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ब्राजील का आर्थिक एवं राजनीतिक संकट

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चीन की अर्थव्यवस्था में आयी थकान का प्रभाव लातिन अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि चीन इस क्षेत्र के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा निवेशक एवं सहयोगी देश है। चीन के आर्थिक विकास के साथ ही इन देशों में -खास कर महाद्वीप के समाजवादी देशों में- विकास की नयी संभावनायें बनीं। अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसके नवउदारवादी मुक्त व्यापार की मारक नीतियों के खिलाफ, उनके सामने चीन का विकल्प बना। चीन उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास योजनाओं का अनिवार्य हिस्सा बनता चला गया।

रूस और चीन के बीच के सम्बंधों ने लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों की आर्थिक एवं सामरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की पहल की। क्यूबा, वेनेजुएला, निकारागुआ, बोलेविया, उरूग्वे और इक्वाडोर ही नहीं लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के संगठनों से नये सम्बंधों की शुरूआत हुई। द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सम्बंधों का विकास हुआ। ‘ब्रिक्स देशों के संगठनों से नये सहयोग को आधार मिला। ब्रिक्स बैंक और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक की साझेदारी बढ़ी। अमेरिकी डाॅलर के बिना अपनी मुद्रा एवं चीनी मुद्रा युआन के तहत व्यापारिक सम्बंधों को विस्तार मिला।

चीन के आर्थिक संकट से लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की अर्थव्यवस्था भी संकटग्रस्त हो सकती है, किंतु उनके पास विकास की नयी संभावनायें भी हैं, और वो चीन के लिये भी संभावनायें हैं। रूस यदि उनकी सामरिक एवं कूटनीतिक सुरक्षा की अनिवार्यता है, तो चीन की आर्थिक अनिवार्यता आज भी इन देशों के लिये बनी हुई है।

हम यहां ब्राजील का उल्लेख विशेष रूप से करेंगे, जो ब्रिक्स देश भी है। जिसके आर्थिक संकट का लाभ वहां की प्रतिक्रियावादी ताकतें, सत्ता परिवर्तन के रूप में, उठाना चाहती हैं। जो आर्थिक एवं राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है।

आॅस्ट्रेलिया की तरह ही ब्राजील की अर्थव्यवस्था को भी चीन के आर्थिक विकास से काफी फायदा पहुंचा और आॅस्ट्रेलिया की तरह ही उस पर भी चीन की अर्थव्यवस्था के ठहराव और गिरावट का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

ब्राजील की अर्थव्यवस्था में पिछले 12 महीनों से लगातार गिरावट आ रही है, यह उसके लिये पिछले 25 सालों का सबसे लम्बा और सबसे गहरा आर्थिक मंदी का संकट है। कुछ मामलों में ब्राजील की स्थिति कुछ ज्यादा ही बुरी है, क्योंकि वहां विकास दर में गिरावट के साथ मुद्रा स्फीति भी लगातार बढ़ रही है। जिसकी वजह से ब्याज दर में वृद्धि हो रही है। ब्राजील की मुद्रा गिरावट के बाद 53 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गयी है।

ब्राजील की वर्कर्स पार्टी -पीटी- सरकार ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में घोषणां की, कि ‘‘उसके सकल घरेलू उत्पाद में, इस साल की दूसरी तिमाही में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई है।‘‘ यह घोषणां अपने आप में मंदी के दौर के शुरूआत की घोषणां है। देश की अर्थव्यवस्था में आयी यह गिरावट ना सिर्फ ब्राजील की वर्कर्स पार्टी की सरकार, वहां के कामगर वर्ग के लिये बड़ी परेशानी है, बल्कि इससे पूरा महाद्वीप प्रभावित होगा, क्योंकि ब्राजील लातिनी अमेरिका के व्यापार एवं निवेश का प्राथमिक स्त्रोत है। यह गंभीर गिरावट वहां उस समय बढ़ रही है, जब देश में राजनीतिक संकट की शुरूआत भी हो गयी है।

