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क्यों पैदा होते हैं, अनुपम खेर जैसे लोग?

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अमिताभ बच्चन ने पूरी जवानी, अपनी फिल्मों में जैसी जिंदगी जी, यदि वो वास्तव में वैसे जीते तो या तो बुढ़ापे में उम्र कैद की सजा काट कर जेल से बाहर आ रहे होते, या उन्हें मौत की सजा मिली होती, या जैसे लोगों के साथ वो फिल्मों में लड़ते-भिड़ते रहे हैं, उन्हीं में से कोई उन्हें ठिकाने लगा चुका होता।

लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।

उन्हें ख्याति मिली, नाम मिला, दाम मिला, मिलेनियम स्टार का दर्जा मिला। वो आज भी सफल और सम्मानित लोगों की जमात में हैं।

राजनीति उन्होंने की थी और तौबा भी कर लिया था।

राजीव जी से दोस्ती टूटी, गांधी परिवार से रिश्ता टूटा।

दिल भी टूटा और दिमाग को भी झटका लगा। और भी ऐसा बहुत कुछ हुआ, जो नहीं होना चाहिये था।

अनुपम खेर साहब यह आपके लिये है।

यह जानकारी तो आपको होगी ही कि आप अमिताभ बच्चन नहीं हैं। आपकी कद-काठी, आपकी ऊंचाई भी उतनी नहीं है। सभी का अपना दर्जा होता है और आपका अपना दर्जा क्या है? यह भी आपको पता होगा। जिस दर्जे में आप हैं, उस दर्जे में नरेंद्र मोदी भी नहीं हैं। जिनके पीछे खड़ा होने में बड़ा मजा आ रहा है, बड़ा फायदा हो रहा है।

राजनीति में मोदी जी का सितारा अभी चमक रहा है।

यह चमक धूमकेतु की भी हो सकती है।

जिनके कार्यकाल में देश और आम लोगों के लिये जितना बुरा होना चाहिये था, वह सब हो रहा है।

सामाजिक असहिष्णुता बढ़ी है।

आप नहीं मानते।

लेकिन, आपके तेवर, सच-झूठ को देख कर मुझे पक्का यकीन हो गया है, कि असहिष्णुता बढ़ी है।

आपको 5 फरवरी से शुरू होने वाले कराची साहित्य महोत्सव में शामिल होना था। भारत से 18 लोगों को आमंत्रित किया गया था, उनमें एक आप थे। 17 लोगों को पाकिस्तान का वीजा मिला, 18वां आप रह गये।

‘आप आहत हुए‘, खबर है।

आप कितना आहत हुए, और आपका आहत होना कितना वास्तविक है? यह तो आप ही जानेंगे।

आपने कहा- ‘‘कश्मीरी पंडित होने, कश्मीरी पंडितों का मुद्दा उठाने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने, देशभक्त होने और असहिष्णुता के मामले में बोलने की वजह से मुझे वीजा नहीं दिया गया।‘‘ आपने यह भी कह दिया कि ‘‘मैं उस मुल्क में नहीं जाता। अपने देश की बुराई नहीं करता। मैं आतंकवादियों की भाषा नहीं बोलता।‘‘ आपने यह भी कह दिया कि ‘‘दोबारा बुलावा आया तो पाकिस्तान जाऊंगा।‘‘

लेकिन, पहले जाने के लिये आवेदन तो कीजिये।

पाकिस्तान के उच्चायोग ने कहा- ‘‘आपने वीजा के लिये आवेदन ही नहीं दिया था।‘‘ जिसकी जानकारी आपने गोलमोल दिया, कि दो बार पहले भी आपको वीजा नहीं दिया गया था। कि पाक सरकार नहीं चाहती कि आप वहां आयें। कि आयोजकों ने क्षमा मांगी। …..और अंत में कि अब आपके पास समय नहीं है। अपना समय आपने किसी दूसरे को दे दिया।

भारत में, सरकारी मीडिया ने आपके पक्ष में माहौल बनाया। एक ने तो सम्पादकीय तक लिख मारा ‘‘एक कलाकार से डरने वाले‘‘

