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आतंकवाद के खिलाफ तजाकिस्तान में रूसी सक्रियता

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रूस की सैन्य सक्रियता अपनी सुरक्षा के अलावा वैश्विक परिस्थितियों से संचालित हो रही है। इस्लामिक आतंकी और उनके सहयोगियों के खिलाफ उसने सीरिया में न सिर्फ निर्णायक संघर्ष की शुरूआत की है, बल्कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपने मित्र देशों के साथ मिल कर मजबूत नाकेबंदी भी कर रहा है। जिसका मकसद राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवादियों के जरिये तख्तापलट की घटना को रोकना है। उसकी नीतियां खुले तौर पर उन देशों के पक्ष में हैं, जहां साम्राज्यावादी ताकतों के द्वारा लीबिया जैसी स्थितियां पैदा की जा रही हैं।

7 अक्टूबर 2015 को रूस के रक्षा मंत्रालय ने अफगानिस्तान की सीमा से लगे, पूर्व सोवियत संघ के सदस्य देश -तजाकिस्तान में अपनी सेना को मजबूती प्रदान करने के लिये वहां लड़ाकू एवं सैन्य मालवाहक हेलिकाॅप्टरों को तैनात करने की जानकारी दी। यह जानकारी रूस के सेण्ट्रल मिलिट्री डिस्ट्रीक के यारोस्लोव राॅसचोपकिन ने पत्रकारों को दी।

इन हेलिकाॅप्टरों की तैनाती 201 मिलिट्री बेस में होनी है। इस वक्त यूनिट में एमआई-24पी लड़ाकू हेलिकाॅप्टर और एमआई-8एमटीवी माल वाहक हैलिकाॅप्टर है। रूस के इन हेलिकाॅप्टरों की तैनाती की बड़ी वजह तजाकिस्तान से लगे अफगानिस्तान की सीमा पर तालिबान विद्रोहियों की बढ़ती सक्रियता है। जब से तालिबान विद्रोहियों ने कुन्दुज शहर पर कब्जा कर लिया है, और अफगान तथा अमेरिकी सेना वहां हमले कर रही है, आतंकी वारदातें उस क्षेत्र में बढ़ गयी हैं।

राॅसचोपकिन ने पत्रकारों से कहा- ‘‘इससे 201 मिलिट्री बेस की सैन्य क्षमता बढ़ जायेगी।‘‘ यह मिलिट्री बेस रूस से बाहर, रूस की थल सेना के सबसे बड़े सैन्य ठिकानों में से एक है, जो तजाकिस्तान की राजधानी दशनबे से 30 किलोमीटर दूर है। जहां तजाकिस्तान की सेना को रूस न सिर्फ उपयुक्त हथियारों की पूर्ति करता है, बल्कि वहां की सेना के साथ सैन्य तकनीक को विकसित करने में भी सहयोग देता है।

रूस तजाकिस्तान के सेना के साथ मिल कर नियमित रूप से सैन्य अभ्यास करता रहा है। मई 2015 में एक वृहद सैन्य अभ्यास किया गया, जिसमें ‘कलेक्टिव सिक्यूरिटी ट्रीटी आॅर्गनाइजेशन फोर्स‘ ने भी हिस्सा लिया था। यह पूर्व सोवियत संघ के सदस्य देशों का संगठन है, जो संयुक्त सुरक्षा नीति के तहत आपसी सहयोग को बढ़ा रहे हैं।

यह रूसी बेस अफगानिस्तान के कुंदुज प्रांत से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित है।

रूस के एक उच्च एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञ ने 8 अक्टूबर को यह कहा है, कि ‘‘अफगानिस्तान में आईएसआईएल ने प्रशिक्षण शिविरों में रूसी भाषा में काम किया जा रहा है।‘‘ जिसका सीधा सा अर्थ यह निकलता है, कि इन प्रशिक्षण शिविरों में ऐसे रूसियों की अधिकता है, जिन्हें आतंकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जो रूस और उसके सहयोगी देशों की आंतरिक सुरक्षा के लिये खतरा है।

रूस के विदेश मंत्रालय के ‘सेकेण्ड डिपार्टमेंट‘ के डाॅयरेक्टर ज़मीर काबुलोव ने मास्को के एक सुरक्षा सम्मेलन में कहा, कि ‘‘इस्लामिक स्टेट अफगानिस्तान में रूस में पैदा हुए लोगों को आतंकी प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके कई प्रशिक्षकों के पास अमेरिका और ब्रिटेन के पासपोर्ट हैं।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘कई आईएस प्रशिक्षण शिविर मध्य एशिया और रूसी क्षेत्र के लोगों को आतंकी प्रशिक्षण दे कर, उन्हें नियुक्त कर रहे हैं। इन प्रशिक्षकों में अरब और पाकिस्तान प्रशिक्षकों के अलावा ब्रिटेन और अमेरिकी मूल के प्रशिक्षण भी हैं।‘‘ जिनकी सम्बद्धता इराक और सीरिया में भी है। सीरिया में जिस तेजी से रूस, वहां की आम जनता और सेना के साथ मिल कर इस्लामिक स्टेट के आतंकी एवं अन्य आतंकी संगठनों का सफाया कर रहा है, वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हवाई हमलों से बिल्कुल भिन्न है। रूस के ऐसे हस्तक्षेप की कल्पना अमेरिका एवं नाटो देशों ने नहीं की थी, जिन्होंने इन आतंकियों को जन्म दिया।

रसियन जनरल स्टाफ के अनुसार- अफगानिस्तान में आईएस आतंकियों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में 2 से 3 हजार आतंकी इस क्षेत्र में हैं। पिछले महीने इन आतंकियों ने 3500 से भी ज्यादा लोगों की हत्या की, जो कि पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा है। घायलों की संख्या 7000 से ऊपर पहुंच गयी है।

आतंकवाद के खिलाफ रूस की सक्रियता सिर्फ उसकी अपनी सुरक्षा नहीं रह गयी है, बल्कि वह राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवादियों तथा पेशेवर विद्रोहियों के माध्यम से साम्राज्यावदी तख्तापलट की नीतियों के खिलाफ हैं।  अमेरिकी साम्राज्यवादी हमलों की ओट भी उजागर होता जा रहा है, जिसे वह आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर चला रहा है।

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