कुछ दिनों पहले ही पेट्रोब्रास -सरकार के स्वामित्व वाली कम्पनी- और ब्राजील की सबसे बड़ी इण्डस्ट्रियल कम्पनी के, कई बिलियन डाॅलर के रिश्वत का मामला सामने आया है। इस खुलासे से सरकारी स्वामित्व वाली कम्पनियों में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार से सरकार की मुश्किलें बढ़ गयी हैं, क्योंकि वहां की प्रतिक्रियावादी ताकतें सरकार वर्चस्व के खिलाफ हमेशा से रही हैं, और वो नये सिरे से विरोध में लामबद्ध हो गयी है।

राजनीतिक और आर्थिक संकट एक दूसरे का हाथ बंटा रहे हैं। पेट्रोब्रास के खुलासे की वजह से विदेशी पूंजी निवेश में कमी आई है और कई बड़ी परियोजनायें जो कि स्कैण्डल में फंसी हुई हैं, में भी गिरावट आयी है।

ब्राजील के श्रम मंत्रालय ने जानकारी दी है, कि इन स्कैण्डलों की वजह से इस तिमाही में बेरोजगारी दर 6.8 से बढ़ कर 8.3 प्रतिशत हो गयी है। बेरोजगारों की बढ़ती तादाद सरकार के लिये बड़ी समस्या है। जिसकी वजह से श्रमिक वर्ग का असंतोष बढ़ रहा है।

अर्थव्यवस्था में जारी गिरावट का प्रभाव औद्योगिक एवं निर्माण के क्षेत्र सबसे ज्यादा पड़ा है। जिसकी वजह से पिछले एक साल में 4,54,000 लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में आयी गिरावट की वजह से 1,52,000 नौकरियां समाप्त हुई और कृषि क्षेत्र में 99,000 लोगों को अपनी नौकरियां गवांनी पड़ी। इस साल के पहले छः माही में ही आॅटो मोवाइल क्षेत्र में 38,700 नौकरियों की कटौती की गयी।

ब्राजील की अर्थव्यवस्था में आई गिरावट से उसका हर क्षेत्र प्रभावित है। सरकार के सामने अपनी आर्थिक स्थिति को संभालने के विकल्पों का अंत होता जा रहा है। साम्राज्यवादी ताकतें हर स्तर पर उसके खिलाफ सक्रिय हो गयी है।

वाॅल स्ट्रीट स्थित रेटिंग एजेन्सी ‘मूडीज‘ ने पिछले महीने ब्राजील की क्रेडिट रेटिंग को गिरा कर, उसे ‘जंक स्टेटस्‘ के ठीक पहले के पायदान पर रखा है, जहां निवेश सुरक्षित नहीं माना जाता। ‘स्टैण्डर्ड एण्ड पुअर‘ ने पिछले महीने ब्राजील को चेतावनी दी कि ‘देश में जारी राजनीतिक एवं आर्थिक संकट की वजह से आने वाले समय में वह अपने पूंजी निवेश के स्तर को खो सकता है।‘‘ उसने ब्राजील के सार्वजनिक कर्ज में हो रही वृद्धि दर का भी उल्लेख किया है। 31 अगस्त 2015 को संसद में पेश किये गये बजट के अनुसार 2015-16 तक यह कर्ज 8.4 बिलियन डाॅलर तक हो जायेगा। ‘स्टैण्डर्ड एण्ड पुअर’ ने ब्राजील सरकार के खुद के अनुमानों को अपने निषकर्ष का आधार बनाया है।

ब्राजील की अर्थव्यवस्था में आयी यह गिरावट अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल एवं खनिज जैसे वस्तु और चीन के मांग में आयी गिरावट की वजह से है। चीन ब्राजील का बड़ा व्यावसायिक साझेदार है। सोयाबिन, लोहा और ऊर्जा निर्यात का प्रमुख खरीददार भी है। इस साल की पहली तिमाही की तुलना में, दूसरी तिमाही में ब्राजील के पारिवारिक खर्च में 2.1 प्रतिशत की गिरावट आयी है, क्योंकि निर्यात में भी भारी कमी आ गयी है। तेजी का दौर खत्म हो गया है।

