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ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट-3

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लातिनी अमेरिकी देशों को संयुक्त राज्य अमेरिका अपने देश, अपने महाद्वीप का पिछवाड़ा समझता रहा है, और उसकी यह समझ आज तक नहीं बदली है, जबकि पिछले दशकों में उसकी शाख लगातार घटी है, उसके एकाधिकार को गंभीर चुनौतियां मिली हैं, और उसकी साम्राज्यवादी सोच एवं पूंजीवादी समाज व्यवस्था के विरूद्ध आपसी सहयोग एवं समर्थन और समाजवादी समाज व्यवस्था ने लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों में निर्णायक बढ़त हासिल की।

क्यूबा की समाजवादी क्रांति बोलिवेरियन क्रांति के मुकाम से होती हुई विकास के जरिये समाजवाद की अवधारणां में बदल गयी। जनसमर्थक समाजवादी सरकारों न समाजवाद की नयी सोच को जन समर्थन से समाज व्यवस्था में बदल दिया। महाद्वीपीय एकजुटता को नया आधार मिला। जिसे अमेरिकी सरकार इन देशों के दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी ताकतों के साथ मिल कर तोड़ने में आज भी लगी है। आर्थिक हमलों से राजनीतिक  अस्थिरता और राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर समाजवादी विकास योजनाओं के सामने मुश्किलें खड़ी करती रही है।

इन देशों में अमेरिका चुनी हुई सरकारों का तख्तापलट कर तानाशाही सरकारों का समर्थक रहा है। उसने अपने उजड़ते हुए साम्राज्यवादी तम्बू-कनातों को बचाने के लिये लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों की समाजवादी, लोकतांत्रिक सरकारों के सामने गंभीर चुनौतियां फिर से खड़ी कर दी हैं। ब्राजील उसका नया शिकार है। देश के चुने हुए भ्रष्ट प्रतिनिधियों ने ही देश में जनविरोधी सरकार को थोप दिया है। जिसके खिलाफ ब्राजील की आम जनता में गहरा असंतोष है।

22 मई को जारी एक ‘ओपिनियन पोल‘ के अनुसार ‘‘मात्र एक तिहाई से भी कम लोगों का मानना है, कि सीनेट के विघि निर्माताओं ने डिल्मा रूसेफ के खिलाफ वैधानिक तख्तापलट करके देश के हित में काम किया है।‘‘

ग्लोबो के द्वारा कराये गये रायसुमारी के अनुसार- ‘‘दो तिहाई ब्राजील के लोगों का मानना है, कि कानूनविद सीनेट के जिन लोगों ने महाभियोग की कार्यवाही की अनुमति (स्वीकृति) दी उन्होंने अपने निजी हितों के लिये वोट डाले।‘‘ यह उल्लेखनिय है, कि राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ का सम्बंध ‘पेट्रोब्रास स्कैण्डल‘ से सीधे तौर पर जोड़ा नहीं जा सकता है, जबकि तख्तापलट की कार्यवाही के सूत्रधार बने उपराष्ट्रपति से अंतरिम राष्ट्रपति बने मिसल टीमर शक के दयरे में हैं।

सर्वे के अनुसार जिसे कि 12 से 16 मई के बीच ‘ब्राजीलियन मार्केट रिसर्च कम्पनी‘- ईबोपे ने कराया था, मात्र 23 प्रतिशत लोगों का मानना है, कि कांग्रेस और सीनेट के सदस्यों ने देश के हित में काम किया है। जबकि 66 प्रतिशत लोगों का मानना है, कि ‘‘राजनेताओं ने अपने निजी हितों के लिये और निजी कम्पनियों (प्राइवेट पार्टीज़) और इन्स्टीट्यूशन के हित के लिये वैधानिक तख्तापलट  की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिये मतदान किया है।‘‘

यह सर्वे ही अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि ब्राजील की आम जनता देश की चुनी हुई राष्ट्रपति को अपदस्थ करने के निर्णय के खिलाफ है। वह मान कर चल रही है, कि कांग्रेस और सीनेट में बैठे लोगों ने देश के हितों से ज्यादा अपने हितों का खयाल रखा है, जो देश की आम जनता के हितों के विरूद्ध है। वह यह मान कर चल रही है, कि यह तख्तापलट है। यदि 12 मई को सीनेट की कार्यवाहियों पर नजर डालें तो ऐसा लगेगा कि सीनेट पूर्व निर्धारित निर्णयों को पूरा करने के लिये बस, संवैधानिक औपचारिकतायें निभा रही थी।

12 मई को ब्रजील की सीनेट ने लगातार जारी 24 घण्टे के मेराथन बैठक के बाद राष्ट्रपति रूसेफ के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया को 55-22 मतों से पारित कर दिया। निर्णय के पारित होते ही तत्काल उन्हें 180 दिनों (6 महीने) के लिये अपस्थ कर दिया गया। उनके खिलाफ की गयी कार्यवाही के लिये इस आरोप को आधार बनाया गया कि उन्होंने ‘गर्वमेंट बजट‘ को ‘मनिप्युलेट‘ किया।

