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ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट-2

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पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से ब्राजील संकट में है। इस संकट की शुरूआत तब हुई जब ‘ऑपरेशन कार वास‘ (लावा गातो) का खुलासा हुआ। बड़े पैमाने पर हुए रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का यह मामला सरकार के द्वारा संचालित तेल कम्पनी- पेट्रोब्रास से सम्बद्ध है, जिसके तहत 2 बिलियन डॉलर ब्राजील के राजनीतिक दल एवं राजनेताओं के निजी बैंक खातों में जमा हुए हैं।

अपदस्थ राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ पर भ्रष्टाचार के जिन आरोपों के तहत महाभियोग की कार्यवाही चल रही है, उनका इस ‘पेट्रोब्रास स्कैण्डल‘ से अब तक किसी किस्म की सम्बद्धता का प्रमाण सामने नहीं आया है। कह सकते हैं, कि उनका इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। तख्तापलट करने वालों का यह आरोप है, कि उन्होंने 2014 के चुनाव के दौरान घाटे के बढ़ते जाने के बाद भी सरकारी फण्ड को प्रभावित करके उसे सामाजिक कार्यक्रमों के लिये भुगतान करना जारी रखा। डिल्मा रूसेफ अैर उनके समर्थकों का कहना है, कि ‘‘इस तरह का ‘क्रिएटिव एकाउन्टिंग‘ ब्राजील की सरकार के लिये सामान्य घटना है, और यह एकाउन्टिंग ‘फिसकल ईयर‘ के खत्म होने से पहले ही संतुलित कर लिया जाता है।‘‘

ब्राजील की रूसेफ सरकार सामाजिक विकास योजनाओं को पूरा करने के लिये हमेशा से प्रतिबद्ध रही है, जिनसे ब्राजील की आम जनता का हित जुड़ा होता है। इसलिये तख्तापलट करने वालों की सूरत आम जनता के सामने साफ है। वैसे भी ‘ब्राजिलियन डेमोक्रेटिक मोमेंट पार्टी‘ के राजनेता मिसल टीमर ने अपने कुछ समर्थकों के साथ मार्च के अंतिम सप्ताह में डिल्मा रूसेफ के संयुक्त सरकार से अलग हो चुके थे। उन्होंने ही तख्तापलट के प्रमुख राजनेता की भूमिका अदा की है।

ब्राजील के संविधान के अनुसार ‘‘राष्ट्रपति के गैर-मौजूदगी में -जब वह विदेश यात्रा पर हो- उप-राष्ट्रपति राष्ट्रपति के सभी जिम्मेदारियों को पूरा करता है, यहां तक कि वह पेश बजट पर बहस करने एवं निर्णय लेने के लिये भी जिम्मेदार होता है।‘‘

जिस ‘पेट्रोब्रास स्कैण्डल‘ को राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ के खिलाफ आरोपों का आधार बनाया गया है, और जिसमें उनकी सम्बद्धता के कोई प्रमाण नहीं हैं, उसी ‘पेट्रोब्रास स्कैण्डल‘ में मिसल टीमर भी शक के दायरे में हैं। माना यही जा रहा है, कि टीमर ने ही तमाम भ्रष्ट सीनेटरों के सहयोग से, अपने को बचाने के लिये, वैधानिक तख्तापलट की कार्यवाही की।

लातिनी अमेरिकी महाद्वीप के देशों में ब्राजील में हुए रूसेफ सरकार के तख्तापलट के खिलाफ गहरा रोष है।

16 मई को अल-सल्वाडोर ने ब्राजील की नयी सरकार को मान्यता देने से इंकार कर दिया। अल-सल्वाडोर के राष्ट्रपति सल्वाडोर सांचेज सेरेन ने कहा- ‘‘रूसेफ को सरकार से बाहर करना तख्तापलट की तरह लग रहा है।‘‘

राष्ट्रपति रूसेफ पर महाभियोग चलाने के निर्णय के साथ ही ब्राजील की सीनेट संदिग्ध हो गयी है। अपने पहले दिन से ही राष्ट्रपति बने टीमर का विरोध लातिनी अमेरिकी देशों की सरकारें कर रही हैं। सिर्फ अर्जेन्टिना के कन्जरवेटिव (रू़ढ़िवादी) राष्ट्रपति मौरिसियो माक्री ने ब्राजील की घटना का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया।