लगभग सभी लातिनी अमेरिकी देशों के सामने मंदी की बनती वैश्विक परिस्थिति और चीन के निर्यात में आयी कमी से उबरने की चुनौती है। ब्राजील की पीटी सरकार के सामने भी गंभीर चुनौतियां हैं। उसकी सबसे बड़ी चुनौती है, कि वह समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिये जारी न्यूनतम सामाजिक विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों को कैसे जारी रखे, जो कि सरकार के चुनावी आधार को मजबूत करने का काम करता रहा है। ब्राजील के आर्थिक संकट का सबसे गहरा दबाव समाज के श्रमजीवी वर्ग पर ही पड़ रहा है। जिसका लाभ वहां की विपक्ष और बुर्जुआ ताकतें उठाना चाहती है। परिस्थितियां सरकार के पक्ष में नहीं है।

सरकार के विरूद्ध मजदूर वर्ग में विरोध बढ़ता जा रहा है। दक्षिण पंथी राजनीतिक दल पेट्रोब्रास स्कैण्डल की ओट में ‘भ्रष्टाचार के विरूद्ध अभियान चला रहे हैं। वो राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ के खिलाफ महाअभियोग की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है, कि जिन सात सालों में भ्रष्टाचार हुए उन सालों में डिल्मा रोसेफ पेट्रोब्रास की अध्यक्ष रही है। हालांकि उनके पास भ्रष्टाचार में रोसेफ के शामिल होने का कोई प्रमाण नहीं है। इसके बाद भी यह सच है, कि रोसेफ सरकार की मुश्किलें बढ़ी हैं, और सरकार के कई महत्वपूर्ण सहयोगी एवं अधिकारियों की निश्चित सम्बद्धता सामने आ रही है।

पेट्रोब्रास काण्ड के जांच में अब तक सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के कोषाध्यक्ष जोआओ वकारी नेटो, कम्पनी के कई उच्चाधिकारी और कई बड़े व्यावसायी तथा राजनीतिक जिसमें ब्राजील के धनिक व्यक्ति मार्सेलो दिब्रेची भी शामिल है, कि गिरफ्तारियां हुई हैं। पांच अलग-अलग रजानीतिक दल के लगभग 3 दर्जन फेडरल लेजिसलेटर (संसद) जांच के दायरे में हैं। जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से एक ब्राजीलियन डेमोक्रेटिक मोमेंट पार्टी के एडुआर्डो कुन्हा भी हैं। जो डिल्मा रोसेफ के पूर्व सहयोगी एवं ‘चेम्बर आॅफ डीप्यूटीज‘ के प्रमुख भी थे। उन पर 5 मिलियन डाॅलर रिश्वत लेने का आरोप है, ने डिल्मा रोसेफ पर महाअभियोग चलाने की मांग का समर्थन किया है।

हजारों लोगों ने 16 अगस्त को पेट्रोब्रास मुद्दे को लेकर, रोसेफ पर महाअभियोग चलाने की मांग में प्रदर्शन किये। यह विरोध प्रदर्शन मार्च महीने में किये गये विरोध प्रदर्शन से काफी छोटा था। राष्ट्रपति पर महाअभियोग चलाने की मांग वाले बैनरों के साथ कई बैनरों पर सैन्य हंस्तक्षेप की मांग भी की गयी। सैन्य तख्तापलट की अपील भी सामने आयी।

महाअभियोग और सैन्य हंस्तक्षेप की मांग को लेकर दक्षिण पंथी विपक्षी दल विभाजित हैं। ‘ब्राजीलियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी‘ के अध्यक्ष और राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार इस मांग से नाखुश हैं, तो ऐसे लोग भी हैं, जो चाहते हैं, कि राष्ट्रपति स्वेच्छा से इस्तीफा दे दें। बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया केे रोसेफ सरकार को सत्ता से बेदखल करने के पक्ष में पार्टी के ज्यादातर लोग नहीं हैं। ब्राजील के दक्षिण पंथी सत्तावादी वर्ग में इस बात को लेकर घबराहट है, कि पीटी सरकार को यदि असंवैधानिक तरीके से सत्ता से बेदखल किया जाता है, तो ब्राजील में सामाजिक असंतोष और वर्ग संघर्ष भड़क जायेगा।

