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चीन की सरकार समाजवाद की ओर लौटना चाहती है?

156094611चीन हमारे लिये आज भी पूर्व समाजवादी देश है। जिसने समाजवदी जमीन पर मुक्त बाजारवादी अर्थव्यवस्था के जरिये आर्थिक समृद्धि हासिल कर ली है, और वैशिवक स्तर पर अमेरिका के समकक्ष सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। माना यही जा रहा है, कि उसने एक समानांतर वैशिवक वित्त व्यवस्था की रचना कर ली है, और रूस के साथ मिल कर मुक्त बाजार के नये क्षेत्र की रचना कर रहा है। जहां बिलेनियरों की तादाद तेजी से बढ़ी है।

11 सितम्बर 2013 को जारी हयूरन रिच लिस्ट के अनुसार -चीन में 315 बिलेनियर हैं। पिछले साल इनकी संख्या 251 थी, और एक दशक पहले चीन में कोर्इ बिलेनियर नहीं था।

एक दशक में आया यह परिवर्तन किसी भी समाजवादी देश और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के लिये शर्मनाक है। अब वह समाजवाद की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है, ताकि खुद को बचाया जा सके। कोशिशें कितनी र्इमानदार हैं? तय होना बाकी है।

धनवानों की सूची के अनुसार, ऊपर से पांच बड़े बिलेनियरों की सम्पतित एक साल में दूनी हुर्इ और 1000 सबसे अमीर लोगों की सम्पतित वृद्धि दर एक साल में 12 प्रतिशत है। इसी तरह ऊपर से 50 बड़े लोगों की सम्पतित 15 सालों में 500 गुणा बढ़ी और पिछले एक दशक में 17 गुणा की बढ़ोत्तरी हुर्इ। पूंजीवादी देशों की तरह ही चीन में विशिष्ट वर्ग का पिरामीड़ बन गया है। इन गिने-चुने लोगों के नीचे 64,500 मिलेनियरों की सतह है, जिनकी निजी सम्पतित 100 मिलियन यूआन (16 मिलियन डालर) है, और इनके नीच 1.05 मिलेनियर ऐसे लोग हैं, जिनकी सम्पतित 10 मिलियन युआन (1.6 मिलियन डालर) है। बिलेनियरों की तादाद के मामले में अमेरिका के 442 बिलेनियरों के मुकाबले चीन दूसरे नम्बर पर है, जहां 315 बिलेनियर हैं।

वैसे तो चीन के विकास की दिशा का बदलना और समाजवादी समाज निर्माण के स्थान पर मुक्त बाजारवादी अर्थव्यवस्था की ओर मुड़ना इसकी मूल वजह है, मगर प्रस्तुत रिपोर्ट में इसकी दो वजहें बतार्इ गयी हैं, जिसकी वजह से पूंजी का जमाव निजी क्षेत्रों में हुआ। एक- रियल स्टेट का व्यापार और दो- सत्तारूढ़ राजनीतिक दल -चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और प्रांतीय सरकारों- से इस वर्ग की निकटता। जिसने चीन में राजनीतिक भ्रष्टाचार को बढ़ाने का काम किया। राजनीतिक सहयोग से ही न सिर्फ निजी पूंजी का संचय एवं विस्तार हुआ, बलिक समाज के विकास की दिशा भी बदल गयी। समाजवादी व्यवस्था में पूंजीवाद का उदय हुआ, और वर्गविहीन समाज का लक्ष्य वर्ग विभाजित समाज ने ले लिया। उसकी पूरी विसंगतियां अब चीन में नजर आने लगी हैं। जन असंतोष की वजह भी यही है।

दुनिया में रियल स्टेट के बिजनेस की तरह ही चीन में भी रियल स्टेट के बिजनेस ने विस्तार पा लिया है। धनवानों की जारी सूची में हर चौथा धनवान इसी व्यापार से जुड़ा है। पहले स्थान पर क्लैंग जिनटीन का नाम दर्ज है, उन्होंने औधोगिक उत्पादन से रियल स्टेट के व्यापार को अपनी समृद्धि का आधार बनाया। वो डालियन क्लैंड ग्रूप के प्रमुख हैं, और हयूरन रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे बड़े भू-स्वामी में से एक हैं। 2013 के अंत तक उनके मैनेजमेण्ट में 17 मिलियन स्क्वायर मीटर जमीन होगी। वाग की सम्पतित एक साल में दो गुणा से ज्यादा हो गयी है, लगभग 22 बिलियन डालर।