दक्षिण अमेरिकी देशों का संगठन- यूएनएएसयूआर वह पहली संगठनात्मक इकाई है, जिसने डिल्मा रूसेफ को 180 दिनों के लिये राष्ट्रपति पद से हटाने के निर्णय की निंदा की। उसके सेक्रेटरी जनरल अर्गेस्टो सेम्पर ने कहा- ‘‘रूसेफ अभी भी ब्राजील की वैधानिक राष्ट्रपति हैं। उनके खिलाफ किये गये महाभियोग की कार्यवाही ने इस पूरे क्षेत्र के लोकतांत्रिक सरकारों को कमजोर करने और उसे खतरनाक रास्ते (दक्षिणपंथी तानाशाही) पर डालने का काम किया है।‘‘

लातिनी अमेरिकी महाद्वीप के सभी लोकतांत्रिक एवं समाजवादी देशों ने बाजील में दक्षिणपंथी ताकतों के द्वारा तख्तापलट की निन्दा की है। उन्होंने रूसेफ के पक्ष में इस कार्यवाही को खारिज कर दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने ब्राजील से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है। उन्होंने यह निर्णय राष्ट्रपति रूसेफ को 6 महीने के लिये सत्ता से बेदखल करने के निर्णय के दूसरे दिन लिया। मदुरो ने कहा- ‘‘महाभियोग का यह प्रयास देश के इतिहास का दुखद पृष्ठ है।‘‘ उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘‘ब्राजील की राष्ट्रपति रूसेफ संसदीय तख्तापलट का शिकार हो गयी हैं।‘‘

अल-सल्वाडोर के राष्ट्रपति सल्वाडोर सांचेज सेरेन ने घोषणां की कि मिसल टीमर की सीनेट द्वारा थोपी गयी सरकार, को हम मान्यता नहीं देंगे।‘‘ उन्होंने ब्राजील से अल-सल्वाडोर के राजदूत को वापस बुला लिया। उन्होंने कहा- ‘‘महाभियोग की प्रक्रिया राजनीतिक जोड़-तोड़ की चालबाजी है। इस धोखेबाजी से टीमर वह हासिल करना चाहते हैं, जो कि पहले सेना के द्वारा तख्तापलट के जरिये किया जाता था।‘‘

इक्वाडोर के विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी करके ब्राजील की आम जनता और राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। वक्तव्य में डिल्मा रूसेफ को ब्राजील की चुनी हुई सरकार का प्रमुख कहा गया है, जो महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रही हैं। इस बात का भी उल्लेख किया गया है, कि रूसेफ के विरूद्ध लगाये गये आरोप उन्हें किसी भी आपराधिक मामले से अब तक जोड़ नहीं सका है।

बोलेविया ने ब्राजील की सीनेट के निर्णय को अस्वीकार कर दिया है और इस पूरे प्रक्रिया को वैधानिक तरीके से राजनीतिक तमाशा करार दिया है। विदेश मंत्रालय के द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है, कि ‘‘यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भंग करने और मतपत्रों के द्वारा व्यक्त किये गये (अपने देश की सरकार को बनाने के अधिकार) भावनाओं की अनदेखी करने की कोशिश है।‘‘ वक्तव्य में यह तर्क भी पेश किया गया है, कि बर्खास्तगी (राष्ट्रपति) ‘क्रिमिनलाइजेशन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सन‘ पर आधारित है, जो कि महाभियोग के कानूनी आधार को पूरा नहीं करता।‘‘ बोलेविया ने खुलेतौर पर राष्ट्रपति को बर्खास्त करने और उनके ऊपर महाभियोग चलाने के निर्णय को आधारहीन माना है।

