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मोदी सरकार की करिश्माई उपलब्धि – हम गदहे हैं!

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देश में भांट, गवईया और कथावाचकों की पूछ बढ़ गयी है।

वर्ष हिंदू हो गये हैं।

देवी-देवता जागृत हो गये हैं।

गाय माता हो गयी है।

स्वयं सेवक गणों की पहुंच बढ गयी है।

राम मर्यादा पुरूषोत्तम नहीं रहे।

अशोक प्रियदर्शी नहीं रहे।

अकबर महान नहीं रहे।

महाराणा प्रताप और शिवाजी का कायाकल्प हो रहा है।

साहित्य ही नहीं, इतिहास भी बदल रहा है।

‘‘समय परिवर्तनशील है, या हम गदहे बन रहे हैं?‘‘ इस सवाल ने मुझे चौंका दिया। इस सीमा तक चौंका दिया कि घूमते हुए समय चक्र से गदहों की आवाजें आने लगीं। ‘मेरा भारत महान‘ से लेकर ‘न्यू इण्डिया‘ तक की बोल गूंजने लगी। लोग गीत और भजन गाने लगे।

बैल जोड़ी, गाय-बछड़ा से लेकर पंजा और कमल फूल मंडराने लगे। ‘‘हम 21वीं सदी की ओर बढ़ रहे हैं‘‘ हमने सुना था, अब 21वीं सदी आ गयी। भगवान याद आ गये। भगवान ने हार्न बजा दिये। सड़क खाली करो। अच्छे दिन आने वाले हैं। सड़कें खाली हो रही हैं। तीन साल से यही हो रहा है। एक सरकार अपने तीन साल की उपलब्धियों का बखान कर रही है। जो तीस साल नहीं, साठ साल की उपलब्धियों से बड़ी है। इतनी बड़ी है, कि तीन साल नहीं होता तो साठ साल कहीं घास छील रहा होता।

समझना मुश्किल हुआ कि एक देश और उसकी सरकारी पिछले साठ साल से क्या कर रही थी? क्या कमल खिलाने के लिये वह कीचड़ फैला रही थी?

तीन साल से खिले कमल ने।

चश्मा चढ़े कमल नयन ने।

कमलगट्टा छाप मुखमण्डल ने।

उल्टे पांव चलते कदमों ने कमाल कर दिया।

भांट-गवईया गा रहे हैं।

कथावाचक कथा सुना रहे हैं।

राजनीति में वीर गाथा काल और भाक्ति काल उस काल में प्रवेश कर चुका है, जिस काल में ऐसे करिश्माईयों को पैदा किया जाता है, जो होते तो मदारी का जमूरा हैं, मगर जिनका जादू सिर पर चढ़ कर तब तक बोलता है, जब तक सिर धड़ से अलग नहीं हो जाता है। अभी सिर धड़ से जुड़ा हुआ है, उम्मीदों के इर्द-गिर्द चकरा रहा है।

सोच कर देखिये कि जिस दिन देश की आम जनता को पता चलेगा कि जो भी उसका और उसके देश का था, उसे उसके आज और आने वाले कल के साथ, निजी कम्पनियों को सौंप दिया गया, उस दिन वह आज की सरकार और उसके समर्थकों सहित उसके मुखिया के साथ क्या करेगी?

उस सरकार के साथ क्या करेगी जिसने लोकतंत्र को राजनीतिक एकाधिकार और वित्तीय तानाशाही में बदल दिया?

जिसने आदमी को भगवा और राष्ट्र को हिंदू बना दिया?

आज मीडिया यह सब जानते हुए अपने निजी हितों के लिये ऐसे लोगों के गाने गा रही है, वह मीडिया कितनी लापरवाह, घातक और गुलाम है?

सबका साथ सरकार को मिला या नहीं? यह सवाल है, मगर सबका विकास नहीं होगा, यह तयशुदा बात है। हाल-फिलहाल में जारी क्रेडिट स्विस की रिपोर्ट के अनुसार- 2014 से पहले भारत के जीडीपी के 49 प्रतिशत सम्पत्ति पर 1 प्रतिशत अमीर लोगो का अधिकार था, किंतु 2014 में जब से मोदी की सरकर बनी है, तब से अब तक भारत के 1 प्रतिशत लोगों के पास जीडीपी की 58.4 प्रतिशत सम्पत्ति पहुंच गयी है।

यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है, कि तीन साल में उसने 9.4 प्रतिशत देश और आम जनता की सम्पत्ति को 1 प्रतिशत अमीर लोगों को सौंपने का करिश्माई काम किया है।

भाजपा, सरकार, देश की आम जनता और उन 1 प्रतिशत लोगों को बधाई, जिनकी यह सरकार है। जिसके वायदों के घने बादलों में बिजलियां छुपी हैं। यकीन जानें गाज गिरती रहेगी।

-आलोकवर्द्धन

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