वाण्डा ग्रूप ने अमेरिकन मूवी थियेटर चैन ‘ए एम सी थियेटर’ को पिछले साल 2.6 बिलियन डालर में खरीद लिया, और अब वो दुनिया के बसे बड़े सिनेमा आरेटर बन गये हैं। इसे अलावा उन्होंने बि्रटिश जहाज बनाने वाली कम्पनी सनसीकर को भी खरीद लिया है। उन्होंने घोषणा की है, कि वो लंदन के होटल और लक्जरी अपार्टमेण्ट काम्पलेक्स के व्यापार में 1 बिलियन डालर पूंजी निवेश करेंगे।

राजनीतिक साझेदारी से विकसित हुआ चीन का उधोग, 2008 के वैशिवक मंदी की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ, क्योंकि उसके मुख्य आयातक देश अमेरिका, यूरोप और जापान हैं, जोकि मंदी की चपेट में आ गये। जिनका विकास दर थम सा गया है। बिजिंग सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को इनके प्रभावों से बचाने के लिये 2008-09 के दौरान प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा की और बाजार में मुद्रा की नयी खेप उतार दी गयी। जिसकी वजह से एक ओर बाजार भाव तेजी से बढ़ा, वहीं दूसरी ओर उसी अनुपात में धनिकों की समृद्धि बढ़ती चली गयी। चीन की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों ने ‘प्रापर्टी बबल’ की चेतावनी दी। जिसने बाद में वित्त व्यवस्था को असिथर कर दिया और सम्पतित ज्यादातर लोगों की पहुंच से बाहर हो गयी।

चीन की मुक्त बाजार व्यवस्था से सम्बद्धता ने उसकी वित्तीय व्यवस्था में ही नहीं, उसके राजनीतिक ढांचे को भी प्रभावित किया। उसकी राजनीतिक संरचना जन विरोधी हो गयी है। समाज के बहुसंख्यक वर्ग के हितों से कट कर, अब वह उन बाजारवादी धनपतियों के हितों से जुड़ गयी है, जिनके विरूद्ध असंतोष बढ़ता जा रहा है। समाजवाद की गलियां चीन में संकरी हो गयी हैं, और उदारवाद की सड़कें इतनी चौड़ी कि राजपथ का अर्थ बदल गया है।

हयूरन रिपोर्ट के अनुसार 1000 नवधनिक वर्ग में से 153 लोग या तो 12वीं नेशनल पिपुल्स कांग्रेस के प्रतिनिधि हैं, या फिर चाइनीज पिपुल्स पालिटिकल कन्स्यूलेटिव कांफ्रेन्स के प्रतिनिधि हैं। 7 लोग तो एनसीपी स्टेंडिंग कमेटी के सदस्य भी हैं। जिनकी संख्या 2012 में 4 थी। हयूरन के संस्थापक रूपर्ट हुचवर्फ ने दो साल पहले कहा था कि ”यदि धनवानों की सूची में न दिखने वाले बिलेनियरों के नाम जोड़ दिये जायें तो यह सूची लगभग 600 -दो गुणा- हो जायेगी। जोकि चीन की राजनीति में बड़ा ही संवदेनशील मामला है।

तार्इवान में वान्ट चार्इना टार्इम्स के वेबसार्इट में ”चार्इना रेड नाबिलिटी” के तहत कम्युनिस्ट पार्टी आफ चार्इना के महत्वपूर्ण लोगाें के बच्चों की समृद्धि के बारे में विस्तृत जानकारियां दी गयी हैं। पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन के बड़े बेटे जियांग मिंग हेंग ने चाइना नेट काम की स्थापना की। वो चर्चित राजनीतिज्ञों के बच्चों में सबसे आगे है। उनकी सम्पतित 166.6 मिलियन यूआन -लगभग 26.4 मिलियन डालर- है। इसके अलावा वो ‘शंघार्इ एलायन्स इन्वेस्टमेण्ट’ के चेयरमैन भी हैं। इस कम्पनी ने शंघार्इ आटोमोटिव इण्डस्ट्रीज, शंघार्इ एयरपोर्ट ग्रूप, फोनिस्क सेटेलार्इट टीवी और ऐसे ही अन्य कम्पनियों में निवेश भी किया है।

