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नौटंकी में नाटक और फिल्मों का सस्पेंस

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इस बीच देश की आब-ओ-हवा कुछ ऐसे बदली है, कि ‘महाबली‘ और ‘बजरंगी भाईजान‘ के होते हुए भी नौटंकी देखने वालों की तादाद बढ़ी है। लोगों को नौटंकी देखने में मजा आने लगा है। उन्हें लगने लगा है, कि मनोरंजन की जान तो नौटंकी है।

‘मारे गये गुलफाम‘ जब ‘तीसरी कसम‘ बनी, पहले पिटी और फिर चल निकली। ऐसी चली कि राष्ट्रपति ने भी सम्मानित कर दिया। हीरामन और हीराबाई भले ही शैलेन्द्र भाई को बचा नहीं सके, मगर नौटंकी पर बनी फिल्म को बाजार में जगह मिल गयी। नौटंकी सम्मानित हो गयी। नौटंकी जारी है।

अब सरकार नौटंकी को नया दर्जा दिलाने में लगी है। तमाम महाबली और बजरंगी भाईजान नौटंकी कर रहे हैं। नौटंकी सिनेमा और नाटक दोनों को पछाड़ रही है। नौटंकी का क्रेज इतना है, कि उजड़ते तम्बू-कनात से बेखबर ‘सेल्फी मैन‘ देश भर में घूम-घूम कर नौटंकी दिखाने का ऐलान कर रहे हैं।

मोदी जी संसद से ज्यादातर नदारत ही रहे, और जब सत्र खत्म हुआ, उसी दिन यह कहते हुए अवतरित हो गये कि ‘‘कांग्रेस गांधी परिवार की चिंता करती है, जबकि भााजपा को देश की चिंता है।‘‘

चिंता का आलम यह है, कि सभी भाजपायी साल भर में ही चिकना गये।

सत्र समाप्ति के चंद मिनट बाद ही वो एनडीए सांसदों के बीच थे। तेवर तल्ख, जुबान सख्त। बंद गले का कुर्ता, चूड़ीदार पाजामा और मिजाज चुस्त। सत्र भर की सुस्ती, पलभर में लुप्त। मारे गये गुलफाम।

पूछने का जी हुआ- ‘‘पीएम साहब आप कहां थे?‘‘

कहीं पढ़ा था- ‘‘जो अपनों के बीच शेर होते हैं वही सबसे पहले टूटते हैं।‘‘ वजह जानने पर पता चला- गीदड़ भी उनमें होता है।

हमारे पीएम साहब टूटने वाले नहीं हैं। वो हमेशा अपनों के बीच रहते हैं। जहां भी होते हैं, देश की सेवा करते रहते हैं। देश-परदेश में ऐसे लोगों को ढुंढ़ते रहते हैं, जो देश की सेवा करे। देश में आये देशवासियों को खटाये, खदानें खोदे, कल-कारखानें लगाये, खूब कमाये और जी भर सेवा करे। देश सेवकों को ढूंढ़ने का वो कठिन काम कर रहे हैं।

वो बेहतर काम कर रहे हैं।

इतना बेहतर काम कर रहे हैं, कि कांग्रेसी जलभुन रहे हैं। वामपंथी हाॅय-हाॅय कर रहे हैं। जो भी विपक्ष में है, वो मुलायम सिंह बन रहे हैं। जिसकी रग जहां दब सकती है, वह वहां अपनी रग बचाने और मोदी जी की रग दबाने में लगे हैं।

नौटंकी में नया रंग, नया रस घुल गया है।

पगड़ी उछालने और टोपी पहनाने का रंग जम गया है।

कोई पूछता है- ‘‘कितने पैसे मिले बता दो।‘‘

तो किसी का जवाब होता है- ‘‘मम्मी पापा से पूछ कर बता दो।‘‘

ललित गेट और व्यापम की मिसाइल चलती है, तो दूसरी ओर से भोपाल गैस काण्ड और बोफोर्स तोप दगती है।

ललित मोदी के विरूद्ध क्वात्रोची और एंडरसन को खड़ा किया जाता है। लोग एक दूसरे से डरने और डराने में मगन हैं।

ऐसे मौकों पर मोदी जी…………

ओफफ! पहले ही हम बता चुके हैं, कि वो गैरहाजिर रहते हैं। देश की चिंता कर रहे होते हैं।

कि जमीन पर कब्जा नहीं हुआ?

यदि वस्तु एवं सेवा कर विधेयक पास नहीं हुआ, तो क्या होगा?

मूडीज का मूड़ खराब है।

एसोचैम का मिजाज बिगड़ रहा है।

राहुल राहू-केतू बन रहे हैं। संसद में राहुल गांधी हैं, तो उद्योग जगत में राहुल बजाज हैं।

शाख बड़ी तेजी से गिर रही है।

गिरती हुई शाख के नाम नया नौटंकी है- ‘‘लोकतंत्र की हत्या हो रही है।‘‘

सांसदों और मंत्रियों का जत्था बन रहा है।

तलवार म्यान से बाहर निकल रही है।

नौटंकी में नाटक और फिल्मों का सस्पेंस है- हत्यारा कौन है?

सबसे ऊंचे आदमी की सबसे ऊंची पुकार है- ‘‘स्टार्ट-अप इण्डिया, स्टैण्ड-अप इण्डिया‘‘।

खुद उन्होंने 85 मिनट ‘स्टैण्ड-अप‘ रहने का रिकार्ड बनाया।

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