Home / वक्रदृष्टि / नमोमय परमज्ञानी

नमोमय परमज्ञानी

orivtx14386025771438591582493ks-ktm-hindu-supporters-demands-nepal-as-a-hindu-state

मंत्रों में बड़ी ताकत होती है।

एक बार कान में फूंक दें, बस, चेला गुरू का।

इसलिये, जो अच्छे गुरू होते हैं, वो कान देखते ही मंत्र फूंक देते हैं। वे जानते हैं, कि चेलों के बिना गुरू को कोई नहीं पूछता। देशी गुरू के विदेशी चेले हों तो धौंस बड़ा जम कर पड़ता है। इसलिये गुरू पहले विदेश में जमते हैं, और फिर देश में धौंस जमाते हैं। वे जानते हैं, कि जो अमेरिका-यूरोप में चल गया, वह भारत में जम गया।

वैसे भी, भारत में देने को बहुत कुछ है।

आध्यात्मिक ज्ञान,

मौखिक विज्ञान

भौतिक संसाधन

अपार सम्पदा और जन समूहों से भरा विशाल बाजार।

गुरू अमेरिका से लेकर यूरोप तक, और कनाडा से लेकर आॅस्ट्रेलिया तक, मीडिया की मानें तो ‘अपना जलवा बिखेर चुके हैं, मंत्र फूक चुके हैं।‘

मंत्र फूंकने और मंत्र फुकवाने के लिये बड़े-बड़े आयोजन होते हैं, वार्षिक-उत्सव और दिक्षांत समारोह होते हैं।

और भी बहुत कुछ होता है।

चेलों की गिनती है,

समारोहों की तैयारियां होती हैं,

सुरक्षा व्यवस्था बनायी जाती है,

चारो और चैकसी का आलम होता है,

चैक-बाजार में फोटो लगाया जाता है,

निगरानी ऐसी कि तिनका भी सहम जाये, पत्ता भी खड़के तो बंदूकें तन जायें।

जितना बड़ा गुरू, उतनी बड़ी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था।

न जाने क्यों, गुरू और गुरू के समर्थकों को लगता है, कि लोग गुरू के जान के पीछे पड़े हैं?

न जाने क्यों उन्हें लगता है, कि गुरू की जान पत्ते पर टिकी है? कि पत्ता हिला नहीं, कि गुरू टपके नहीं। इसलिये, हवाओं का बांध कर रखने पर जोर है।

न हवा चले,

न पत्ता हिले,

और न गुरू टपके।

लेकिन हवा है, कि मानती नहीं, और गुरू है, कि जानते नहीं। उनको लगता है, चैकसी और निगरानी से धौंस पड़ता है। गुरू चल पड़ते हैं। मंत्रों का वजन बढ़ जाता है। गुरू के गुरूवई को विस्तार मिल जाता है।

पहले गुरूवई जप, तप और वन कंदराओं में चली,

फिर मठों और महंतों में चली,

आज कल राजपथ पर चल रही है।

राजनीति में बड़े-बड़े गुरू और गुरूओं के पैसे वाले गुरू पैदा हो गये हैं।

हमारे मोदी जी इस सदी के सबसे बड़े, राजनीति के, भारतीय गुरू हैं।

हालांकि सदी अभी मात्र डेढ़ दशक की हुई है, और सोलहवां साल अभी-अभी लगा है। इसलिये वो जहां भी जाते हैं, वहां जलवा बिखेर देते हैं। लोगों के कान में माईक लगा कर मंत्र फूंकते हैं।

हर मंत्र का एक ही सार है- ‘‘जो ज्ञानी है, वह अज्ञानी है, और जो अज्ञानी है, वहीं नमोमय परम ज्ञानी है।‘‘

जिनके पास नये वित्त मंत्रों की कोई कमी नहीं।

वो चोर के कान में चोरी का मंत्र फूंकते हैं, और साव को जागत रहने की पट्टी पढ़ाते हैं।

अभी-अभी गुरू ने केंद्रिय विश्व विद्यालयों के लिये 207 फूट ऊंचा देशभक्ति का मंत्र फूंका है।

हमारे एक विश्व विद्यालयीन प्रोफेसर मित्र ने कहा- ‘‘बड़ी मुश्किल है भाई, 207 फूट की ‘एक्यूरेसी‘ बड़ी मुश्किल है।‘‘

गुरू के मंत्र को गुरू के शिष्यों ने सुनाया है, अब गुरू मुंह खोलेंगे तो पता चलेगा कि राष्ट्रभक्ति की ऊंचाई 207 फूट क्यों है? और यदि 206 या 208 फूट हो गया तो, क्या होगा? वैसे माहौल जैसा है, वैसे माहौल में तो स्वयंभू अदालत में यह राष्ट्रद्रोह हो सकता है।

नमोमय परमज्ञानी ही बता सकते हैं, कि ऐसा हुआ तो क्या होगा?

वैसे उमर अब्दुल्ला कहते हैं- ‘‘यह केंद्र की सनक है।‘‘

मगर हम ऐसा नहीं कह सकते, क्योंकि नमोमय परमगुरू और चाहे जो भी हों, सनकी नहीं हो सकते।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top