इन नव अभिजात्य वर्ग और करोड़ों कामगर, गरीब किसानों एवं समाज के कमजोर वर्ग के बीच दूरियां लगातार बढ़ रही हैं, और अब यह संम्बंध हिंसक भी होता जा रहा है। जाेंग किंगहाउ पर एक बेरोजगार मजदूर ने 13 सितम्बर को हमला कर दिया। जोंग खाध एवं पेय पदार्थ उत्पादक कम्पनी हैंग्ज़हऊ वाहाहा ग्रूप के चेयरमैन और घोषित सूची में दूसरे नम्बर के धनवान हैं। जिनके पास 18.7 बिलियन डालर की सम्पतित है, जिसमें 2012 से अब तक 48 प्रतिशत की वृद्धि हुर्इ है।

शिन्वा न्यूज एजेन्सी के अनुसार, एक 49 वर्षीय विस्थापित मजदूर यांग ने बिलेनियरों के द्वारा विस्थापित कामगरों को सहयोग देने के टीवी कार्यक्रम को देखने के बाद, सहयोग पाने के लिये जोंग के घर के करीब उनसे काम पाने के लिये मिला। जिसे जोंग ने अस्वीकार कर दिया। परिणाम स्वरूप नाराज यांग ने जोंग पर हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया।

इस घटना के बाद से मीडिया यह अनुमान लगाने लगी है, कि चीन में अब प्रार्इवेट सिक्यूरिटी का व्यापार तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि नवधनिक वर्ग में असुरक्षा की भावना बढ़ेगी और वो अपने और अपनी सम्पतित की सुरक्षा के लिये निजी सुरक्षा व्यवस्था बनायेंगे। किंतु चीन की नयी सरकार ने इसे चेतावनी के रूप में लिया है, कि अब लोगों की नाराजगी विस्फोटक होती जा रही है, जो जायज है।

सरकार आर्थिक समृद्धि के साथ लोगों के जीवनस्तर में सुधार के लिये समाजवादी सामाजिक विकास योजनाओं की ओर मुड़ रही है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीन की नयी सरकार महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन और आत्मालोचना के दौर से गुजर रही है।

कम्युनिस्ट पार्टी आफ चार्इना के जनरल सेक्रेटरी शि जिन पिंग पार्टी और देश के आम जनता के बीच की दूरियों को घटाने और पार्टी नेताओं के द्वारा की गयी गलितयों को सुधारने के लिये ‘आत्म-आलोचना कार्यक्रम’ की नयी पहल की है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत ‘आत्म-स्वीकृति’ पार्टी या अदालत के बंद कमरे में बनी, बलिक ‘चार्इना सेण्ट्रल टेलीविजन’ पर करना होता है। जिसे देश की आम जनता देखती है। इस समय यह चीन में देखा जाने वाला सबसे चर्चित कार्यक्रम बन गया है। जिसकी शुरूआत प्रांतीय पार्टी अधिकारियों एवं प्रमुख से की गयी है। टेबुल के चारो ओर उत्तरी प्रांत हाबेर्इ के अधिकारी बैठे थे, जो एक-एक कर कैमरा के सामने अपनी असफलताओं की जानकारी स्वकारोकित के साथ दे रहे थे। बीच में कम्युनिस्ट पार्टी आफ चार्इना के जनरल सेक्रेटरी शि जिन पिंग बैठे थे, जो अपनी प्रतिक्रिया विहीन खामोश नजरों से देख रहे थे। इसके बाद भी उनकी गंभीरता और नाराजगी खुलेआम लग रही थी।

