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जान डालने का जानलेवा कमाल

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आज कल बड़ी अनहोनी हो रही है भाई!

श्री श्री श्री नरेंद्र मोदी जी (इसे आप चाटुकारिता ही समझें) जब से देश के प्रधानमंत्री बने हैं, चारो तरफ रिश्तों में नयी जान डाली जाने लगी है, जैसे पुराने रिश्तों की जान निकल गयी थी। जैसे निकली हुई जान वापस आ रही है। जैसे मरा हुआ घोड़ा फिर से खड़ा हो रहा है।

जिसकी जान निकल रही है, या कहिये बड़ी मुश्किल से, निकलने से बची हुई है, वो भी मोदी जी के साथ मिल कर आपसी रिश्तों में नयी जान डाल रहे हैं।

पहले मोदी जी चारो तरफ -देश विदेश में- घूम-घूम कर जान डाले, अब पीएम, चांसलर से लेकर प्रेसिडेण्ट तक जान डालने के जानलेवा अभियान में लगे हैं।

पीएम सिंजो अबे ने जान डाला,

प्रेसिडेण्ट ओबामा ने जान डाला,

और अब चांसलर मार्केल जान डाल रही हैं।

मोदी जी जानदार हो रहे हैं।

उन्होंने सोचा ही नहीं जिनकी जान खुद सांसत में है, वो रोज नयी जान कहां से लायेंगे?

क्या आपने कभी किसी मरे हुए जानवर या चिडि़या में, चिकवा और चिड़ीमार को जान डालते देखा है?

नहीं देखा तो अब देखिये।

पत्थर की मूर्तियां और विसर्जन के लिये बनी प्रतिमायें भी मुर्दों को खड़ा कर रही हैं।

बनारस के गोदौलिया चैराहे पर मूर्तियों के विसर्जन के मुद्दे में नयी जान आ गयी है।

मामला गरमाया हुआ है।

प्रशासन ने डंडों में नयी जान डाल दी।

उनसे पहले प्रदर्शनकारियों ने ढ़ेला-पत्थर में नयी जान डाल दिया। वाहनों में जान फूंक दी। बेचारे खड़़े-खड़े पुलिस चैकी की तरह जलने लगे। लाठी का हिंसाब लेने पहुंचे अविमुक्तेश्वरा नंद जी जब अन्याय (पूर्ण) प्रतिकार रैली के साथ पहुंचे और पुलिसिया लाठी की जान उनसे मिलने लगी, उन्होंने चेले को ऐसे गले लगा लिया कि गुरू से पहले चेले में जान का पड़ना जरूरी है।

सुनते हैं बटुक बंमकिम चंद के ‘आनन्दमठ‘ की मुद्रा में आने के मूड़ में हैं। कि चाहे कुछ हो जाये मूर्तियों का धसान गंगा में ही होगा। दुर्गा पंडाल अभी सजा नहीं, मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा हुई नहीं, मगर भक्त विसर्जन की लड़ाई लड़ रहे हैं। दुर्गा जी बड़ी बेहाल हैं।

खबर मिली कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के मंदिर से चुराई गयी दुर्गा जी की पस्तर प्रतिमा, जो तस्करों के साथ जर्मनी पहुंच गयी थी, चांसलर मार्केल ने उसे पीएम मोदी को तोहफे में देकर ‘जान डालने‘ और ‘मन मोहने‘ का कमाल कर दिखाया। मोदी जी गदगद। तमाम गदाधारी पस्त।

पहले मूर्ती की चोरी।

फिर चोरी के मूर्ती की बरामती।

फिर चोरी के मूर्ती का तोहफा।

और फिर आपसी रिश्तों में नयी जान।

रिश्तों में जान डालने वालो के लिये कोई कानून-कायदा नहीं।

जर्मनी ने ग्रीस की जान निकलती अर्थव्यवस्था में कर्ज और निवेश का जान डाला, अब बेचारे ग्रीस की जान जा रही है। आम लोग मुश्किल में हैं।

अपनी जान बचाने के लिये दूसरों की जान लेना ‘राईट आॅफ सेल्फडिफेंस‘ है। किसी की जान जाने का किसी को गम नहीं। ‘जान डालने‘ का ‘जानलेवा कमाल‘ जायज है।

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