Home / वक्रदृष्टि / लोकतंत्र का तिलस्म

लोकतंत्र का तिलस्म

url

मेरे दिमाग पर जादूगर और जमूरो ने कब्जा कर लिया है। वो जो दिखाते हैं, मैं वही देखता हूं। वो जो बताते हैं, मैं वही सुनता हूं।

वह हवा में शहर बसाता है।

शहर को स्मार्ट बनाता है।

स्मार्ट शहर सीटी बजाता है।

और शहर सीटियों के शोर, साॅयरन की आवाज, वाहनों की भाग-दौड़, सिफ्टों में काम, और काम के बाजार से सज जाता है।

वह शहर में बाजार सजाता है।

बाजार में रोजगार को शरणार्थियों सा बसाता है।

रोजगार में निवेशकों को मुनाफा दिखाता है।

मुनाफे में खुशहाली के सपने कमाता है।

और फिर सपने हवा हो जाते हैं।

हवा में बसा शहर गायब हो जाता है।

लोग तालियां बजाते हैं, जिनके लिये शहर गायब हुआ वो भी, और जिनके लिये शहर बचा रहा वो भी।

वह कहता है- ‘यह ट्रिक है।‘

जमूरे ने जादूगरी के कुछ ‘ट्रिक‘ सीख लिये और वह जादूगर बन गया। उसके आने-जाने की खबरें छपती हैं। जादू देखने के लिये हजारों लोग जुटते हैं, या कहें- जुटा लिये जाते हैं।

जिनके सामने वह सवा सौ करोड़ लोगों को अपनी जेब से निकाल कर रख देता है।

जादूगर बना जमूरा पाॅलिटिकल ब्राॅण्ड बन जाता है।

आप पूछेंगे- ‘‘यह जादूगर कौन है?‘‘

हमारा जवाब है- ‘‘हम उसे जानते हैं, मगर नहीं जानते। हमने उसे बनाया है, मगर नहीं बनाया। हमने उसे चुना है, मगर नहीं चुना।….. हमारे लिये वह हवा में बसा शहर है।‘‘

आप कहेंगे- ‘‘भला यह भी कोई बात है?‘‘

हम कहेंगे- ‘‘यही तो जादू है। लोकतंत्र का तिलस्म है।‘‘

हमारे सामने कुश्वाहा कांत का रक्त मंदिर, दानव देश और खून का प्यासा घूम गया।

देवकीनंदन खत्री का चन्द्रकांता और चन्द्रकांता संतति का तिलस्म घूम गया।

चूनारगढ़ और सतपुड़ा की पहाडियां घूम गयीं।

लोकतंत्र में तिलस्म का होना घूम गया।

हम घूम गये, हवा में बसा शहर घूम गया, और जादूगर बना जमूरा देश-विदेश में घूम-घूम कर लोगों को घुमाता रहा।

वह घूम रहा है, और लोग घूम रहे हैं। देश-दुनिया में लोकतंत्र का तिलस्म घूम रहा है।

जादूगर और जमूरे ने हमारे दिमाग पर कब्जा कर लिया है। यह लोकतंत्र का तिलस्म है भाई कि जो होता है, वह दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top