क्यूबा की सरकार ने भी एक वक्तव्य जारी कर राष्ट्रपति रूसेफ के खिलाफ महाभियोग के प्रयासों को ब्राजील में कुलीनतंत्र की पुर्नस्थापना के लिये किया गया प्रयत्न करार देते हुए, उसे एक सिरे से अस्वीकार कर दिया है। वक्तव्य में प्रतिक्रियावादी प्रेस के सहयोग का भी उल्लेख है। वक्तव्य में कहा गया है, कि ‘‘प्रतिक्रियावादी ताकतें चुनावी पद्धति से जीत नहीं सकीं, तो उन्होंने चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदखल कर सत्ता को हथिया लिया है।‘‘ वक्तव्य में इस बात का भी उल्लेख है, कि ऐसा उन्होंने प्रगतिशील राजनीति (समाजवादी-वामपंथी सरकार) को सत्ता से बेदखल करने की कार्ययोजना के तहत किया है।

निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओरटेंगा ने डिल्मा रूसेफ को सत्ता से बेदखल करने की कार्यवाही को अलोकतांत्रिक प्रक्रिया करार दिया, जोकि सरकार की विश्वसनियता पर काली परछाई की तरह है। राष्ट्रपति ने कहा है, कि ‘‘स्वतंत्रता और न्याय को सुनिश्चित करने के लिये ब्राजील में वर्कर्स पार्टी की मौजूदगी जरूरी है। राष्ट्रपति ओरटेंगा ने डिल्मा रूसेफ के साथ लूला-द-सिल्वा के प्रति भी अपनी एकजुटता व्यक्त की।

चिली की सरकार ने ब्राजील के मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए डिल्मा रूसेफ को चिली सरकार का मित्र कहा, किंतु उसने सीनेट के द्वारा थोपे गये टीमर सरकार को खारिज नहीं किया। उसने महाभियोग की कार्यवाही से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चयता के प्रति चिंता व्यक्त की।

उरूग्वे के विदेशमंत्री रोडोल्फ एलिन नोवा ने ब्राजील की स्थिति को ‘चिंताजनक‘ करार देते हुए इस बात की संभावना व्यक्त की है, कि ‘‘लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक सिद्धांतों के तहत संकट का समाधान निकल जायेगा।‘‘ उरूग्वे सरकार ने रूसेफ को सत्ता से बेदखल करने और सीनेट में होने वाले मतदान से पहले ही राष्ट्रपति पर भंडरा रहे खतरे के प्रति चिंता व्यक्त की थी।

अर्जेन्टिना की सरकार ने ब्राजील के संवैधानिक प्रक्रिया के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है, उसे विश्वास है, कि ब्राजील में जो हो रहा है, उससे वहां का लोकतंत्र मजबूत और ठोस होगा। उसने सीनेट के द्वारा थोपी गयी सरकार को अपना समर्थन व्यक्त किया और कहा है कि ‘‘अर्जेन्टिना की सरकार ब्राजील की मौजूदा सरकार से वार्ता जारी रखेगी।‘‘ अर्जेन्टिना की दक्षिणपंथी सरकार ने अपनी सोच के अनुरूप वामपंथ का विरोध किया है।

कोलम्बिया का वक्तव्य अस्पष्ट और गोल-मोल है, उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसके स्थायित्व के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है। कोलम्बिया सरकार का वक्तव्य अमेरिकी प्रतिक्रिया से अलग नहीं है।

अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है, कि ‘‘अमेरिकी सरकार को विश्वास है, कि ब्राजील के लोग राजनीतिक संकट के इस सवाल का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से अपने देश के संविधान के सिद्धांतों के आधार पर निकालेंगे।‘‘

यह उस देश की आम जनता का खुला अपमान है, जिसकी चुनी गयी सरकार का तख्तापलट किया गया। उसे संविधान और लोकतांत्रिक तरीके से संकट का समाधान निकालने की सलाह दी जा रही है। अप्रत्यक्ष रूप से उसे यह सलाह दी जा रही है, कि संविधान और लोकतंत्र के लिये वह थोपी गयी अलोकतांत्रिक सरकार को स्वीकार करे। जिस संविधान को, वैधानिक तख्तापलट का आधार बनाया गया, उसी के अनुकूल व्यवहार करे, जबकि जन असंतोष बढ़ता जा रहा है।

(जारी)

-अनुकृति, आलोकवर्द्धन

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