Home / विश्व परिदृश्य / ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट-1

ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट-1

Dilma-Temer

ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट की कोशिश आंशिक रूप से सफल हो चुकी है। राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ के विरूद्ध महाभियोग की कार्यवाही को सीनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही, उन्हें 6 महीने के लिये अपने पद से अपदस्थ कर दिया गया और उनकी जगह अमेरिकी समर्थक उप-राष्ट्रपति मिसल टीमर को राष्ट्रपति का कार्यभार सौंप दिया गया है। यह तख्तापलट 2012 में हुए पराग्वे के तख्तापलट की तरह ही है। जिसका मूल मकसद ब्राजील की वामपंथी सरकार को सत्ता से बेदखल कर नवउदारवादी अर्थव्यवस्था के लिये जमीन तैयार करना ही नहीं है, बल्कि रूस और चीन के नेतृत्व में अमेरिका के लिये सबसे बड़ी चुनौती बन चुके ब्रिक्स देशों के संगठन को तोड़ना भी है। जिसमें रूस और चीन के अलावा ब्राजील, भारत और दक्षिण अफ्रीका महत्वपूर्ण देश हैं।

भारत में, 2014 में, जो हुआ, भले ही उसे वैधानिक तख्तापलट की श्रेणी में नहीं रखा गया है, किंतु जिन ताकतों ने सरकार बनाने के चुनावी प्रक्रिया के तहत भारत में सत्ता का अपहरण किया, उन्हीं ताकतों ने ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट करने के चरणबद्ध कार्यक्रमों के तहत एक निर्णायक चरण में सफलता हासिल कर ली है। डिल्मा रूसेफ पर भ्रष्टाचार का आरोप है, जिसमें सीधे तौर पर उनकी सम्बद्धता कहीं नहीं है।

ग्लेन ग्रीनवाल्ड ने राष्ट्रपति रूसेफ के विरूद्ध भ्रष्टाचार के लिये चलाये जाने वाले महाभियोग के बारे में कहा- ‘‘यह महाभियोग भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को बनाये रखने के लिये है। उसे सुरक्षित करना ही इसका मकसद है।‘‘ उन्होंने खुले तौर पर कहा- ‘‘ब्राजील में नवउदारवाद और गोल्डमैन सेज को मजबूत करने तथा (फॉरन हेज फण्डस्) विदेशी हेज फण्डस् को बढ़ावा देने के अलावा डिल्मा रूसेफ को सत्ता से बेदखल करने का मकसद वहां भ्रष्टाचार को संरक्षण देना है।‘‘

वैसे भी ब्राजील लातिनी अमेरिकी महाद्वीप का सबसे बड़ा और दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वस्तुतः लातिनी अमेरिकी महाद्वीप के शेष देशों के जीडीपी के बराबर है। जीडीपी के नजरिये से भी वह सातवां सबसे बड़ा देश है। ब्रजील की वाम सरकार का अपहरण यदि साम्राज्यवादी ताकतें इस तरह कर लेती हैं, तो यह दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप ही नहीं, विश्व के लिये और ब्रिक्स देशों के लिये भी आघात होगा। बहुध्रुवी विश्व की अवधारणां और मुक्त व्यापार के नये क्षेत्रों की रचना करने वाले देशों के लिये बड़ी क्षति होगी। लातिनी अमेरिका में अमेरिकी साम्राज्यवादी ताकतें स्थानीय दक्षिणपंथी-प्रतिक्रियावादी ताकतों के साथ मिलकर ऐसी घटनाओं को अंजाम देती रही है। वामपंथी समाजवादी सरकारों का तख्तापलट उनकी स्थायी नीति है।

2000 से अब तक, लातिनी अमेरिका के 6 वामपंथी एवं समाजवादी सरकारों के तख्तापलट की कोशिशें की गयी हैं, जिसमें से कुछ में साम्राज्यवादी-प्रतिक्रियावादी ताकतें सफल रहीं, कुछ में उन्हें थोड़ी-बहुत सफलता मिली और कुछ में वो असफल रहीं। सैनिक एवं वैधानिक तख्तापलट की उनकी कोशिशें आज भी जारी हैं। आर्थिक हमले और राजनीतिक अराजकता को उन्होंने अपना हथियार बनाया है।