बाद में, किरकिरी हो गयी।

हमारा दिमाग दुखने लगा है, कलाकार महोदय।

आप देश भक्त हो गये। मोदी भक्त हो गये। कश्मीरी पंडित हो गये। भारतीय कब होंगे? गुजराती, पंजाबी, बंगाली, मराठी, उडि़या, मद्रासी और कई वासी तो यहां हैं, जरूरत भारतवासी की है- जो हिंदू भी है, मुसलमान भी है, सिक्ख, इसाई और पारसी भी हैं।

भारत में शायद, फिल्म इण्डस्ट्रीज ही वह पहली जगह है, जहां भारतीय हों न हों, मगर जहां किसी की जाति नहीं है। धर्म एवं नस्ल के बंधन को भी उसने सबसे पहले तोड़ा। उसमें यह कश्मीरी पंडित कहां से आ गया?

क्या ‘वेडनेस डे‘ में नसीरूद्दीन शाह के साथ काम करते हुए आपने अपने को कश्मीरी पंडित पाया था?

नहीं लगता।

देश की जनता ने अनुपम खेर को जाना और माना भी। वह भी नहीं जानती थी, कि आप अपने को कश्मीरी पंडित मानते हैं।

सोचिये! और अपनी ओर देखिये।

भारत माता की जय करने वालों की शोहबत और मोदी भक्ति ने आपको कितना छोटा बना दिया?

कभी सोचने की कोशिश की है आपने, कि यदि फिल्मी गीतों से मोहम्मद रफी की आवाज को हटा दिया जाये तो कितना बड़ा और कितना गहरा सन्नाटा होगा वहां? देश की जनता ने इस नायाब आवाज को कभी धर्म की सूरत नहीं दी। नौशाद या मदन मोहन के संगीत में हिंदू या मुसलमान को किसी ने नहीं ढूंढा। शैलेन्द्र, मजरूह या कैफी आजमी कभी गैर नहीं रहे। उसे इस बात से कभी फर्क नहीं पड़ा कि दिलीप कुमार युसूफ भाई हैं। उसके लिये राज कपूर, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना पंजाबी या देवानंद बंगाली बाबू रहे ही नहीं। आमीर खान और शाहरूख खान ने कह दिया कि ‘‘असहिष्णुता बढ़ी है‘‘ तो वो मुसलमान हो गये। आपके पक्षधर कालिख लेकर निकल पड़े। उनकी पत्नियों और बच्चों को आप क्या कहेंगे- आधा हिंदू, आधा मुसलमान?

यह तो तमाशा ही ना हुआ खेर साहब?

जिन्होंने असहिष्णुता का मुद्दा उठाया, सम्मान वापस किये, उन्हें आप असहिष्णुता के मुद्दों का ठेकेदार क्यों समझ रहे हैं? और यह किसने कह दिया कि देश में सब कुछ ठीक-ठाक है, असहिष्णुता नहीं है? कि मोदी भक्त ही देशभक्त होता है?

आपको खबर होनी चाहिये कि जो किरदार बनाते हैं, वो किरदारों से छोटे नहीं होते। आप किरदार बनाते नहीं, जो हैं, उसे जीते हैं। उसे ही जी कर आपने कमाया और नाम पाया है। धूमकेतु का पीछा मत कीजिये। राजनीति में दुम कटा कर, अपनी सूरत बचाने वालों की कमी नहीं। सम्मान का बड़ा झालर आपको मिल चुका है। जिसे वापस करने की परिस्थितियां, आपके लिये कभी नहीं बनेंगी, चंवर सा डोलायें। सरकार और व्यवस्था की आप उपज हैं। यह भी जान लें कि पाकिस्तानी कलाकारों (गायकों) को इस देश में जिन्होंने काला झण्डा दिखाया, वो मोदी सरकार का हिस्सा है, आवाम नहीं। कि पाकिस्तान का इतिहास भारत से अलग नहीं। आज और आने वाला कल भी अलग नहीं होगा। क्या आपको नहीं लगता, राजनीति में जिनका सितारा अब चमक रहा है, वो बुझ हुए तारे हैं?

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