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रावण का दहन राम के साथ

for-kavita

श्री राम भक्त वानरों ने
कल मचाया उत्पात।
खुले दरवाजे से घुस आये कमरे में
किताबों को रेक से,
खाने के सामान को फ्रीज से,
और जो भी रखा था जहां व्यवस्थित
उसे वहां से उठा कर
फर्श पर पटक दिया।

उलट-
पलट दिया कमरे को,
परदों को नोचा
तस्वीरों को फाड़ा
मूर्तियां तोड़ी
लैपटॉप की हालत बिगाड़ दी
बैठकखाने की
कुर्सियों पर वो जा बैठे।

वानरों ने
विजयदशमी से एक दिन पहले
किया होगा जो हाल
सोने की लंका का
मेरे कमरे का, सोने की चिड़िया का
वही हाल उन्होंने किया।
उन्होंने राम को धोखे में रखा
विभीषण से सांठ-गांठ की।

अब,
सोने की लंका, उनके कब्जे में है,
सोने की चिड़िया उनके कब्जे में है
राम, रामायण उनके कब्जे में है
राम की गाथा
और राम लीला मैदान
उनके कब्जे में है।
उनके कब्जे में है रावण।

इस हादसे के बाद
मैं राम से नहीं मिला
जिनसे
एक अदद मंदिर का वायदा है।
राक्षसों को मारने
रक्ष संस्कृति को
जड़-मूल से उखाड़ने का वायदा है।
वायदा है
गली-गली घूमते, मुंडेरों पर बैठे
वानरों को, राजभवन देने का।
जिन्होंने राम के कई सिर उगा दिये हैं।

पराजित कथा-पुराण के रावण से
मैं जब भी मिला
कुम्भकरण और मेघनाथ के साथ
वह रंगीन पन्नियों से सजा
बांस की खमचियों से बंधा मिला।
उन तमाशबीनों से घिरा मिला
जिनकी खुशियां
रावण दहन
और मृत्यु के समारोहों से शुरू होती हैं।
जो राम और रावण को आपस में लड़ाते हैं।

और करते हैं
समुद्र पार के रावण से करार
कि राम विराजेंगे
खुले द्वार के मंदिर में
और राजभवनों से चलेगा-
रावण का कारोबार।
राम भक्त वानरों ने
शुरू करा दिया है
सोने की चिड़िया को बेचने का कारोबार
रावण का दहन राम के साथ।

-आलोकवर्द्धन

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