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बहुमंजिली ईमारत पर टंगा ‘देश‘

Gujarat's Chief Minister Narendra Modi smiles during an election campaign rally ahead of the state assembly elections in the western Indian city of Ahmedabadचंद लोग आये और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री की तस्वीर को बहुमंजिली ईमारत के महत्वपूर्ण हिस्से पर टांग दिया।

प्रधानमंत्री जी आराम से टंग गये।

उन्हें यहां-वहां टंगना दीवारों पर चिपकना अच्छा लगता है।

किसी ने कुछ नहीं कहा।

टांगने वालों ने मान लिया कि बिल्डिंग पर कब्जा हो गया। वहां रहने वाले, आने-जाने वालों के दिल-ओ-दिमाग पर मोदी जी की मुस्कुराती हुई छवि चिपक गयी।

मंजिल फतह! काम तमाम!

किसी और के टंगने की अब जगह नहीं।

जहां प्रधानमंत्री जी हैं, वहां सरकार है।

जहां सरकार है, वहां देश है।

जो सरकार के पक्ष में है, वह देशभक्त है।

जो देशभक्त नहीं है, वह देशद्रोही है।

वैसे भी, कोई देशद्रोही बनना नहीं चाहता। मैं भी देशद्रोही नहीं बनना चाहता। मुश्किल यह है, कि मेरी दिलचस्पी बहुमंजिली ईमारत पर टंगे देश में घटती जा रही है। देशद्रोही बनने के खतरों ने मेरी नींद उड़ा दी। मैं देशभक्त बनना चाहता हूं।

वक्र जी की सलाह है- ‘‘मौका अच्छा है। चुनाव आयोग का फरमान है। टंगे हुए ‘देश‘ को बिल्डिंग से उतार दीजिये।‘‘

देखते हैं, क्या होता है?

-आलोकवर्द्धन

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