ब्राजील में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल और दक्षिण पंथी विपक्ष में नीतिगत आधार पर कोई विशेष अंतर नहीं है। दोनों ही बुर्जुआ हितों के लिये, पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्षधर हैं। उन्होंने मुक्त व्यापार और बाजारवादी नीतियों को ही लागू किया है। और यह संकट भी उसी की देन है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा यही है।

1980 के दशक में ब्राजील के जिस वर्कर्स पार्टी -पीटी- की स्थापना की गयी थी, उसकी नीतियां और विकास की दिशा बदल गयी है। ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति लुइज इनासियो द सिल्वा (लूला), जो कि एक मेटल वर्कर्स यूनियन के लीडर थे, जो वर्कर्स पार्टी (पीटी) के संस्थापक सदस्य थे- ने इस बात के संकेत दिये हैं, कि वो सक्रिय राजनीति में वापस होंगे और खुद 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में एक प्रत्याशी के रूप में खड़े होंगे। अपने वर्तमान वक्तव्य में उन्होंने वर्कर्स पार्टी के सदस्यों से ‘क्रांति की पुनः शुरूआत‘ और ‘सरकार को सड़कों पर लाने‘ की अपील की। पूर्व राष्ट्रपति की पकड़ आम ब्राजील वासियों के बीच अच्छी रही है, हालांकि चल रहे स्कैण्डल में वो खुद फंस से गये हैं।

ब्राजील के दक्षिण पंथी एक मैगजिन में प्रकाशित रिपोर्ट में उन पर यह आरोप लगाया है, कि ‘‘उन्होंने दिब्रेची काॅरपोरेशन के एक लाॅबिस्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने दिब्रेची काॅरपोरेशन के काॅरपोरेट जेट विमान से क्यूबा और अन्य देशों की यात्रायें की ताकि उसके लाभदायक काॅन्ट्रेक्ट को सुरक्षित किया जा सके।‘‘ पूर्व राष्ट्रपति लूला ने अपनी बीमारी  (कैंसर) की वजह से सक्रिय राजनीति को छोड़ा था और डिल्मा रोसेफ राष्ट्रपति निर्वाचित हुई थीं।

दिसम्बर 2014 में वर्तमान राष्ट्रपति रोसेफ ने जोआगुइन लेवी को ब्राजील के नये वित्त मंत्री के रूप में नियुक्त किया। उनकी यह नियुक्ति वर्कर्स पार्टी की नीतियों के बिल्कुल विपरीत थी। लेवी शिकागो स्कूल के अर्थशास्त्री और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष तथा काॅरपोरेट बैकिंग के वरिष्ठ अधिकारी थे। उनका इतिहास किसी से छुपा हुआ नहीं है। वो ब्राजील के कुलीन वर्ग के प्रतिनिधि सदस्य हैं।

साल 2010 से 2014 के बीच लेवी दैत्याकार काॅरपोरेशन कंगलोमिरेट, ब्रोडेस्को, जो कि ब्रोडेस्को ऐसेट मैनेजमेंट का मजबूत हिस्सा है- के प्रेसिडेण्ट थे।

यूनिव्हरसीटी आॅफ शिकागो से जब वो डाॅक्ट्रेट कर रहे थे, उसी समय से वो ‘नवउदारवाद‘ के सुप्रिमो प्रोफेसर मिल्टन फ्रीडमैन के समर्थक थे, जो कि चिली के सैनिक तानाशाह आॅगस्टो पिनोशे के वित्त सलाहकार थे। जब वो अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के वरिष्ठ अधिकारी थे (1992-1999) तब उन्होंने कटौती कार्यक्रम की भरपूर वकालत की थी। जिसके एक दशक बाद दक्षिणी यूरोप और आॅयरलैण्ड को आर्थिक रूप से दिवालिया बना दिया गया। हेनरिक कारदोसो के राष्ट्रपति के कार्यकाल में उन्होंने पब्लिक सेक्टर के बड़े पैमाने पर प्राईवेटाईजेशन में सहयोग दिया। उनके इस नीति की वजह से हर साल 15 बिलियन डाॅलर का अवैध प्रवाह देश से बाहर जाने लगा।

