दृश्य

anjuleसीन 1

एक कॉर्पोरेट ऑफिस में 10 लोग काम कर रहे हैं, एक फ़ौज से रिटायर्ड डॉक्टर साहब घुसते हैं. सवाल उछालते

‘बताओ यहाँ बिहारी कौन-कौन है ?’

‘मैं बिहारी हूं बताइए क्या समस्या है आपको’. खुंदक में आया एक बन्दा बोलता है.

‘बेंगुसराय से हो, बेंगुसराय से’- डॉक्टर साहब झल्लाकर पूछते हैं

‘हाँ, बेंगुसराय से ही नहीं मैं कन्हैया के मोहल्ले से आता हूं, ठीक कहना ये होगा कि मैं उसके घर से ही हूं. शायद यही जानना था ना आपको? आप कहिए जो कहना है?

‘तो बताइए गोली मार दें कन्हैया को ? ऐसे देशद्रोही के लिए 11 लाख की घोषणा करने वाला ठीक है ना?’ डॉक्टर साहब थोड़े से असहज से सवाल करते हैं क्योंकि इस तरह से जवाब की उम्मीद नहीं थी उनको.

‘आप तो फ़ौज से हैं ना, पढ़े-लिखे भी हैं ? गोली मारिये सिर्फ कन्हैया को ही नहीं, हर बिहारी को मारिए. लेकिन उससे पहले अपने एजुकेशन के सारे सर्टिफ़िकेट जलाकर आइए’. वो बन्दा आराम से कहता है.

‘मैं क्यों जलाऊँ अपने सर्टिफ़िकेट, JNU को, कन्हैया को जलाया जाना चाहिए? डॉ साहब पूरी तरह से कंट्रोल के बाहर हो चुके हैं.

‘आपको अपने सर्टिफ़िकेट इसलिए जलाने चाहिए, क्योंकि आप पढ़े-लिखे इंसान की तरह बात नहीं कर रहे, एक जाहिल-गवार की तरह बात कर रहे हैं. गोली मारिए जिसे मूड करे उसे मारिए, लेकिन कम से कम अपने सर्टिफ़िकेट की तौहीन मत कीजिए. हमें बताया गया है कि एक डॉ., ‘लिटिल गॉड’ होता है. ज़िन्दगी देने वाला होता है, जान लेने वाला नहीं.  फिर भी कन्हैया से आपको समस्या है तो हमारे पास कानून है ना? उसके पास जाइए गलत किया है उसने तो उसको सजा मिलेगी. लेकिन सजा सुनाने का हक़ आपको किसने दे दिया है? वैसे अभी मामला अदालत में है और अभी तक उसके खिलाफ कुछ मिला नहीं है. और आपको बता दूं, मैं बिहार से नहीं हूं और आज तक कभी वहां गया भी नहीं हूं.

डॉ. साहब झल्लाते चुप हो जाते हैं, वहां मौजूद ज्यादातर लोग मुस्कुरा रहे होते हैं.

सीन 2

मैं लिखना-बोलना चाहता हूं अब उमर ख़ालिद के बारे में, अनिर्वान के बारे में. मगर लगता है खुद को भारत घोषित कर दिए लोगों ने ये साजिश की है कि, हम उनके बारे में बात ना कर सकें. आप बात करना चाहते हैं इन सबकी जड़ ‘रोहित वेमुला’ के बारे में, ताकि तय हो न्याय की लड़ाई आगे कैसे लड़ी जाएगी. वो लेकर आ जाते हैं एक तस्वीर जिसके जरिए किया जाता है कुंठाओं का प्रसार. हम व्यस्त हो जाते हैं उन्हें ग़लत साबित करने में. कुछ लोग हैं जो आज JNU और रोहित को ही आमने-सामने खड़ा करने में लग गए हैं, जैसे उन्हें पता ही नहीं हो कि रोहित की लड़ाई का ही अगला पड़ाव JNU है. इन सबपर भारी मुझे दिल्ली के उस ऑटो रिक्शा वाले की आवाज़ लगती है जो मेरे और एक दोस्त की बनावटी खीचतान और कमेंट से चिढ़कर पलटकर बोलता है,

‘ कुछ भी कह लीजिए आप लोग लेकिन कन्हैया बेगुनाह है. उसे जबरदस्ती फंसाया गया है’. उसका सपाट चेहरा मुझे लंबे वक़्त तक याद रहेगा. रोहित वेमुला, JNU की आवाज़, मुझे इस रिक्शावाले की आवाज़ में नज़र आते हैं.

– अंजुले

प्रस्तुति : नित्यानन्द गायेन

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top