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अफ्रीका-साउथ अमेरिका – महाद्वीपीय सहयोग की नर्इ पहल

latine america (3)वेनेजुएला में शावेज की वापसी हो गयी है। क्यूबा से वापसी के बाद वो वेनेजुएला के सैनिक अस्पताल में हैं। जहां उनका इलाज चल रहा हैं। उनके कैंसर का इलाज कर रहे क्यूबा के डाक्टरों ने उन्हें खतरे से बारह बताया है। उनके स्वस्थ्य होने और उनके समर्थन में कर्इ प्रार्थना सभायें और रैलियां आयोजित की गर्इं। इस बात का महत्व इसलिये भी है कि जनभावनाओं को देखते हुए ही शपथ लेने की औपचारिकता पूरी न करने का बाद भी उनके कार्यकाल का विस्तार किया गया है। इस बात का महत्व इसलिये भी है कि वेनेजुएला शावेज के बिना भी बोलिवेरियन क्रांति की समाजवादी दिशा की ओ आगे बढ़ रहा है। ऐसा लगने लगा है जैसे लातिनी अमेरिकी देशों ने अपने राष्ट्रीय, महाद्वीपीय एवं वैश्विक जिम्मेदारियों का साझा बंटवारा कर लिया है और वेनेजुएला लातिनी अमेरिका एवं अफ्रीकी महाद्वीप के बीच सेतु का काम कर रहा है।

दो महाद्वीप के सम्बंधों में नजदीकिया भी नजर आने लगी हैं। क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रों के बाद वेनेजुएल के राष्ट्रपति हयूगो शावेज ने संभवत: इस भूमिका को संभाल लिया है। वेनेजुएला सहारा के रिफ्यूजी कैम्पों के लिय पानी की व्यवस्था में ही नहीं लगा है, बलिक ”अफ्रीका-साउथ अमेरिका” ए0एस0ए0 में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह गंभीरता से कर रहा है।

21 फरवरी 2013 को हुए ”अफ्रीका-साउथ अमेरिका” के तीसरे सम्मेलन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति शावेज के पत्र को विदेश मंत्री इलियास जोया ने पढ़ा। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि ”हमारे महाद्वीप में, जहां पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन, राजनीतिक एवं ऐतिहासिक समृद्धि की पृष्टभूमि है, दुनिया की शांति एवं स्थिरता के लिये वास्तविक शक्ति स्तंभ की तरह संगठित हो। क्योंकि पूंजीवादी व्यवस्था इस पूरे ग्रह अशांति और अस्थिरता की ओर धकेल रहा ”अपने देश, दुनिया और पृथ्वी को बचान के इस अवसर को मत गंवार्इयें। हमें अपनी क्षमताओं को आपस में जोड़ने की जरूरत है। ताकि हम अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर सकें।” उन्होंने पश्चिमी देशों के लिये लिखा कि ”वे हमारे परेशानियों और समस्याओं के समाधान के व्यापक और निशिचत स्त्रोत नहीं हैं।”

पहला ए0एस0ए0 सम्मेलन 2006 में नाइजीरिया में हुआ था, और दूसरा वेनेजुएला में हुआ। तीसरे सम्मेलन का आयोजन इक्वीटोरियल गिनी में हुआ। दोनों महाद्वीपों के व्यावसायिक सम्बंधों में विस्तार हुआ है। 2002 में उनका व्यापार 7.2 बिलियन डालर था, जो साल 2011 में बढ़ कर 39.4 बिलियन डालर हो गया है। आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिये दोनों महाद्वीप के बीच एकीकरण की गति को तेज करने पर जोर देते हुए पत्र में वरियता का निर्धारण करते हुए कहा गया है कि ”ऊर्जा, शिक्षा, कृषि, वित्त और संचार माध्यमों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना जरूरी है।” सम्मेलन में शामिल हुए इक्वाडोर के विदेश मंत्री रिकार्डो पटीनो ने कहा कि ”कर्इ बार ऐसा होता है कि हमें (अफ्रीका और लातिनी अमेरिका) किसी समझौते पर पहुंचने में मुशिकलों का सामना करना पड़त है, क्योंकि हम एक दूसरे को अच्छी तरह नहीं जानते हैं। हमें किसी संयुक्त कार्यक्रमों का अनुभव नहीं है। इसके बाद भी ऐसा बहुत कुछ है जिसे हम एक दूसरे को दे सकते हैं। और यह सिर्फ व्यापार हीं है।”

