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हमने जो सुना, हमने जो देखा है

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देश में
सरकार हमारी है
और चरवाहा कस्साई नहीं
यह हमने सुना है।

X X X

देखा है हमने
चरवाहे को
मवेशियों का झुण्ड ले जाते हुए,
झुण्ड में
गाय-बैल
भेंड़-बकरियां
और माल-असबाब ढ़ोने वाले
सभी मवेशी हैं,
वो लोग हैं
जो होते हैं दो पाया
मगर जिन्दगी
चौपायों की जीते हैं।
चरवाहा खुश है
उसे मवेशियों ने अपने लिये
खुद चुना है।
मवेशियों को
उम्मीद है चरागाह की
नर्म घास-दूब, कोमल पत्तियां
और काम के बाद पगार की।
बूचड़खाना
चरागाह में है,
और चरागाह है देश में।

X X X

देश में
सरकार हमारी है
और चरवाहा कस्साई नहीं
हमने यह सुना है।

-आलोकवर्द्धन

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