राष्ट्रपति शि जिन पिंग ने पिछले साल नवम्बर में पार्टी प्रमुख का पद संभाला और इस साल मार्च 2013 में राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद उन्होंने पार्टी के भीतर के भ्रष्टाचार को समाप्त करने को तरजीह देना शुरू किया। उनके लिये सत्तारूढ़ राजनीतिक दल की बिगड़ती हुर्इ छवि का सुधरना, पहली वरियता है। वो आम जनता और पार्टी के बीच की दूरियों को घटाना चाहते हैं। उनके लिये पार्टी की साफ छवि सबसे बड़ा मुददा है, जिसकी वजह से समाज में एक नये अभिजात्य वर्ग का उदय हुआ है। जो बदले हुए उस चीन की गंदी पहचान है, जिसकी वजह से समाजवाद की ओर वापसी की राह आसान नहीं होगी।

यह ठीक है कि चीन आज एक वैशिवक शकित है, मगर जो बन सकता था, आज वह नहीं है। वेनेजुएला के ‘स्ट्रीट गर्वमेण्ट प्रोग्राम’ की तरह ही, चीन ‘मास लार्इन कम्पेनिंग’ -जन सम्पर्क अभियान- की शुरूआत कर चुका है।

पिछले महीने राष्ट्रपति शि-जिन पिंग ने सरकारी समारोहों में शराब को प्रतिबंधित कर दिया और कैड़रों के भोजन में 4 सामान्य खाना और 1 सूप तक सीमित करने का काम किया। समीक्षकों का मानना यह है, कि सरकार एवं पार्टी के जीवन में आयी भव्यता एवं समृद्धि के प्रति लोगों की बढ़ती हुर्इ नाराजगी को संतुलित करने की यह कोशिश है, जिससे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में भी राष्ट्रपति की पकड़ मजबूत होगी। सरकार, कम्युनिस्ट पार्टी और आम लोगों को यह लगने भी लगा है कि शि जिन पिंग अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति हू जिनताओं से अलग हैं।

‘आत्म-आलोचना’ कार्यक्रम और अपनी गलितयों की स्वीकारोक्ती में वरिष्ठ पार्टी अधिकारी, प्रांतीय गर्वनर के साथ निचले स्तर पर काम करने वाले कैड़रों को भी शामिल किया गया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि ”यह सिर्फ शुरूआत है। हाल के महीनों में शि जिन पिंग और स्टैणिडग कमेटी के 7 अन्य सदस्यों ने पदाधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है, कि वो एक साल लम्बे ‘मास लार्इन कम्पेनिंग’ का अनुशरण करें।”

सरकारी न्यूज एजेन्सी शिन्वा ने सरकार के द्वारा संचालित कम्पनियों -संस्थानों में मौजूद पार्टी इकार्इ, सरकारी विभाग और विश्वविधालयों में शि जिन पिंग की टिप्पणियों पर चर्चा के लिये आयोजन किये जाने की जानकारियां दी है। जिसका मकसद आपतितजन कार्य करने की पद्धति को खत्म करना और पार्टी तथा देश की आम जनता के बीच नजदीकी सम्बंधों की पुर्नस्थापना है। मास लार्इन कम्पेनिंग प्रोग्राम को ले कर मार्इक्रो-ब्लाग्स पर लोगों के मत विभाजित हैं। कुछ लोग काम के तरीके के सुधार के पक्ष में हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोगों के लिये यह इतिहास का संवेदनशील ऐसा अध्याय है, जिसे वो असुविधाजनक मान रहे हैं। चीन के उदारवादी इसे जनवादी मरहम-पटटी करार दे रहे हैं। उनका मानना है कि ”सरकार और ज्यादा मजबूत राजनीतिक सुधारों के न होने की वजह से ऐसा कर रही है।”

