था।”

शावेज एवं सरकार समर्थकों की इतनी बड़ी संख्या को देख कर ”सेंट विसेन्ट एण्ड द ग्रेनेडार्इन्स” के प्रधानमंत्री राल्फ गोंसालविस ने कहा कि- ”मेरे जीवन का यह सबसे बड़ा जन जमाव है, जिसे मैं सम्बोधित कर रहा हूं।” इवो मोरालिस ने भी कहा कि ”शावेज समर्थकों की इतनी बड़ी भीड़ और लोगों को जमा करने की क्षमता को देखना हमारे लिये रस्क करने की बात है।”

इस पूरे आयोजन को वेनेजुएला के राष्ट्रीय चैनल से सीधा प्रसारित किया गया। रैली का समापन वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति निकोलस मादुरो के जोशीले वक्तव्य के साथ हुआ। उन्होंने विशाल जनसमूह को अपने सही होने और बोलिवेरियन क्रांति के लगातार बढ़ने के प्रमाण के रूप में पेश किया। बोलिवेरियन मिलिसिया का काराकस की सड़कों पर उतरने का विशेष मतलब भी समझ में आया कि वेनेजुएला में बोलिवेरियन क्रांति सुरक्षित है।

कम्यूनिटी आफ लैटिन अमेरिकन्स एण्ड कैरेबियन स्टेटस- सी0र्इ0एल0ए0सी0 का दूसरा अधिवेशन

28 जनवरी को सी0र्इ0एल0ए0सी के दूसरे सम्मेलन में 33 देशों के राष्ट्रप्रमुख और विदेश मंत्रियों चिली की राजधानी सेनटियागो में जमा हुए। जिसमें उन्होंने लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के विकास एवं सहयोग को लगातार बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुषिट की।

सेनटियागो घोषणापत्र में 73 बिंदुओं वाले दस्तावेज को मान्यता दी गयी। जिसके अनुसार लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों का यह संगठन फौरी जरूरत है, और इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी इस क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकीकरण के अनिवार्यता है।

इस सम्मेलन में चिली के बाद एक साल के लिये क्यूबा को इसकी अध्यक्षता सौंपी गयी। क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने कहा- ”हम पर शांति, न्याय, विकास और आपसी समझ को बढ़ाने की जिम्मेदारी है और हम अपनी प्रतिबद्धता को समझते हैं।”

 

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