Home / राष्ट्रीय परिदृश्य / भारत माता की, जय और वंदेमातरम् ने हमें डरा दिया

भारत माता की, जय और वंदेमातरम् ने हमें डरा दिया

president-patiala-wednesday-kanhaiya-february-virender-hindustan_4b89386e-d56d-11e5-b369-6a1e536aef0c

17 फरवरी 2016

नयी दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट।

बाहर और भीतर।

जहां जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को ‘देशद्रोह‘ के आरोप के तहत पेश किया गया। उन्हें 14 दिन के न्यायिक हिरासत में, तिहाड़ जेल भेज दिया गया। यदि यह सब इसी तरीके से होता तो, शायद लोकतंत्र में हमारे होने का भरम बचा रहता, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। और जो हुआ, वे हमारे भीतर एक खौफ की तरह बैठ गया कि हम खुख्वार भेंडियों से घिर गये हैं।

आज से पहले

‘‘भारत माता की जय!

और वंदेमातरम्‘‘ से हमें कभी डर नहीं लगा था, लेकिन आज के दिन ने हमें डरा दिया है। भारत माता की जय, और वंदेमातरम् ने हमें डरा दिया है।

सारा दिन और गये रात तक सोशल मीडिया पर खबरें छायी रहीं की खबरों और समाचार चैनलों को देख कर लगा ‘‘हद् हो गयी।‘‘ …..‘‘हद् हो गयी।‘‘ मगर, शायद हम खुद से यही कह रहे थे, कि तमाम हदों ने अपनी हदें पार कर लीं। ऐसी देशभक्ति जो आंखों पर पट्टी बांध दे और ऐसे लोग जो अपने जुनून को देशभक्ति कहें, हमने देखा नहीं था। यहूदियो के खिलाफ कभी नाजी जर्मन नहीं बना, ना ही वह फिलिस्तीनियों के खिलाफ इस्त्राइली सैनिक बना। ब्रिटिश उपनिवेशवादी या साम्राज्यवादी अमेरिका कभी नहीं रहा। मगर दिल्ली के चंद घंटों ने मंजरों को हमारे ऊपर से गुजार दिया।

भाजपा समर्थक वकीलों ने, बचाव पक्ष के वकीलों के साथ मारपीट की।

जेएनयू छात्र और एआईएसएफ और भाकपा कार्यकर्ताओं को घेर कर पीटा।

मीडियाकर्मियों के साथ बद्सलूकी की गयी, उन्हें मारा गया।

400 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था थी, और यह सब होता रहा।

कन्हैया कुमार पर पुलिस सुरक्षा में हमला हुआ। उन्हें पीटा गया। कचहरी परिसर में और कचहरी के भीतर।

हुआ यह भी कि सुप्रिम कोर्ट के द्वारा हालात का जायजा लेने के लिये भेजे गये कमीश्नरों (6 वरिष्ठ वकीलों की टीम) के साथ भी बद्सलूकी हुई। नारे लगाये गये, उन पर पत्थर फेंके गये। उन्हें मां-बहन की गालियां दी गयीं। कपिल सिब्बल को निशाना बनाया गया।

15 फरवरी के वारदातों की हदें पार कर दी गयीं। राष्ट्रीय झण्डा लिये, ‘केसरिया देशभक्त‘ हमलावर रहे। किसी की समझ में यह नहीं आ रहा था, कि यह हो क्या रहा है?

पुलिस अच्छे दर्शक की भूमिका क्यों निभाती रही है? ओपी शर्मा विधायक से लेकर 15 फरवरी के वारदात करने वाले वकील छुट्टा क्यों घूम रहे हैं? क्यों नयी वारदातें कर रहे हैं? उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

इस देश में अफजल गुरू और अजमल कसाब को भी अपना पक्ष रखने की आजादी मिली थी। लेकिन कन्हैया कुमार -जिनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है- और खुफिया ब्यूरो- आई.बी. ने भी गृहमंत्री को रिपोर्ट भेज दिया है, कि ‘‘उनके खिलाफ देशद्रोह के आरोप का कोई प्रमाण नहीं है।‘‘ लेकिन केसरिया देशभक्त उन्हें देशद्रोही करार दे कर न्यायालय में जाने से पहले ही मारने पर आमादा रहे। इस देश में न्यायालय की ऐसी तौहीन कभी नहीं की गयी। ऐसे वकीलों से उसका वास्ता कभी नहीं पड़ा था, जो गुण्डों से बद्तर हों।