  1. 2002 में वेनेजुएला में राष्ट्रपति ह्यूगो शॉवेज के खिलाफ सैनिक तख्तापलट हुआ। जिसे सेना और अमेरिका समर्थित प्रतिक्रियावादी ताकतें 48 घण्टे भी सम्भाल नहीं सकीं। वेनेजुएला की आम जनता सड़कों पर उतर आयी और शॉवेज की वापसी हुई। शॉवेज के असामयिक निधन के बाद निकोलस मदुरो सरकार पर आज भी आर्थिक हमले हो रहे हैं। वहां भी वैधानिक तख्तापलट की कोशिशें जारी हैं, और नेशनल असेम्बली पर अमेरिका समर्थित प्रतिक्रियावादी-दक्षिणपंथी ताकतों का कब्जा हो गया है। ‘विकास के जरिये समाजवाद‘ की अवधारणां के सामने गंभीर संकट है।
  2. 2004 में हैती में राष्ट्रपति जॉन बर्ट्रेंड ऐरिस्टीड का तख्तापलट हुआ। यह उनका दूसरी बार तख्तापलट था। जहां आज अमेरिका समर्थित जनविरोधी सरकार है।
  3. 2008 में बोलिविया में राष्ट्रपति इवो मोरालिस के खिलाफ जन असंतोष फैला कर तख्तापलट करने की कोशिश की गयी।
  4. 2009 में हुण्डूरास के समाजवादी राष्ट्रपति मैन्यूवल जीलाया का सेना ने तख्तापलट किया।
  5. 2010 में इक्वाडोर में राष्ट्रपति रॉफेल कोरिया को सत्ता से बेदखल करने के लिये पुलिस तख्तापलट की कोशिश की गयी।
  6. 2012 में पराग्वे के राष्ट्रपति फर्नाण्डो लूगो का वैधानिक  तख्तापलट हुआ।

अब इसी तरह की घटना को ब्राजील में अंजाम दिया जा रहा है। जिसका एक महत्वपूर्ण पड़ाव 12 मई 2016 को तब पार हुआ, जब सीनेट ने राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ के विरूद्ध महाभियोग चलाने के पक्ष में मतदान किया।

डिल्मा रूसेफ 6 महीने के लिये अपदस्थ कर दी गयीं। इन्हीं 6 महीनों में महाभियोग की जांच होगी। और इन्हीं 6 महीने के लिये राष्ट्रपति के स्थान पर उप-राष्ट्रपति कार्यभार सम्भालेंगे।

18 महीने पहले हुए राष्ट्रपति चुनाव में डिल्मा रूसेफ को 54 मिलियन -51 प्रतिशत- से ज्यादा वोट मिला था। जबकि तख्तापलट में शामिल राजनेता और ब्राजील के अंतरिम राष्ट्रपति मिसल टीमर  की जन लोकप्रियता मात्र 2 प्रतिशत है। यही कारण है, कि उन्होंने चुनाव कराने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, क्योंकि उन्हें पता है, कि चाह कर भी वो ब्राजील के राष्ट्रपति नहीं बन सकते। उन्होंने भ्रष्ट राजनेताओं के साथ मिल कर तख्तापलट की कार्यवाही को अंजाम दिया।

12 मई को राजनीतिक खुलासों के लिये सर्वाधिक चर्चित वेबसाइट ‘विकिलीक्स‘ ने जानकारी दी कि ब्राजील पर सीनेट के द्वारा थोपे गये राष्ट्रपति मिसल टीमर ने अमेरिकी दूतावास के राजनीतिज्ञ से, कम से कम दो विशेष मुलाकातें की। उन्होंने ब्राजील के राजनीतिक स्थितियों के बारे में जानकारियां दी। उन्होंने अमेरिकी दूतावास के खबरी की तरह काम किया।

विकिलीक्स ने ट्वीट कर के दो लिंक उपलब्ध कराये हैं, जहां कार्यवाहक राष्ट्रपति टीमर के द्वारा ब्राजील की राजनीति के बारे में उनके अपने विचार दिये गये हैं। यह ‘यूएस एम्बेसी इन ब्राजील‘ के रिपोर्ट के अनुसार है।

