Home / वक्रदृष्टि / हमें हनुमान जी की फिक्र है

हमें हनुमान जी की फिक्र है

hanuman_by_molee-d3joem9

खबर है-

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपनी जेब में हनुमान जी की लघु प्रतिमा लिये फिरते हैं। जहां जरूरत पड़ी, जेब से निकाल कर प्रेरणा ले लेते हैं।

खबर यह भी है, कि

प्रधानमंत्री कार्यालय के आरटीआई विभाग में किसी ने पूछा- ‘‘क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति में आने से पहले किसी रामलीला पार्टी में काम करते थे?‘‘ साथ में यह सवाल भी था- ‘‘वह किस प्रकार की भूमिका निभाते थे?‘‘

आगे खबरों का खुलासा क्या होगा? नहीं कह सकता। अभी तो ‘‘स्टार्ट अप इण्डिया‘‘ और ‘‘स्टैण्ड अप इण्डिया‘‘ हो रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे प्रधानमंत्री जी के हाथों में सोने की लंका लग गयी है। वो 10 हजार करोड़ के फण्ड के साथ 3 साल की छूट का एलान कर रहे हैं।

खबरों की मानें तो ‘मोदी लीला‘ बड़ा पापुलर हो रहा है। मोदी जी को ‘फिल-गुड‘ हो रहा है।

भाजपा के पास राम नाम का मास्टर प्लान है।

संघ के पास रामनामी का एक्सन प्लान है।

विश्व हिंदू परिषद के राम भक्त तोगडिया जी कहते हैं- ‘‘केंद्र में तो भाई की सरकार है।‘‘ जिनके हृदय में राम जी का वास है।

हनुमान जी के हृदय में रामजी के वास का प्रमाण है, उन्होंने सीना चीर कर दिखाया था। अपने भाई जी मुश्किल यह है, कि विपक्ष सीना चीरने पर उतारू है, मगर भाई जी सीना चिरवाने को तैयार नहीं हैं। वो बताने में लगे हैं, कि वहां ‘राष्ट्रधर्म‘ है।

वैसे, कहीं गंडा-ताबीज की तरह हनुमान जी कहीं बंधे हों, तो हमें पता नहीं है। ओबामा जी के जेब में न जाने कब से हनुमान जी पड़े थे, पता तो अब चला कि ‘जेबी हनुमान‘ अमेरिका में हैं।

सवाल जायज है, कि लीबिया के ध्वंस और सीरिया के दहन का सम्बंध लंका दहन से है या नहीं?

कहीं ऐसा तो नहीं कि जेबी हनुमान के उकसावे में ओबामा जी आ गये? और अब राम जी के साथ हनुमान जी मोदी जी के हृदय में आ बसे हैं? और इण्डिया के लिये भारत दहन की योजना पर अमल करा रहे हैं?

हमें, ओबामा जी और मोदी दी की नहीं, हनुमान जी की फिक्र हो रही है जिन्हें विध्वंसक बनाया जा रहा है।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top