इस देश में जो भी भला है, उसे आप तोड़ रहे हैं, और कहते हैं, यह देशभक्ति है।

नहीं जनाब! यह गलत है।

जेएनयू को देशद्रोहियों का गढ़ कहना और उसे बंद करने की साजिशें रचना गलत है।

दहशत फैलाने के लिये राष्ट्रीय ध्वज लहराना, वंदेमातरम् कहना और भारत माता की जय कहना तक गलत है। ये नारे नहीं, नारों को लगाने वाले गलत हैं।

कोई भी नजारा न तो हमारी नजरों के सामने से हट रहा है, और ना ही टिक रहा है। घटनायें इतनी तेजी से घट रही हैं, कि दिल भारी और दिमाग बोझिल है।

हम अपने को जंगल में, भेंडियों से घिरा हुआ पा रहे हैं। ऐसा लग रहा है, जैसे आदमखोरों ने हमें घेर लिया है।

कन्हैया कुमार की जगह अपने को खड़ा कर के देखें, आपको भी ऐसा ही लगेगा। क्या यह कहीं से भी स्वाभाविक लगता है, कि वकीलों का एक उन्मादी जत्था अपने शिकार को मारने के लिये रात 10 बजे तक, जब तक कन्हैया कुमार को पुलिस की वर्दी में छुपा कर, वहां से निकाल नहीं लिया गया तब तक, घेर कर खड़ा रहे, और उनके खिलाफ कोई कार्यवाही न हो? नहीं! यह स्वाभाविक नहीं है। अपनी देशभक्ति के लिये, किसी को गद्दार बनाना गलत है। यह तो अपनी आस्था दिखाने के लिये दी जाने वाली बलि है। यह स्वाभाविक नहीं है, कि किसी को खुलेआम मारने की सामूहिक साजिशें रची जायें, कोशिशें की जायें और पुलिस प्रशासन या तो लाचार हो या हाथ बंटाये।

हमने जो देखा सारा दिन, सारी रातें जिन वारदातों को महसूस किया है, उस दिन भी महसूस नहीं हुआ था, जिस दिन इस देश में पहली बार आंतरिक आपात काल की घोषणां की गयी थी। आज लग रहा है, जिन फाॅसिस्ट ताकतों के खिलाफ यह घोषणा की गयी थी, वे ही ताकतें शक्ल बदल कर आज सत्तारूढ़ हैं। हमारी आंखों में अंगुलियां डाल कर दिखा रही हैं, कि ‘‘हम तो ऐसे ही हैं।‘‘…

इस देश में आतंकवादियों को ऐसी सफलता कभी नहीं मिली कि वो देश, समाज और लोगों को बांट सकें, मगर देश की मोदी सरकार की सरपरस्ती  में भाजपा और संघ देश, समाज और लोगों को बांट रहे हैं। देशभक्ति का तमगा अपने सीने पर लगा कर, लोगों को देशद्रोही बना रहे हैं उनका यह जुनून इस सीमा तक बढ़ गया है, कि जो मोदी विरोधी है, सरकार विरोधी है, भाजपा और संघ विरोधी है, वह देशद्रोही है। ‘‘भारत माता‘‘ और ‘‘वंदेमातरम्‘‘ पर उनका काॅपीराईट है।

अपने इस दावेदारी को पुख्ता करने में जुटी सरकार जेएनयू के मुद्दे को विस्तार दे रही है। जिसका मकसद भाजपा और संघ की सोच से विपरीत सोच रखने वाले शिक्षण संस्थाओं और विश्व विद्यालयों को या तो अपनी गिरफ्त में लेना है, या उसे समाप्त करना है।

राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय भावनाओं को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिशें हो रही हैं।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top