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निवेदिता भावसार की चार कविताएँ

निवेदिता भावसार  फोटो1. तुम्हारा नाम बहुत खूबसूरत है ,पता तुम्हे …

तुम्हारा नाम बहुत खूबसूरत है ,पता तुम्हे …
मैं मर मिट जाती हूँ इन अक्षरों की बनावट पर
और जब पुकारती हूँ ना मन ही मन
तो एक मुस्कराहट सी आ जाती है।
जैसे उन अक्षरों का सर बाँध रही हो।

सोचती हूँ ,
अपना नाम बदल के तुम्हारा रख लूँ।
सूरज ,
क्या तुम अपना नाम बदलना चाहोगे ,
कहो तो चाँद रख दूँ ?
या तुम्हे किसी शहज़ादे का नाम दे दूँ
उसी का जो सात सुनहरी घोड़ों के रथ पर सवार आता है
और छा जाता है पूरे आसमान पर ………….
रौशन रौशन

 

2. सैलरी का एक चौथाई हिस्सा और प्रेम

एक बात कहूँ
बहुत मुश्किल है ये कहना
के आआह…… कितना सुंदर फूल है ,
कितनी कोमल पत्तियां हैं
कितना भोला लगता है ना ये चाँद,
भर लूं आँखों में इसे
या इस सूरज को तो ना मैं एक दिन
अपनी अंगूठी में जड़वा ही लुंगी
जब हिसाब में पॉइंट के बाद के आखरी अंको में
आया डिफरेंस ना मिल रहा हो।
या जब आपके आस पास
ही बैठे हो कई सारे लड़के फाईलों में सर खपाए हुए।
या फिर आपके पास हो एक सुंदर सा केबिन
अच्छे से अच्छा कंप्यूटर
हाई स्पीड इन्टरनेट
और फेसबुक लॉक हो …

और तो और
केबिन की छत पर लगे हों हज़ारो कैमरे
जिनमे झाँक रही हो आपके बॉस
की दो बड़ी बड़ी आँखें
काटते हुए अपने सरोते से
आपकी सैलरी का एक चौथाई हिस्सा
बारीक बारीक टुकडो में
पान में भरके चबा
पीकदान में थूकने को

तो कहो
क्या ऐसे में भी कोई लिख सकता है
प्रेम कहानी ..
सच है… प्यार करना आसान है
मगर लिखना मुश्किल ।

 

3. व्यस्त अस्त व्यस्त

व्यस्त व्यस्त लोगों की
अस्त व्यस्त दुनिया में
अदला बदली होती रहती है ख्यालों की
मिले जुले रहते हैं यहाँ वहां इक दूसरे में
अलग थलग होके भी
कुछ भी गुम नहीं होता ,
बस मिलता नहीं है
वक़्त सा ..
व्यस्त सा ..
और जब मिल जाता है
साँस
आती है
जाती है
जाती है
आती है
पता ही नहीं चलता ना
कब आती है कब जाती है
फुर्सत किसे है
सोचने की
चश्मा हटा के देखने की
कि चाय में मक्खी गिरी है ,
और उसके सोग में रो रही हैं मक्खियाँ
कप से चिपककर
चींटियाँ भी उसके रिश्ते में हैं शायद
खफा हो ,आ रही है
लेने को बदला खून का

 

4. जब भी मैं बोली

जब भी मैं बोली
आसमान गिरा
धरती हिली
जब भी मैं चुप रही
हवा रुकी
नदी ठिठकी
और जब भी मैंने
कहते कहते
बात अधूरी छोड़ी
रिश्ते बचे
लाज रही

-निवेदिता भावसार

कवि परिचय :

जावरा पॉलिटेक्निक से इलेक्ट्रिकल विषय में डिप्लोमा व , साहित्य में रूचि होने के कारण हिंदी साहित्य में पार्ट टाइम एम.ए. भी किया है। फ़िलहाल कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत । पढ़ने –लिखने में रूचि| ग़ज़लें पढ़ने का शौक । बशीर साब और दुष्यंतकुमार पसंदीदा शायर हैं।

संपर्क : निवेदिता भावसार
D/O श्री रमेश चन्द्र भावसार
C-१२/३८ L.I.G. ऋषिनगर उज्जैन (मध्यप्रदेश)

प्रस्तुति : नित्यानंद गायेन

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One comment

  1. सुधीर कुमार सोनी

    सभी कवितायेँ सुंदर ,लाजवाब हैं ,शुभकामनायें |

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