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[शहादत दिवस पर विशेष] भगत सिंह सिक्का या शहादत का विज्ञापन नहीं

Statues_of_Bhagat_Singh,_Rajguru_and_Sukhdevपांच रूपये के
गिलट छाप सिक्के के
सांचे में ढ़ले भगत सिंह को
मैं खर्च नहीं कर पाता
एक कप चाय,
एक पावरोटी
या खुदरा पैसा के रूप में
जो, एक सदी का
सरकारी सम्मान है
जहां गांधी हजार रूपये तक का नोट हैं।
जिससे
खरीद सकते हैं आप
जमीन-जायजात,
सोना-चांदी,
भोजन-पानी
और सम्मान।
एश-ओ-आराम खरीद सकते हैं।
खरीद सकते हैं आप ऐसी खुशियां
जिसे बेचा और खरीदा जाता है
बाजार जिसे मानता है
और भारतीय रिजर्व बैंक का गर्वनर
जिस पर
अपने हस्ताक्षर टांकता है
कि ‘मैं धारक को
एक हजार रूपये अदा करने का
वचन देता हूं।’
मगर
भगत सिंह के साथ
सरकारी टकसाल की
ऐसी कोई वचनबद्धता नहीं।
मैं खुश हूं इस बात से
कि आज भी भगत सिंह
आम जनता की मर्जी हैं,
सरकार
उन्हें खरीदने
और बेचने में नाकाम रही है।
हमें क्षमा करें सरकार
भगत सिंह और उनके साथी
शहादत का सरकारी विज्ञापन नहीं,
हमारा आज
और हमारा आने वाला कल हैं।
जो दिलों में रहते और साथ-साथ लड़ते हैं।

-आलोकवर्द्धन

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