ऐसे व्यक्ति को ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ द्वारा वित्त मंत्री बनाना देश की अर्थव्यवस्था को नवउदारवादी ताकतों में हाथों में सौंपना ही प्रमाणित हुआ है। गये साल से ब्राजील में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का तांता लगा हुआ है। जनअसंतोष लगातार बढ़ रहा है। दक्षिण पंथी ताकतें सरकार का तख्तापलट करने में लगी हैं, और वहां की वामपंथी ताकतें सरकार की नीतियों के विरूद्ध होने के बाद भी दक्षिण पंथी ताकतों  के खिलाफ सड़कों पर उतर आयी हैं।

दक्षिण पंथी ताकतों के द्वारा राष्ट्रपति पर महाअभियोग की कोशिशों को रोकने के लिये 20 अगस्त को लगभग 1 मिलियन लोगों ने प्रदर्शन किये। इनमें भूमिहीन किसानों से लेकर कई मजदूर संगठन शामिल थे। इस जन प्रदर्शन में ब्राजील के समाजवादी क्रांति के समर्थकों ने हिस्सा लिया। जिसमें शामिल थे -मूवमेंट आॅफ लैण्डलेस कैम्पेसीनोस (एमएसटी) और यूनाइटेड वर्कर्स सेण्ट्रल (सीयूटी) जोकि ब्राजील और लातिनी अमेरिका का सबसे बड़ा यूनियन हैं।

आयोजकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह प्रदर्शन लोकतंत्र के समर्थन में और दक्षिणपंथी विपक्ष के महाअभियोग की मांग के विरोध में है। ब्राजील की वामपंथी विपक्ष, सोसलिस्ट एण्ड लिबर्टी पार्टी ने भी इस जनप्रदर्शन में हिस्सा लिया।

ग्लोबो समाचार पत्र के अनुसार- ‘‘पूरे देश भर में कम से कम 8,76,000 लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।‘‘ प्रदर्शन में शामिल सभी राजनीतिक दल, किसान, मजदूर एवं जनसंगठनों ने समान रूप से वित्तमंत्री जोआगुइन लेवी को खारिज कर दिया। जो शिकागो स्कूल के समर्थक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के अर्थशास्त्री थे। जिन्होंने ब्राजील में सामाजिक विकास योजनाओं में कटौती और कटौती की नीतियां बनायी। प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने पूर्व सरकार के सहयोगी और कांग्रेस के प्रमुख एडुआर्डो कुन्हा को भी निशाना बनाया, जिन्होंने महाअभियोग की मांग का नेतृत्व किया था। जो खुद आरोपों से घिरे जांच के दायरे में हैं। जिन पर भ्रष्टाचार और मुद्रा के अवैध लेन-देन का आरोप है। उन्होंने अपने पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और सरकार के साथ अपनी पार्टी के समझौते को समाप्त कर दिया।

पूर्व राष्ट्रपति लूला के राजनीति में सक्रिय होने की खबरों ने ब्राजील के राजनीतिक वातावरण में नयी संभावनायें पैदा कर दी है। साओ पोलो में समाजवादी सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक पार्टियों ने पूर्व राष्ट्रपति लूला-द-सिल्वा के प्रति अपनी एकजुटता को प्रदर्शित किया।

20 अगस्त को लाखों-लाख लोगों के इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है, कि ब्राजील में दक्षिणपंथी ताकतों के द्वारा सत्ता परिवर्तन आसान नहीं है। समाजवादी जनचेतना और लोकतंत्र की जड़ें आर्थिक संकट और दक्षिण पंथी हमलों के बीच मजबूत हुई है। इसके बाद भी सच यह है, कि आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से ब्राजील संकटग्रस्त है।

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