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काम के अधिकार को मूल अधिकार में शामिल करने की मांग

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बेरोज़गारी से त्रस्त युवा ‘यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट’ नाम से संगठित हुए हैं। इन्होंने 1 अप्रैल, 2016शुक्रवार को निराला सभागार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें बताया गयाकि बेरोज़गारी हमारे समय की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन यह बहसों और सरकारों के एजेंडे से बिलकुल गायब है। इससे नाराज़ इस युवा समूह ने रोजगार को ‘मौलिक अधिकार’ बनाए जाने की मुहिम छेड़ी है। सरकारी विभागों में लाखों पदों के रिक्त होने, निजी क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र के अधिक अमानवीय होने से पीड़ित यह युवा आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है। 

इन युवाओं ने इस अभियान की शुरुआत देश और प्रदेश के अनेक सरकारी विभागों व संस्थाओं में RTI के तहत सूचनाएकत्र करके किया। RTI से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर इन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य स्तर पर लाखों-लाख पद खाली पड़े हैं. लेकिन इन लाखों पदों को भरा नहीं जा रहा। जबकि इन सभी स्वीकृत पदों के लिए वेतन-भत्ता वार्षिक बजट में आवंटित होता है. केंद्र और राज्य स्तरीय कोई भी विभाग अथवा संस्थान ऐसानहीं हैं, जिनमें औसतन 30 फ़ीसदी पद रिक्त न हों. केन्द्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अपने विभागों में ही लगभग35 फ़ीसदी पद रिक्त हैं। देश के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में 35 फ़ीसदी शिक्षकों के और 45 फ़ीसदी शिक्षणेत्तर कर्मियोंकेपद रिक्त हैं.रेलवे में यह संख्या कई लाख है। देश में करीब 12 लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। करीब 63 लाख बच्चे अब भी स्कूलों से बाहर हैं, वहीं 8.32 फीसदी स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे हैं।प्रदेश स्तर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सर्वोच्चन्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ोंके मुताबिक़ प्राथमिक विद्यालयोंमें ही लगभग 3 लाख से अधिक पद रिक्त हैं। माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों और उच्च शिक्षा में प्राध्यापकों के सभी रिक्त पदों को मिलाने पर यह संख्या 6 लाख से अधिक होगी.तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के हजारों पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया लगभग नहीं के बराबर है। प्रदेश में अराजपत्रित रिक्त पदों की संख्या 3 लाख से अधिक है. प्रदेश केकुल विभागों को मिला दें, तोरिक्त पदों की कुल संख्या लगभग 15 लाख से अधिक होगी. यदि कोई कल्याणकारी सरकार बेरोज़गारी से लड़ना चाहती है, तोसबसे पहले इन रिक्त लाखों पदों को शीघ्र भरने के लिए आयोग बनाए। ध्यान रहे, एक रोज़गार कई स्वरोज़गार पैदा करता है। 

इन युवाओं ने इन तथ्यों के आधार पर विगत कुछ माह पूर्व देश के प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और यूपी के सभी विधायकों को अपना मांग-पत्र भेजा. इसमें इनकी दो माँग थी-

1.‘रोज़गार’ को मौलिक अधिकार बनाया जाए। 

2.केंद्र और राज्यों के खाली पड़े लाखों पदों की समीक्षा करके उन्हें शीघ्र भरने के लिए एक आयोग का गठन किया जाए। 

पत्रों का कोई प्रत्युत्तर न मिलने से इन युवाओं में खासी नाराज़गी है. केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम दावों की पोल खुलता देख इन युवाओं ने आज यह बताया कि सड़क पर उतरने के अलावा इनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचता है। ये युवा बेहद शांतिपूर्ण और अहिंसक रचनात्मक जनजागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी नाराज़गी एवं ताक़त दोनों ज़ाहिर करेंगे। बेरोज़गारी के मुद्दे को अब एक बड़े जन-आन्दोलन के रूप में उठाते हुए ये इलाहाबाद के छात्र-युवा बाहुल्य इलाकों में प्रतिदिन एक जनसभा आयोजित करेंगे. कल पहली जनसभा चांदपुर सलोरी मोहल्ले के ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के सामने शाम 5 बजे करेंगे. यह क्रम तब तक आगे बढ़ता रहेगा,जब तक कि प्रदेश सरकार लाखों पदों को भरने के लिए आयोग बनाने की घोषणा न कर दे। इसमें जगदीश सौरभ, नलिन नरोत्तम मिश्र , अनुपम सिंह, अन्नू सिंह, आशीष मिश्र, लक्ष्मण यादव, संजीव पासवान, अखिलेश यादव, अरस्तु चौधरी, कुलदीप कुशवाहा, रमाकांत, देवनारायण, अमिता, निति सिंह आदि उपस्थित रहे.

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