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नारे मुंह चिढ़ा रहे हैं!

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होली से एक दिन पहले।

शहर के मॉल, पेट्रोल पम्प, शोरूम और ऐसी बड़ी दुकानें, जिनमें कांच और शीशे लगे हैं उन पर मोटे कपड़े तान दिये गये, पॉलीथिन और गत्ते लगा दिये गये। उनके साइन बोर्ड को भी ढ़ंक दिया गया।

समझने में थोड़ी सी दिक्कत हुई कि गये साल तक तो होली की तैयारी व्यापारी वर्ग ने ऐसे नहीं की थी।

पेट्रोल पम्प के मशीनों पर ताले लग जाते थे।

जो सामने है, शीशे की उन्हीं दीवारों को ढ़ंक दिया जाता था।

साइन बोर्ड के चेहरे खुले रहते थे।

शोरूम, बड़ी दुकानों को सिर से पांव तक कपड़े, गतते, हार्ड बोर्ड या पॉलीथिन नहीं पहनाया जाता था।

हमने मान लिया ‘केसरिया होली’ का रंग ऐसे ही जमता है।

होली के दिन रंग जमा।

‘होली है’ से शुरूआत हुई और फिर ‘हैप्पी होली! हर-हर मोदी!’ ने हमारे मुहल्ले को जकड़ लिया। बाद में पता चला कि शहर में भी यह जकड़न थी।

खबरों, खयालों और वारदातों की कड़ियां जोड़ें तो होली के हुड़दंग में हिंसा, मार-पीट, पत्थरबाजी और हत्या से लेकर ‘हर-हर मोदी’ के साथ ‘घर-घर घुसे मोदी’ की तस्वीरें उभर कर सामने आ जायेंगी। सपा के चुनावी टी-शर्ट फटे, डिम्पल यादव को अश्लील गालियां मिलीं। ‘मुहल्ले में रहना है तो मोदी-मोदी कहना है’ के नारे लगे। शराबी-भंगेड़ी और जुनूनी लोगों के जत्थों का दोनों हाथ उठा कर ‘मोदी-मोदी’ कहना-चिल्लाना और नाचना भी दिखा। माहौल राजनीतिक उन्माद का बना रहा। एक ऐसे उन्माद का जहां कानून और व्यवस्था नहीं है। शांति और सुरक्षा नहीं है।

यह सवाल करने की नौबत भी आयी कि ‘आखिर यह सब कब तक चलेगा?’ जिन लोगों ने मॉल, शोरूम और दुकानों को ढ़ंकने की तैयारियां की, क्या उन्हें पहले से पता था?

हम यह नहीं कहेंगे, कि ये तमाम मन चढ़े संघी या भाजपाई हैं। मगर यह तय है कि संघ और भाजपा का इसमें हाथ है, जिन्होंने मोदी को उन्माद बनाया और आज इस उन्माद को उनकी लोकप्रियता बता रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में भाजपा ‘न भ्रष्टाचार, न गुण्डाराज, पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार’ के नारों के साथ चुनाव लड़ी थी। उनके पास राजनीतिक भ्रष्टाचार के सवालों से घिरा पूर्ण बहुमत है, और यदि केसरिया होली यही है, तो गुण्डाराज की होली कैसी होगी? यह सवाल है।

सरकार के गठन से पहले ही नारे मुंह चिढ़ा रहे हैं। लोगों ने 2014 के आम चुनाव की गल्तियों को दुहरा तो नहीं दिया?

क्या इससे भी बुरे दिन आने वाले हैं?

मोदी जी को खड़ा करने वाली वित्तीय ताकतें जरूरत से ज्यादा होशियार हैं।

-आलोकवर्द्धन

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