Home / विश्व परिदृश्य / अपने देश की व्यवस्था से असहमत अमेरिकी

अपने देश की व्यवस्था से असहमत अमेरिकी

6b852da4-fc94-41e5-868f-ef5d628fec96

अमेरिकी राष्ट्रपति को यदि आप इंसान मान लें तो उसकी सूरत लगातार खतरनाक और खुंख्वार होती हुई नजर आयेगी। वर्तमान राष्ट्रपति अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति से दुनिया के लिये, बड़ा संकट बन कर उभरता है। अमेरिकी लोकतंत्र की शायद यही सबसे बड़ी विशेषता बन गयी है। विश्व शांति एवं सुरक्षा एवं स्थिरता के लिये सबसे बड़ा संकट बनने का गौरव उसे हासिल है। बराक ओबामा ने वित्तीय संकट, युद्ध और आतंक को दुनिया भर में बो दिया है। अमेरिकी व्हाईट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस ने अमेरिकी वाॅलस्ट्रीट के साथ मिल कर संयुक्त राज्य अमेरिका को वहां पहुंचा दिया है, जहां से उसकी वापसी संभव नहीं है। अपने देश और दुनिया के लिये अमेरिकी ढांचा पूरी तरह से बेकार हो चुका है।

10 में से 9 अमेरिकी को अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं है। अपने सही होने का यकीन या तो टूट गया है, या सवालों से घिरा हुआ है। मात्र 10 प्रतिशत अमेरिकियों को ही इस बात का विश्वास है, कि कुल मिला कर उसकी राजनीतिक संरचना ठीक है। उनका विश्वास अमेरिकी व्यवस्था पर है। 38 प्रतिशत लोगों का कहना है, कि ‘‘अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था पर उनका विश्वास मुश्किल से ही टिक पाता है।‘‘

यह जानकारी एसोसिएटेड प्रेस -एनओआरसी- सेंटर फाॅर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च द्वारा आयोजित ‘नेशनल पोल‘ के अनुसार है।

नये रिपोर्ट के अनुसार मात्र 13 प्रतिशत अमेरिकी लोगों ने कहा है, कि ‘‘उन्हें इस बात पर विश्वास है, कि ‘उनकी द्विदलीय राजनीतिक संरचना निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित तरीके से, बिना किसी रूकावट के काम कर रही है।‘ ‘‘ जबकि 38 प्रतिशत लोगों का कहना है, कि उनकी राजनीतिक संरचना टूट चुकी है। 49 प्रतिशत लोगों ने कहा- ‘‘उनकी राजनीतिक संरचना में वास्तविक रूप से गंभीर संकट है।‘‘

यदि हम 13 प्रतिशत उन लोगों के बारे में सोचें तो उनकी वर्गगत सम्बद्धता, उनका निजी हितों का खाका साफ नजर आने लगेगा। शेष अमेरिकी लोगों के बारे में इतना ही कहा जा सकता है, कि उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। उनकी असहमति अमेरिकी व्यवस्था में व्यक्त नहीं हो रही है। अपने को व्यक्त करने के लिये उनके पास कोई जगह नहीं है। अमेरिकी लोकतंत्र अपनी राजनीतिक संरचना का शिकार हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव, लाॅबिंग और खबरों से भले ही विश्व मीडिया भरी रहती है, लेकिन आम अमेरिकी में न तो उसके प्रति विश्वास है, ना ही उत्साह है।

इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है, कि 70 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने कहा है, कि इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से वो निराश और हताश हैं। उनके भीतर इस चुनाव के प्रति गहरी निराशा है। उन्होंने ‘सुपर डेलीगेट सिस्टम‘ के प्रति भी अपनी असहमति व्यक्त की।

इस ‘सुपर डेलीगेट सिस्टम‘ की शुरूआत 30 साल पहले डेमोक्रेटिक पार्टी ने की। जो अमेरिकी लोकतंत्र के चुनावी धोखे का हिस्सा है। राष्ट्रपति चुनाव एवं नामांकन से पहले की यह एक ऐसी चुनावी प्रक्रिया है, जिसका वास्तव में देखा जाये तो, संविधान में उल्लेख नहीं है। वर्तमान राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी से हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन पार्टी से डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। गिरावट की एक और सीढ़ी।

एसोसियेटड प्रेस -एनओआरसी- का यह ‘पोल‘ 12 मई से 15 मई 2016 के बीच कराया गया, जिसमें 18 साल से ऊपर के लोगों को शामिल किया गया था, ये सभी अमेरिका के 50 राज्यों और कोलम्बिया के हैं।

‘रायटर‘ और ‘इप्सो‘ द्वारा अप्रैल में कराये गये ‘पोल‘ के अनुसार- आधे से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों का मानना है, कि ‘‘अमेरिका के राजनीतिक दलों के द्वारा व्हाईट हाउस के राष्ट्रपति के उम्मीदवार केे लिये जिस प्रकिया से चुनाव किया जाता है, वह धोखेबाजी और चालाकी है।‘‘ दो तिहाई से ज्यादा लोग चाहते हैं, कि इस प्रक्रिया में बदलाव किया जाये। मात्र 29 प्रतिशत डेमोक्रेट्स और 16 प्रतिशत रिपब्लिकन्स को अपनी पार्टी पर भरोसा है। इसमे भी मात्र 8 प्रतिशत अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी पर और 15 प्रतिशत अमेरिकन डेमोक्रेटिक पार्टी पर विश्वास करते हैं।

अमेरिकी श्रेष्ठता के भरम के बीच परिवर्तन की इस सोच के बारे में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है, कि आम अमेरिकी मतदाताओं का भरम टूट रहा है। यदि नव उदारवादी बाजारपरक अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक जन असंतोष और अमेरिकी राजनीतिक संरचना के निरर्थक होने की कडियां जोड़ दी जायें तो यह कहना आसान होगा कि ‘पूंजीवादी वैश्विक संरचना और अमेरिका की राजनीतिक संरचना असंदर्भित हो चुकी है। निजी वित्तीय पूंजी की तानाशाही ने अमेरिकी लोकतंत्र को जन विरोधी बना दिया है।

-अनुकृति, आलोकवर्द्धन

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top