बुखार

49746baa-5c4e-4397-b9a5-c96f63227670

बुखार नया है।

डॉक्टरों ने समझ तो लिया, लेकिन मर्ज को चाहने वालों के लिये, उन्होंने कई जांच लिखे।

मलेरिया, मियादी, मौसमी बुखार और न जाने क्या-क्या? कुछ ने डेंगू और चिकनगुनिया भी लिखा। दिमागी बुखार के बारे में भी सोचा गया। जांच हुई।

जांच रिपोर्ट में कुछ नहीं निकला।

केस हिस्ट्री बस इतना कि पिछले ढ़ाई-तीन साल से बुखार लगातार चढ़ रहा है, बढ़ रहा है।

डॉक्टरों ने मान लिया- बुखार नया है, जिसका इलाज अभी नहीं है।

गये महीने बिना किसी खास इलाज के मरीज का बुखार उतरने लगा। डॉक्टरों ने मर्ज को पहचान लिया। उनकी मुश्किलें बढ़ गयीं। वे ‘सरकार विरोधी’ या ‘देशद्रोही’ बनना नहीं चाहते।

मरीज खतरा है। रोग संक्रामक है। वे डरे हुए हैं। मर्ज को चाहने वाले नहीं चाहते मरीज अच्छा हो।

लोग किसी अप्रिय घटना के चश्मद्दीद गवाह बनने को हैं।

(आग्रह – नोटबंदी के बाद, मोदी के उतरते बुखार से इसे जोड़ कर न देखें।)

-आलोकवर्द्धन

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top