यह कार्यवाही यहीं नहीं थमी राष्ट्रपति रूसेफ को अपदस्थ करने के साथ ही उपराष्ट्रपति मिसल टीमर को राष्ट्रपति का कार्यभार सौंप दिया गया। टीमर अमेरिकी नवउदारवाद के प्रति निष्ठावान रहे हैं। जिसकी शुरूआत 1973 में- चिली के समाजवादी अलेन्दे सरकार का तख्तापलट कर के किया गया था। शिकागो स्कूल के इस सोच को नवउदारवादी बाजारपरक अर्थव्यवस्था के जरिये आज दुनिया भर में फैलाया जा चुका है।

सीनेट में आने से पहले महाभियोग पर कांग्रेस (संसद) के निचली सदन में 367(पक्ष) के मुकाबले 137 (विपक्ष) मतों से पारित कर दिया था। राष्ट्रपति रूसेफ को महाभियोग के दायरे में किन कारणों से लाया गया है? इस बारे में ना के बारबर चर्चा हुई। यहां भी प्रतिनिधियों ने अपने निजी, परिवारिक हितों एवं अपनी आस्था के आधार पर मतदान किया।

तख्तापलट के बाद सत्तारूढ़ हुए दक्षिणपंथी सरकार -राष्ट्रपति मिसल टीमर- के खिलाफ 24 मई को 50 हजार से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया, वो अपदस्थ राष्ट्रपति रूसेफ के बहाली की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने मिसल टीमर के आवास को घेर लिया और उन्होंने उस पूरे इलाके को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की, मगर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की। टीयर गैर एवं वॉटर कैनन  का खुल कर उपयोग किया। अंततः कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ दिया।

प्रदर्शन के पक्ष में पुलिस के दमनपूर्ण कार्यवाही के बारे में ट्रेड यूनियन के जेन्सलाई ने कहा- ‘‘मेरे खयाल से यह सबसे निराशाजनक चीज है, कि पुलिस एक चोर (टीमर) के घर की रक्षा कर रही थी।‘‘

प्रदर्शनकारी माटोहियू ने कहा- ‘‘हम डरे हुए नहीं हैं। हम मिसल टीमर की थोपीय गयी सरकार के सामने नहीं झुकेंगे।‘‘ जिसका सीधा सा मतलब है, कि आने वाले दिनों में जनप्र्रदर्शनों का बढ़ना तय है। सेना की भूमिका भी महत्वपूर्ण होने वाली है। जनप्रतिरोध और लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के संगठन एवं ज्यादातर सरकारों के विरोध के बाद भी ब्राजील में वैधानिक तख्तापलट का निर्णायक पड़ाव अमेरिक समर्थक प्रतिक्रियावादी ताकतों ने पार कर लिया। टीमर सत्तारूढ़ है। और रूसेफ सरकार समर्थ लोग सड़कों पर हैं।

यह लड़ाई सड़कों पर ही लड़ी जायेगी, क्योंकि देश की आम जनता -लोकतंत्र में भी- संवैधानिक कार्यवाहियों में सीधे तौर पर हिस्सेदार नहीं होती और तख्तापलट करने वाले वैधानिक प्रक्रिया का सहारा तब तक ही लेते हैं, जब तक वह प्रक्रिया उनके हितों में होती है, किंतु जैसे ही संविधान उनके हितों के आड़े आने लगता है, वो उसे उठा कर ताक पर रख देते हैं। वैधानिक तख्तापलट संविधान के ओट में किया गया, सही अर्थों में यह फॉसिस्ट हमला है। जिसके पीछे साम्राज्यवादी ताकतें हैं। और जहां भी साम्राज्यवादी ताकतें हैं, वहां आम जनता का हित सुरक्षित नहीं है।

एक समय था, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने लातिनी अमेरिकी देशों को अपने घर का पिछवाड़ा बना कर रखा, लेकिन अब ब्राजील ही नहीं महाद्वीप और विश्व परिदृश्य बदल चुका है। जिस नवउदारवादी अर्थव्यवस्था के वापसी की लड़ाई, लोकतंत्र और समाजवादी अर्थव्यवस्था के विरूद्ध लड़ी जा रही है, उसी नवउदारवादी मुक्त व्यापार की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंदी की अटूट कड़ियों का निर्माण किया है। विश्व अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त है। यह संकट उसके विकास की स्वाभाविक अवस्था है, जिसकी वैकल्पिक व्यवस्था आज भी समाजवाद ही है, जिस पर साम्राज्यवादी हमले हो रहे हैं।

आज समाजवाद पर जहां भी हमले हो रहे हैं, वह दुनिया के संकट को बढ़ाने और आने वाले कल के खिलाफ हमले हैं। एक पतनशील व्यवस्था के द्वारा अपने को बनाये रखने के लिये संकट, युद्ध और आतंक को बनाये रखने की गंदी राजनीति है।

-अनुकृति, आलोकवर्द्धन

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