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निशा चौधरी की पांच कविताएँ

12112300_430961767114315_8847924445661818174_n1. सड़कों के गड्ढ़े

सड़कों पर पड़े गड्ढ़े
गड्ढ़ों में भरा पानी
और उसी पानी में दिखती
इस टुटपुंजिए प्रशासन की छवि
शर्मसार करती है
कहीं न कहीं मानवता को
कि हम कितने गिर चुके हैं
कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता
किसी के जीने या मरने से
कि इन गड्ढ़ों का भी इतिहास पुराना है
ये तब भी थीं
जब सड़कें कच्ची थीं
ये अब भी हैं
जब सड़कें पक्की हैं
तकनीक के विकास से
प्रफुल्लित रहने वाले हम
अभी तक कोई ऐसी तकनीक
विकसित नहीं कर पाए
जो कर सके हमारी हर हानियों की भरपाई
जो लौटा सके
सड़क हादसों में खो चुके
हमारे परिजनों का जीवन
हम नहीं कर पाए
ऐसी तकनीक का विकास
जो घोटालों से निपट सके
जो लापरवाहियों पर डपट सके

हम विचलित होते हैं
हर एक मृत्यु पर
और ये निरीह प्रशासन
अपनी धुमिल सी छवि पर
अकड़ता , मुस्कुराता
इसी आधुनिक तकनीक की देन
किसी आलीशान सी
तमाम सुविधाओं से लैस गाड़ियों में
जिन्हे कुछ फ़र्क नहीं पड़ता
सड़कों के गड्ढ़ों से
गुज़रता है
उलीचता हुआ
उन गड्ढ़ों का पानी हमपर !

 

2. शून्य

आकाश की गहराई
डूब जाती है
स्वयं के ही शून्य में
चहलकदमी करती उसकी सीमाएँ
स्थानांतरित होती हर बार …|

 

3. एक नए क्षितिज को रचना आसान नहीं होता

मेरे टूट के बिखर जाने
और संभल जाने में
एक अनदेखी , अन्जानी सी दूरी है
जो अनुभव से परे है
ये दूरी बहुत छोटी है
शायद क्षण की
एक इकाई
ये मेरी पहुँच से बहुत दूर है
मगर
न चाहते हुए भी
मेरे जीवन के सभी निर्णय
यही करती है
क्षण की इस धुमिल इकाई की पकड़
जीवन पर अत्यंत कठोर है
इसकी शक्ति का अनुमान लगाना कठिन है
ये चाहे तो
मेरी बाँह थामे
ले जाए मुझे
नैराश्य के अंधेरे में
या दे दे जीवन को
नया जीवन
जो धरा के धीमे धैर्य से पनपकर
छूएगी आकाश के विसंगत
इंद्रधनुषी रंगों को
एक नए क्षितिज को
रचना आसान नहीं होता |

 

4. अनुमान से परे

होने और न होने से परे की एक क्रिया
जो सदैव विचलित करती है
वो कहती है
तुम्हारे अनुमान के विपरीत है मेरा अस्तित्व
मेरी रिक्तता अबोध है , अगाध है …..|

 

5. चित्र

जिस चित्र ने लोगों का ध्यान
अपनी ओर खींचा था
उस चित्र के पीछे की आँधी से
सभी अनभिज्ञ थे

वे नहीं जानते थे
व्यथा की भी अपनी
एक गरिमा होती है
जो नहीं बिखेरती
स्वयं को हर किसी के आगे

तुमने जो समझने की
क्षमता पाई हो तो
निस्संदेह सत्य को टटोलो

वरन् रंगों को देखकर
अभिभूत होना
तुम्हारे स्वभाव के अंग के संग
तुम्हारे पतन की घोषणा है ।

-निशा चौधरी

 

परिचय :

शिक्षा : हिंदी व संगीत से स्नातक
व्यवसाय : शिक्षिका , लेखिका
पता : बोकारो स्टील सिटी (झारखंड)
ईमेल – imnishworld@gmail.com

प्रस्तुति:- नित्यानंद गायेन

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