शावेज ने पश्चिमी शक्तियों द्वारा आज के समय में किये जाने वाले हस्तक्षेप को अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका के संयुक्त कार्यों की राह को बाधित करने का आरोप लगाते हुए ‘अफ्रीका-दक्षिणी अमेरिका’ के 2009 के सम्मेलन के दौरान तय किये गये संयुक्त कार्यक्रमों का जिक्र किया, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ”वेनेजुएला अफ्रीकी देशों और दुनिया में नाटो के हस्तक्षेप को अस्वीकार करता है।” जिसने अफ्रीकी महाद्वीप में ऐसी स्थितियां पैदा कर दी है, कि लीबिया में कर्नल गददाफी के बाद न सिर्फ उसकी आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ गयी है, बलिक उसके विकास की संभावनायें भी प्रभावित हुर्इ हैं। कबीलों के बीच अपनी पहचान और राष्ट्रीयता का मुददा भी खड़ा हो गया है। मोरक्को से खदेड़े गये शारोये सहारा रेगिस्तान में पड़े हैं।

शारोये अरब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक- एस0ए0डी0आर0 में पानी की भयानक किल्लत है। वेनेजुएला के सहयोग से इस बात की संभावना बन रही है कि उनकी परेशानियां कुछ कम हो सकती हैं। वह स्थानीय लोगों -को तकनिकी प्रशिक्षण दे रहा है।

14 फरवरी को वेनेजुएला के पर्यावरण मंत्री ने कहा कि एस0ए0डी0आर0 से 10 तकनिसियनों को हार्इड्रो जियोलाजी और डि्रलिंग में वेनेजुएला के नेशनल हाइड्रोलिक लेबोरेट्री में प्रशिक्षित किया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे शारोये लिबरोशन ग्रूप द्वारा चलाये जा रहे रिफ्यूजी कैम्पों में पानी मुहैया कराया जा सकेगा। एस0ए0डी0आर0 में रिफ्यूजियों की संख्या 1 लाख से 1,50,000 है। इनमें से ज्यादातर रिफ्यूजी वहां 1975 में मोरक्को द्वारा उनके घरों और जमीनों से जबरन बेदखल किये जाने के बाद से, सहारा के अंदरूनी इलाकों में रिफ्यूजी कैम्पों में रह रहे हैं। ये कैम्प हमेशा से पानी की समस्या से जूझते रहे हैं। जिनके लिये पीने के पानी की कोर्इ स्थायी व्यवस्था नहीं है। काफी दूर से टैंकरों से पानी लाया जाता है, जिसकी सप्लार्इ चंद घण्टों के लिये की जाती है। 50 डिग्री सेलिसयस के बीच रहते लोगों के लिये पानी की अहमियत क्या हो सकती है? यह समझा जा सकता है, ओर यह भी समझा जा सकता है कि चंद घण्टों में 1 से 1 लाख 50 हजार लोगों के बीच इसके वितरण की व्यवस्था कितनी अस्त-व्यस्त होगी।

पिछले 37-38 सालों से कैम्पों में रहने वालों की जिंदगी के बारे में भी अंदाजा लगाया जा सकता है। जिसके लिये मोरक्को की सरकार और उसे समर्थन देने वाले पश्चिमी देश जिम्मेदार हैं।

वेनेजुएला उन 53 देशों में से एक है जिसने एस0ए0डी0आर0 की सम्प्रभुसतता को मान्यता दी है। वर्ष 2009 में शावेज ने कहा था कि ”शारोये लोगों की स्वतंत्रता के मुददे पर हमेशा उनका समर्थन करते रहेंगे।” यह समर्थन अब वास्तविक सहयोग में बदल गया है। संभावना इस बात की है कि वेनेजुएला की सहायता एवं सहयोग से इन रिफ्यूजी कैम्पों में रहने वालों के लिये पानी की स्थायी व्यवस्था हो जायेगी। आस्ट्रेलियन यूनियन फार वेस्र्टन सहारा के प्रवक्ता जार्जिया व्लासोपोलोस ने पश्चिमी सहारा रिफ्यूजियों की पानी की समस्या को हल करने के लिये वेनेजुएला को बधार्इ दिया है। वेनेजुएला इन शरणार्थियों की समस्याओं का स्थायी समाधान चाहता है। उसके द्वारा वर्ष 2011 में रिफ्यूजी कैम्पों में पहले हार्इस्कूल के लिये 1 मिलियन अमेरिकी डालर का सहयोग भी दिया गया है। लातिनी अमेरिकी देश अपने सहयोग एवं समर्थन की राजनीति का विस्तार, औपनिवेशिक-साम्राज्यवाद से पीडि़त, अफ्रीकी महाद्वीप में भी कर रहे हैं, ताकि जन-समस्याओं का समाधान और महाद्वीप का वास्तविक विकास संभव हो सके।

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