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जो बीता नहीं, वह दिन हमारे पास है

sahityaनहीं बीता वह दिन
जो अच्छा हो,
वो रातें नहीं बीतीं
जिसके बाद, दिन निकलता है!
समय अंधेरे में बीता, यह सच है,
मगर
उजाले की गहरी चमक है हमारे पास
यह भी तो सच है!

माना,
साजिशों की धार
और हथियारों की नोक पर हम गिरे हैं।
खून और पसीने से तर-ब-तर
दुष्वारियों से हम घिरे हैं,
मगर
सच यह भी तो है
कि हम जिन्दा हैं!
एक साथ हैं!

हम
खदानें खोद रहे हैं
या बिछा रहे हैं सड़कों पर अपनी लाशें,
या खुद को
जमीन की गहरार्इ में रोप रहे हैं
या अंधेरे से गुजर रहे हैं
और उजाले की गहरी चमक हमारे साथ है?
यह तय होना अभी बाकी है!

मगर
यह तय है
कि हम जहां खड़े हैं
उम्मीदें वहीं हैं!
यदि
हम नहीं हैं,
तो दुनिया के पास, उम्मीदें नहीं हैं
क्योंकि
बीता नहीं जो अच्छा दिन, वह हमारे पास है!

-आलोकवर्धन

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