Home / सोच की जमीन / राष्ट्रवाद का हंथियार

राष्ट्रवाद का हंथियार

12819309_1079637095391760_3013498627742876569_o

यदि सरकार काम करना चाहे तो, इस देश में काम की कोई कमी नहीं है। या कहिये दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है, जहां सरकारों के लिये काम की कमी हो। लेकिन अपने देश की आम जनता को धोखे में डाल कर रखना जन विरोधी सरकारों की नीतियां बन गयी हैं।

उन्होंने लोकतंत्र को धोखा बना दिया है।

उन्होंने आर्थिक विकास को धोखा बना दिया है।

उन्होंने देशभक्ति को धोखा बना दिया है।

केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के पास मुद्दों की कमी नहीं है, मगर ऐसे मुद्दों की कमी है, जो दो साल की हुई मोदी सरकार की नाकामियों को छुपा सके। होने वाले घोषित विधानसभा चुनावों में आम मतदाताओं को बरगला सके। उसने राष्ट्रवाद को मुद्दा बना लिया है, और यह प्रमाणित करने में लग गयी है, कि भाजपा के अलावा इस देश में कोई भी राष्ट्रवादी नहीं है। कोई भी देशभक्त नहीं है। देश को देशद्रोहियों से खतरा है। सीधी सी बात है, -देश- भक्तों के पक्ष में आप मतदान करें।

लेकिन, इस देशभक्ति के निशाने पर सिर्फ देशद्रोही नहीं हैं, बल्कि पूरी व्यवस्था है। उसकी लोकतांत्रिक संरचना है। समाज और समाज का बहुसंख्यक वर्ग है। जिसे चुनावी जीत या चुनावी मात से, तय नहीं किया जा सकता है। पूरी तरह रोका या हराया नहीं जा सकता। यह ‘सोच‘ की गड़बड़ी है। अपने देश को चाहने वाले हर देशवासी के सामने इन ‘देशाक्तों‘ ने मुसीबतें पैदा कर दी है, जिनका लक्ष्य आर्थिक विकास के नाम पर अर्थव्यवस्था का निजीकरण करना है, और लोकतंत्र की ओट में फाॅसिस्ट तानाशाही की स्थापना है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय -जेएनयू- से उनकी नाराजगी की वजहें एक नही, कई हैं, लेकिन अब सबसे बड़ी वजह यह है, कि उन्हें वहां से चुनौती मिल गयी है, जहां से चुनौती मिलने की उम्मीद नहीं थी।

दलगत आधार पर भाजपा आज भी कांग्रेस को सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती मानती है, जिसके बारे में आलादिमाग प्रधानमंत्री ने संसद में कहा- ‘‘मृत्यु को यह वरदान मिला हुआ है, कि उसे बदनामी नहीं मिलती। उसी तरह कांग्रेस को भी वरदान मिला हुआ है। उसे बद्नामी नहीं मिलती।‘‘

विचार और नीतिगत आधार पर वामपंथ उनकी चुनौती है।

माओवादी उनके लिये अलग किस्म की चुनौती हैं। मनमोहन सरकार की तरह ही मोदी सरकार मोआवादियों को ‘आंतरिक सुरक्षा के लिये सबसे बड़ा खतरा‘ मानती है। जिन्हें आतंकी करार दिया जा चुका है।

कम्युनिस्टों को ‘देशद्रोही‘ मानना उनके प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिनके विरूद्ध संघ और भाजपा ने ‘देशभक्ति‘ और ‘राष्ट्रवाद‘ को अपना हथियार बना लिया है। कांग्रेस को देशद्रोहियों का पक्षधर करार दिया जा चुका है। उनकी कोशिश वामपंथियों के विरूद्ध कांग्रेस को तटस्थ बनाने की है। पश्चिम बंगाल और केरल विधान सभाओं का चुनाव सिर पर सवार है। भाजपा मोदी के जादू को कारगर प्रमाणित करना चाहती है।

जेएनयू का मुद्दा जब तक नहीं था, नरेंद्र मोदी के प्रचारित छवि में दरारें नहीं थीं

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ठीक से टिक नहीं पा रहे थे।

बिहार के नीतिश कुमार को क्षेत्रीय बनाये रखने में सफलता मिली।

अरविन्द केजरीवाल को थाम लिया गया।

भाजपा और मोदी को सफलता के नशे की लत् लग गयी।

लेकिन, जेएनयू के विवाद ने स्थितियां बदल दी हैं। कुछ ज्यादा ही समझदार किस्म के लोगों से उसका वास्ता पड़ गया है। ऐसे लोगों से उसका वास्ता पड़ गया है, जो सोच और समझ केे स्तर पर संघ और भाजपा से काफी मजबूत हैं।

‘‘जब भी कोई सरकार राष्ट्रवाद को अपना हंथियार बनाने के लिये विवश हो जाये, समझ लेना चाहिये, कि उसने आखिरी दांव चल दिया है।‘‘

संभवतः भारत में भाजपा यह दांव चल चुकी है।

स्थितियां तेजाब के तालाब की ओर बढ़ रही हैं।

संघ और भाजपा अपनी संगठनात्मक क्षमता और सत्तारूढ़ होने पर विश्वास कर सकती है। करती हुई लग भी रही है। फासीवाद के देशी संस्करण को बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रवाद की नयी समझ पैदा की जा रही है। वह अपने पक्ष में जन ध्रुवीकरण चाह रही है। सवाल यह है, कि भारत को मुक्त व्यापार का क्षेत्र बनाने वाली बाजारवादी ताकतें क्या चाहती हैं?

क्या वो ‘एक राष्ट्र, एक दल और एक नेता‘ को अपना समर्थन देना जारी रख पायेंगी? या इस सोच की लगाम कसने का निर्णय लेती हैं?

इस मुद्दे से टकराये बिना, चाह कर भी हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते। जहां तक हमारी समझ है, वित्तीय ताकतें दबे कदम बढ़ने की सलाह बांट रही हैं, ताकि उनके सामने भी विकल्प हो, लेकिन संघ और भाजपा का एक बड़ा तबका राष्ट्रवाद को उन्माद में बदलने की पक्षधर हैं उनकी समझ में वित्तीय ताकतों की निर्णायक भूमिका नहीं है।

देश की मोदी सरकार राष्ट्रवाद का वह दांव चल चुकी है, जो उसके लिये भी सुविधाजनक नहीं है।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top