Home / सोच की जमीन / लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 1

लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 1

स्तम्भों को हिलाने की नीति-

अपने राजनीतिक प्रतिद्वन्दी और विपक्ष को कुचलने की जैसी राजनीति भाजपा कर रही है, वैसी राजनीति भारतीय लोकतंत्र में पहले कभी नहीं की गयी। राजनीतिक एकाधिकार की उसकी सोच उस ओर बढ़ चुकी है जो लोकतंत्र के लिये सबसे बड़ा खतरा है।

भारतीय लोकतंत्र को चार स्तम्भों पर टिकाया गया है- व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिक और स्वतंत्र मीडिया।

चौथा स्तम्भ ढ़ह चुका है। मुख्यधारा की मीड़िया में भाजपा, संघ, मोदी सरकार और सबसे ज्यादा मोदी के अलावा और कोई खबर नहीं है। विरोध के सभी स्वर को खबरों के सन्नाटा का सामना करना पड़ रहा है। बड़े ही प्रायोजित ढंग से खबरें ऐसे फैलाई जाती हैं, कि एक राष्ट्र, एक दल, एक नेता की सोच विकसित हो। इस बात की खबर ही नहीं है, कि राजनीतिक एकाधिकार लोकतंत्र की कब्र है, जिसे कार्यपालिका प्रमुख और मीडिया खोद रही है। जिसके पीछे वो वित्तीय ताकतें हैं, जो वित्तीय तानाशाही की पक्षधर हैं।

आपने खबर पढ़ी ही होगी, नहीं पढ़ी होगी तो किसी ने आपको जरूर बताया होगा, कि ‘‘देश की मोदी सरकार लोगों का भरोसा जीतने वाली दुनिया की ‘नम्बर वन‘ सरकार है।‘‘

इस खबर से भाजपायी खुश हैं, संघ खुश है, सरकार के मंत्री-संतरी खुश हैं, कि खबरों को फैलाने का सिलसिला चल रहा है। मोदी जी खासे खुश हैं। खुशी ‘इसलिये खास है, कि दुनिया की ‘आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन‘ की यह रिपोर्ट ‘नोटबंदी‘ और ‘जीएसटी‘ के बाद आयी है। ‘गर्वमेंट एटग्लांस-2017‘ के नाम से सदस्य 34 देशों में कराये गये सर्वेक्षण की रिपोर्ट ‘फोर्ब्स‘ ने जारी करते हुए लिखा कि ‘‘भारत के 73 प्रतिशत लोगों का भरोसा वर्तमान सरकार के साथ है, इनका भरोसा सरकार से डिगा नहीं है। ये लोग मोदी सरकार के कार्यशैली से खुश हैं।‘‘

73 प्रतिशत लोगों का भरोसा

मोदी सरकार की कार्यशैली

और ‘भरोसा डिगा नहीं है।‘‘

मतलब? सरकार ही नहीं वित्तीय ताकतों की सोच भी यही थी, कि ‘‘नोट बंदी और जीएसटी और खास किस्म के राष्ट्रवाद की वजह से मोदी की विश्वसनियता घटी होगी।‘‘ और ऐसा है भी, जनअसंतोष बढ़ा है, लेकिन ‘आईसीडी‘ ने मोदी के भरोसे को हवा दे दी है। मोदी को दुनिया का सबसे भरोसेमंद नेता बना दिया है, ताकि अर्थव्यवस्था के निजीकरण की रफ्तार बनी रहे, जनविरोधी नीतियों को लागू करने की खुली छूट मिले और आम लोगों के बीच पक्ष में हवा बनी रहे। ‘कार्यशैली‘ के रूप में मोदी के एकाधिकार को मंजूरी दी गयी है

हवा ठीक से बह रही है-

मोदी के अलावा कोई नेता नहीं।

भाजपा का कोई विकल्प नहीं।

हिंदू राष्ट्रवाद की कार्यशैली सही है।

प्रचार अभियान सुनियोजित चल रहा है।

अल्पसंख्यक कोई सवाल नहीं है। किसानों के समस्या कोई समस्या नहीं है। महंगाई, बढ़ती असहिष्णुता, और जनअसंतोष कोई मुद्दा नहीं है। युद्ध और युद्ध की आशंकाओं के लिये हथियारबद्ध होना गलत नहीं हैं एफडीआई के लिये जगह चौड़ी हो, सुरक्षा, सेवा, रेल से लेकर एयर इण्डिया और परिवहन का निजीकरण होने दें। यह समय भरोसे को कैश कराने का है, विपक्ष पर हमला जरूर बोलें। गड़े मुर्दे उखाडें, पूर्व के फैसलों को सवालों से घेर कर न्यायपालिका को भी गलत बतायें। लोकतंत्र के सभी स्तम्भों को हिला दें। सरकार और सरकार समर्थक मीडिया यही कर रही है।

लोकतंत्र यदि मर रहा है, तो कोई खास बात नहीं।

-जारी

-आलोकवर्द्धन

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top