ब्राजील में स्थित अमेरिकी दूतावास के 11 जनवरी 2006 के ‘केबल‘ के अनुसार- 9 जनवरी 2006 को टीमर ने दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने 2006 के ‘जनरल इलेक्शन‘ से पहले ब्राजील की राजनीतिक परिदृश्य के बारे में अपना मूल्यांकन पेश करने के लिये, ये मुलाकात की थी, जिसमें टीमर ने मूल्यांकन किया था, कि लूला-द-सिल्वा राष्ट्रपति पद के लिये निर्वाचित हो जायेंगे।

11 जनवरी 2006 के ‘केबल‘ के अनुसार- ‘‘टीमर ने लूला के ‘संकुचित दृष्टिकोंण‘ आौर लोगों को सुरक्षित करने की योजनाओं को प्रमुखता देने की निंदा की, जोकि आर्थिक विकास को प्रोत्साहित नहीं करता है।‘‘

टीमर का यह नजरिया लूला-द-सिल्वा के समाजवादी होने और समाजवादी कार्यक्रमों को वरियता देने की नीति के स्पष्ट विरोध में है।

21 जनवरी 2006 के एक अन्य ‘केबल‘ के अनुसार- टीमर ने फिर से ब्राजील के राजनीतिक स्थितियों का मूल्यांकन करने के लिये अमेरिकी दूतवास के अधिकारियों से मुलाकात की थी। टीमर ने अपनी पार्टी -ब्राजीलियन डेमोक्रेटिक मोमेंट पार्टी- के मंत्रियों को लूला सरकार में कम अधिकार दिये जाने की निंदा की थी और उसका रोना रोया था।

अमेरिकी सहयोग से ब्राजील की सत्ता को हासिल करने के लिये एक दशक से लगे टीमर ने वैधानिक तख्तापलट के जरिये सता हासिल कर लिया है। सीनेट के भ्रष्ट मंत्रियों के सहयोग से राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ को सत्ता से बेदखल कर अंतरिम राष्ट्रपति का दर्जा हासिल कर लिया है।

विकिलीक्स के द्वारा जारी खुलासे पर नजर डालेंं तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि ब्राजील की समाजवादी डिल्मा सरकार के सामने कितना बड़ा खतरा है। और अमेरिकी समर्थक टीमर क्या करना चाहते हैं?

यह सीधे तौर पर जनसमर्थक सरकार पर प्रतिक्रियावादी हमला है। डिल्मा रूसेफ और उनकी वर्कर्स पार्टी को उनके समाजवादी कार्यक्रम -सोशल इन्वेस्टमेंट और सम्पत्ति के पुर्न बंटवारा- की वजह से ब्राजील की आम जनता ने अपना वोट दिया था, जबकि टीमर इसके विपरीत नवउदारवादी -बाजार व्यवस्था के समर्थक हैं। और वो ब्राजील में अमेरिकी वर्चस्व को बढ़ाने की कोशिश करेंगे। जिसके पक्ष में ब्राजील की आम जनता नहीं है। डिल्मा रूसेफ के पक्ष में और मिसल टीमर के विरूद्ध जन प्रदर्शनांं की शुरूआत हो गयी है।

माना यही जा रहा है, कि ब्राजील में अब वाशिंगटन का राष्ट्रपति है। जो ब्रिक्स देशों के संगठन और बहुधु्रवी विश्व की अवधारणां के विरूद्ध है। ऐसे में इस बात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि ब्राजील का रूस और चीन और लातिनी अमेरिकी देशों से जो सम्बंध है, वह स्थगित हो सकता है। राष्ट्रपति बने मिसल टीमर ब्राजील को संयुक्त राज्य अमेरिका समर्थित देश बनाने की नीतियों का सख्ती से पालन करेंगे।

ब्राजील का यह संकट लातिनी अमेरिकी महाद्वीप को ही नहीं विश्व की आर्थिक एवं राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा। हम कह सकते हैं, कि ब्राजील राजनीतिक अराजकता और जन संघर्षों के नये दौर में प्रवेश कर चुका है। लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों ने इस वैधानिक तख्तापलट का विरोध किया।

(जारी)

-अनुकृति, आलोकवर्द्धन

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top