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भय की बनती सूरतें

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आज सरकार और सरकार समर्थक मीडिया के किसी भी बात पर यकीन करना मुश्किल हो गया है।

जिसे वो आतंकवादी कहते हैं, वह आतंकवादी प्रमाणित नहीं होता।

जिसे वो देशद्रोही करार देते हैं, वह देशद्रोही प्रमाणित नहीं होता।

और ऐसा न होने पर सरकार हो या मीडिया किसी से क्षमा नहीं मांगती, अपने को गलत नहीं मानती। उनके पास धूल और राख की कमी नहीं है, वो उन पर धूल डाल देती, राख पोत देती हैं। जिसकका बुरा हुआ, हुआ, भला तो किसी का होना नहीं है। कन्हैया कुमार के साथ जेएनयू और जन सहयोग नहीं होता तो अब तक वो देशद्रोही होते।

उस पिता को संसद ने भी सलाम किया जिसने लखनऊ मुठभेड़ में मारे गये ‘आतंकी’ की लाश नहीं ली, कि ‘उसने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसका जनाजा निकले’, उस संसद, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार, साबरमती रेल धमाका और लखनऊ में हुए मुठभेड़ में मारे गये आतंकवादी’ के सामने कई सवाल खड़े हैं, जिसका सही जवाब नहीं है। भजपा उत्तर प्रदेश में चुनाव जीत चुकी है, कट्टर हिन्दूवादी योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन गये हैं, सवालों पर धूल-राख पड़े हैं। खबरें बांटी जा रही हैं, कि आतंकी नरेन्द्र मोदी को मारना चाहते थे।

अब अल्पसंख्यक जमात से एक नयी खबर आयी है, कि उत्तर प्रदेश के विकास खंड बेलहरी के पिंडारी गांव के मुर्तजा ने अपने बेटे सिराजउद्दीन के निकहनामे के आमंत्रण पर गणेश जी की तस्वीर, शुभ-लाभ और स्वास्तिक चिन्ह भी लगाया है, और मंगलम् भगवान विष्णु…का मंत्र भी छपवाया है।

इसे ‘धार्मिक सौहार्द के प्रतीक’ के रूप में, खबरें बांटी गयी हैं। यदि खबर सही है, तो 23 मार्च को निकाह भी हो चुका होगा।

यह डर है, या सौहार्द? समझना मुश्किल है।

ऐसा कभी होता नहीं था। ऐसा कभी हुआ भी नहीं। बहुसंख्यक समुदाय ने ऐसे सौहार्द का प्रदर्शन कभी नहीं किया, शायद इसलिये कि उन्हें डर नहीं है।

निकाह में हिन्दुओं का शामिल होना स्वाभाविक है। पर्व-त्यौहारों में भी ऐसा होता रहा है। मगर, आपसी भईचारा दिखाने के लिये जो दिखाया जा रहा है वह स्वाभाविक नहीं है। बल्कि भाजपा, हिन्दुवादी संगठनों के उग्र तेवर और कट्टरवादी हिन्दू आदित्यनाथ की सरकार का डर शायद अल्पसंख्यक समुदाय के सिर पर सवार हो गया है। यह खबर पहले ही छप चुकी है, कि भाजपा की जीत पर मुसलमान मुहल्लों में मिठाईयां बांटी गयी। ऐसी खबरे अब छपती रहेंगी कि मुख्य मंत्री आदित्यनाथ उदार हिन्दूवादी और अल्पसंख्यक समुदाय के हितैशी हैं। सरकारें हमेशा जनकल्याण और भाईचारा बढ़ाने में लगी रहती हैं, मगर ऐसा हो नहीं पाता। बस विकास की खबरें भर छपती हैं।

मगर यह खबर नहीं छपेगी कि गो मांस के सबसे बड़े व्यापार हिन्दू ही हैं और वो राजनीतिक गलियारे में भाजपायी हैं, उससे जुड़े लोग हैं, गायों को गौ माता समझने वाले ऐसे लोग हैं, जो पक्के व्यापारी हैं।

हमें उस बढ़ते हुए भय के बारे में सोचना होगा जो अल्पसंख्यक समुदाय और उदारवादी लोगों के जेहन में फैल रहा है। जो बढ़ती हुई सामाजिक असहिष्णुता और देशभक्ति के उग्र प्रदर्शनों से आतंकित है। यह मुगल सम्राट अकबर का माथे पर तिलक लगाना नहीं, बल्कि दंगे के दौरान अपने को बचाने के लिये दाढ़ी मुड़वाना और केश कटवाना है। यह सैकड़ों साल बाद दिल्ली पर नरेन्द्र मोदी को ‘हिन्दू राजा’समझने और उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ को ‘हिन्दू हृदय सम्राट’ समझने वालों का भय है। जबकि भय से निजात पाने के लिये ही समाज औ राज्य का उदय हुआ। भय अब राज्य सरकारों की सूरतें बन गयी है।

-आलोकवर्द्धन

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