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घर से लेकर बाहर तक बढ़ता सेना का महत्व

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लोकतंत्र में सेना का उपयोग जब भी सरकार को टिकाये रखने के लिये होता है, आम आदमी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उसके अधिकारों पर ताले जड़े जाते हैं, उसके हितों को किनारे खिसका कर राष्ट्रीय हितों से अलग कर दिया जाता है, उसे देश के लिये ऐसा समर्पित नागरिक बनाया जाता है जो देश, समाज के लिये नहीं अपनी सरकार के लिये काम करता है। ऐसी सरकार के लिये काम करता है जिसे बनाता तो कोई और है, मगर सरकार बनाने का वह जरिया बनता है। इस तरह सरकार के लिये आम नागरिक ‘राजनीतिक जरिया’ और सेना के लिये ‘बास्टर्ड सिविलियन्स’ बन जाता है। कुछ ऐसा बन जाता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था ही खतरे में पड़ जाती है। क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि निजी कम्पनियों और कॉरपोरेशनों के हितों से संचालित देश की मोदी सरकार कुछ ऐसा ही कर रही है? अपने स्थायित्व के लिये वह सेना का इस्तेमाल अपने हित में कर रही है?

कश्मीर में उड़ी सैन्य मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले और पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद, मोदी और उनकी सरकार सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रचार कुछ ऐसे कर रही है जैसे यह एक दृढ़ सरकार के निर्णयों का परिणाम है। वह ‘सेना को सम्मान’ के नाम पर उसका मन बढ़ा रही है, उसे अपने प्रति आस्थावान बना रही है। इस देश में सरकार के नाम पर सिर्फ एक चेहरा है- नरेन्द्र मोदी। जवानों की हौसलाअफज़ाई के लिये उन्होंने देश की दीपावली को जवानों के नाम समर्पित किया और सैल्यूट करने, मिठाई खाने-खिलाने के लिये हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला के समदो बॉर्डर पहुंच गये। उन्होंने मन की बातें की और यही जताया कि सिर्फ सेना ही देश के बारे में सोचती है और यह भी जता दिया कि वो सेना के जवानों को अपना मानते हैं, और अपनों के बीच एक घंटे की दिवाली मनाने वो आये हैं। बाकी का 23 घण्टा तो कारोबारियों के लिये है।

देश की आम जनता और सेना के बारे में उन्होंने क्या कहा? सुन लें आप! उन्होंने कहा- ‘‘आम लोगों के ध्यान में रहता है कि आगे कैरियर कैसा होगा? गांव में रहना पड़ेगा या शहर में जाना पड़ेगा? (जबकि) जवान को यह चिंता रहती है, कि उन्हें गोली चलाने का मौका नहीं मिला। दुश्मन से भिड़ने का अवसर नहीं मिला। देश का भविष्य आपकी रग-रग में बसा है।’’ और ऐसे ही कमतर सोच रखने वाले ‘‘इस बार दिवाली मोबाइल पर ‘संदेश-2 सोल्जर’ के नाम से मना रहे हैं।’’ मैंने भी संदेश दिया। ऐसे ही कमतर सोच रखने वाले आम नागरिकों को राष्ट्रवादी बनाने की मुहीम चल रही है। बड़े ही सुनियोजित तरीके से राष्ट्रवाद को आक्रामक बनाया जा रहा है।

भारत में सेना का सम्मान कभी कम नहीं रहा। युद्ध में उसके शौर्य और पराक्रम पर देश की आम जनता ने विश्वास किया। प्राकृतिक आपदाओं में वह हमेशा सहयोगी ही प्रमाणित हुई। 1857 के गदर के बाद से बनी उसकी यह पृष्टभूमि हमेशा उसके साथ चलती रही। जिसे मार्क्स ने ‘ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ भारत में क्रांति’ के रूप में परिभाषित किया।उन्होंने इसे ‘विद्रोह’ की अवधारणा से निकाल कर ‘क्रांति’ की अवधारणा से जोड़ा। जिसका नेतृत्व औपचारिक रूप से मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने किया था। जिसमें देशी रियासतें भी शामिल थीं। इसके बाद भी यह सशस्त्र जनसंघर्षों की शुरूआत थी।

आजादी के बाद सेना हमेशा सक्रिय रही, लेकिन उसकी सक्रियता को सीमा की सुरक्षा तक सीमित रखने की नीतियां भी थीं, हालांकि आंतरिक चुनौतियों को हल करने के लिये सेना का उपयोग सरकारें करती रही हैं। कश्मीर पर हुए पाक हमले और कबिलायी संघर्ष से लेकर तेलंगाना के जनसंघर्ष में सेना की भूमिका थी। सरकार जिसे पृथकतावादी आन्दोलन मानती रही है। उसके लिये सीमांत क्षेत्रों के हर संघर्ष का अर्थ यही रहा है। पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार। नक्सलवादी-माओवादियों के संघर्ष को आंतरिक सुरक्षा के लिये सबसे बड़ा खतरा मान लिया गया है। माओवादियों को मनमोहन सिंह सरकार ने आतंकवादी करार दिया और अब मोदी सरकार उन्हीं नीतियों को दमन का हंथियार बना चुकी है।

मोदी सरकार जिस तेजी से देश की अर्थव्यवस्था का निजीकरण कर रही है और जिस तेजी से देश की प्राकृतिक सम्पदा को निजी कम्पनियों के हवाले कर रही है, और जिस तेजी से सामाजिक विसंगतियां बढ़ती जा रही हैं, उसे देख कर आसानी से समझा जा सकता है, कि वह सेना को क्यो बढ़ा रही है? क्यों उसे अपना हंथियार बना रही है? आने वाले करीबी कल की तस्वीर साफ है। पाक के साथ वह चीन से लड़ाई का हौसला बांध रही है। वह घर से लेकर बाहर तक वित्तीय ताकतों के हितों के लिये सेना को महत्वपूर्ण बना रही है।

-आलोकवर्द्धन

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One comment

  1. इस तरह सरकार के लिये आम नागरिक ‘राजनीतिक जरिया’ और सेना के लिये ‘बास्टर्ड सिविलियन्स’ बन जाता है।
    ..
    सटीक विश्लेषण …दो टूक शब्दों में … आम आदमी कहाँ समझ पाता है इन राजनीतिक पैंतरों को, उसे तो अपनी रोजी रोटी से ही फुरसत नहीं मिल पाती …

    चिंतनशील प्रस्तुति हेतु धन्यवाद

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