शि जिन पिंग ने हाबेर्इ में यह स्पष्ट कर दिया है कि ”वो वास्तविक आलोचना और वास्तविक आत्म-आलोचना चाहते हैं।” मगर आत्म-आलोचना एवं स्वीकारोकित की जितनी जानकारियां मिली हैं, उसमें कुछ निजी गलितयाें और अपने को विशिष्ट समझने की भूल, काम में की गयी लापरवाही के अलावा अब तक वह सच सामने नहीं आया है, जिसकी वजह से चीन की समाजवादी दिशा का बदलना हुआ। सच यह है, कि अपनी सूरत से नकाब हटाने और मुक्त बाजार व्यवस्था की बुरार्इयों से जन्मे निजी पूंजी के होने से परदा उठाने की शुरूआत अभी नहीं हुर्इ है। आज के चीन में, सुविधा भोगी अभिजात्य वर्ग और राजनीति पर अपनी पकड़ बढ़ाने वाले वर्ग का असितत्व है। यह एक बड़ी बात इसलिये है कि गलितयों और भ्रष्टाचार जैसे मुददे को छुपाया नहीं जा रहा है, बलिक समाधान एवं सुधार के लिये उसे सार्वजनिक किया जा रहा है। एक ऐसी पहल की गयी है जो नयी जन-संभावनाओं को जन्म दे सकती है।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सेण्ट्रल कमेटी के राजनीतिक ब्यूरो का विशेष सम्मेलन 22 से 25 जून तक हुर्इ, जिसमें सेण्ट्रल कमेटी के जनरल सेक्रेटरी शि जिन पिंग ने संचालन किया। कांफ्रेन्स के बाद जारी वक्तव्य में कहा गया कि पालिटिकल ब्यूरो के सदस्यों को चाहिये कि वो किसी को और कुछ कहने से पहले, उसे खुद करें।” इसे बात के निर्देश दिये गये कि ”पार्टी की कार्यपद्धति को बढ़ाने के लिये पालिटिकल ब्यूरो को नेतृत्व अपने हाथ में लेना चाहिये।” इस सम्मेलन के बाद ही आपतितजनक कार्यप्रणाली, नौकरशाही, औपचारिकता, फिजूलखर्ची और सुखवाद के खिलाफ अभियान शुरू किया गया। इस सम्मेलन में पार्टी ने अपने निर्णयों की र्इमानदारी से लागू करने के बारे में गंभीर चर्चायें की।

मास लार्इन कम्पेनिंग के तहत 11 से 12 जुलार्इ के दौरान उत्तरी चीन के हाबेर्इ प्रांत की यात्रा चीन के राष्ट्रपति शि जिन पिंग ने की। उन्होंने स्थानीय ग्रामीण क्षेत्र, कम्युनिटीज, इण्टरप्रार्इजेज और सरकारी विभागों का दौरा किया। वहां उन्होंने इस कार्यक्रम के तहत चलाये जाने वाले ‘शिक्षा अभियान’ की जानकारियां ली। इसी दौरान चीन के प्रधानमंत्री लि कियांग ने दक्षिणी चीन के ग्वांगज़ार्इ ज़ुआंग का निरिक्षण किया। इसी दौरान स्टेणिडंग कमेटी के 7 सदस्यों ने भी अलग-अलग प्रांतों का दौरा किया।

मास लार्इन कम्पेनिंग के अंतर्गत आयोजित 23-25 सितम्बर के एक सत्र में शि जिन पिंग ने कहा- ”पार्टी के भीतर पैदा हुए अंर्तद्वन्दों का हल निकालने के लिये आलोचना और आत्म-आलोचना की नीति एक प्रभावशाली हथियार है।”

एक साल के लिये, इस कार्यक्रम की शुरूआत जून 2013 में की गयी है, जिसका मूल उददेश्य चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व एवं आम जनता से सम्बंधों को बढ़ाना है। अघोषित रूप से सरकार को आम जनता के पक्ष में खड़ा करना है।

चीन के सामने मौजूदा दौर में जैसी भीतरी और बाहरी चुनौतियां हैं, उसे आम जनता के सक्रिय सहयोग के बिना हल कर पाना संभव नहीं है। हमारे सामने यह गंभीर सवाल है कि चीन की नयी सरकार क्या वास्तव में समाजवाद की ओर लौटना चाहती है? या वह दो समाज व्यवस्था के बीच नयी लकीर बनाने की बात सोच रही है?

हम इस बात को मानते हैं, कि आम जनता को धोखा देना किसी भी समाज व्यवस्था के लिये घातक है। और आम जनता के सहयोग एवं समर्थन के बिना न तो आंतरिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है, ना ही वैशिवक समस्याओं का। यदि चीन के विकास की दिशा बदलती है, तो यह उसके लिये एवं विश्व समुदाय के लिये अच्छा होगा। समाजवादी साझेदारी चीन की ऐसी अनिवार्यता बन गयी है, जिसे पाना आसान नहीं है।

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