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बजट पर बकवास

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सरकार ने फ्यूचर का बजट पेश किया।

वर्तमान पर बातें करेंगे सरकार?

हालत खराब है- देश की, दुनिया की, हमारी और आपकी भी। काहे यह भरम फैला कर रखते हैं, कि आप जो भी करेंगे आम जनता आपके साथ है। यह गलत है। झूठ है। चरम राष्ट्रवाद की थाली में मोदी जी अब पच नहीं रहे हैं। न खाने के लायक हैं, न पकाने के लायक हैं। डस्टबिन का मुंह खुला है। लोग अपने उम्मीदों को डालते-डालते थक गये हैं। जिनकी थाली में मोदी जी सजते हैं, वो चंद लोग हैं। वर्तमान का बजट पेश करते तो पसीने छूट जाते।

वित्त मंत्री जी, अपनी चुनावी सभा तो आपको याद है न? लोग न तो आपको देखना चाहते हैं, ना ही सुनना चाहते हैं। और प्रधानमंत्री जी, आप तो अभी मस्त रहिये। तमाम बड़ी-बड़ी बातों का रिकार्ड आपने तोड़ दिया है। आपने सही कहा- ‘‘यह भविष्य का बजट है।‘‘ ‘‘सबका साथ, सबका विकास का मंत्र है।‘‘ सभी वर्गों में यह घिसी हुई उम्मीद बढ़ाने की कोशिश की गयी है, कि ‘अच्छे दिन आने वाले हैं।‘‘ निवेश के साथ आपने रोजगार को जोड़ दिया है।

निवेश कहां होगा मोदी जी?

निजी क्षेत्रों में।

काम कौन करेगा मोदी जी?

आम लोग करेंगे।

काम की शर्तें कौन तय करेगा मोदी जी?

निजी कम्पनियां तय करेंगी।

मुनाफा कौन कमायेगा मोदी जी?

निजी कम्पनियां कमायेंगी।

तब तो मानना ही होगा, कि आम लोगों के लिये खास वजह है, जिसे देख कर सट्टेबाजों ने शेयर मार्केट का उछाल दिया। कॉरपोरेट का दिल बिना मुनाफा के तो उछलता नहीं है। भविष्य में कॉरपोरेट निवेश करेगा, तो भविष्य में रोजगार बढ़ेगा। और जिस क्षेत्र मे निवेश होगा, उस क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्रों सहित कामगरों के पर कतरे जायेंगे, उनके हितों की हत्या होगी, अधिकारों का हनन होगा। श्रम कानूनों में संशोधन की चाल आप चल ही चुके हैं, भू-अधिग्रहण अधिनियम को सांप भी मर जाये और लाठी भी बची रहे की राह आप दिखा ही चुके हैं। किसानों का हित बाजार के हवाले है। कृषि को उद्योग में बदलने की अच्छी जालसाजी है। लोग झांसे में आयेंगे ही। ढ़िंढोरची ढ़िंढोरा पीट ही रहे हैं।

आम जनता बाजार के घेरे में है और उसके लिये निकासी के जितने द्वार हैं, वहां निजी कम्पनियां बैठी ही हैं। हम कमायें या गवायें, लाभ उन्हीं को मिलना है। ईमली का पेड़ा लगा कर आम और अमरूद के सपने बांट रहे हैं। बांटिये, बजट पर बकवास जारी है। हम सुनेंगे। मोदी साहब नाम बदलने में माहिर हैं, जब फल होगा ईमली का नाम आम रख देंगे। हमारे देश की सरकर समर्थक मीडिया ईमली का फोटो छाप कर आम लिख देगी। उनके लिक्खाड यह प्रमाणित कर देंगे कि आम पहले ईमली की तरह खट्टा होता है, सब्र करें, बजट भविष्य का है, शक्ल-सूरत मत देखिये, ईमली आम जो जायेगा।

-आलोकवर्द्धन

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