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सड़कें आजकल

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1.

सड़कें
आज कल
खून के आंसू रोती हैं
और चीखती हैं।
एक जोड़ी
घिसी हुई चप्पल की तरह
सड़क को मैं जीता हूं।

2.

एक जुलूस
निकलती है सड़क पर।
सड़क पर कुछ होता है ऐसा
कि लोग गिरते हैं
खून फैलता है
सड़क खून के आंसू रोती है,
चीखती है।
सड़क के साथ मैं भी चीखता हूं।

3.

जेब में
हाथ डाले
खड़ा हूं मैं सड़क के किनारे।
सड़क साईनबोर्ड सा मुझे घूरती है।
छुपी हुई आंखें
देख लेना चाहती हैं, आर-पार मेरे।
जेब में पड़े हाथ
बाहर निकलने की फिक्र में हैं।

4.

जेब में
जबड़े सी भिंची हंथेली
कभी बनती हैं मुट्ठियां
कभी बंधी हुई मुट्ठी की
तनी एक अंगुली
उसे पिस्तौल में बदल देती है,
मेरे भीतरी जेब में
सड़क कसमसाती है।

5.

मोम का एक पुतला
कांच के गोलियों की चमक लिये,
सड़क को सजी हुई दुकानों का
बाजार बनाता है।
जेब में पड़े हाथों को
बाहर निकालने से पहले
मैं गुजरते लोगों के बारे में सोचता हूं।
लड़ाई सड़कों पर है।

आलोकवर्द्धन

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