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स्पेन – मंदी से उबरने की सरकारी नीतियां गलत हैं

पिछले साल 8 लाख लोग स्पेन में बेरोजगार हुए थे, और इस साल 5 लाख से ज्यादा लोगों का और बेरोजगार होना तय है। ग्रीस की तरह ही यहां भी बेरोजगारी दर 26 प्रतिशत से ऊपर जा चुकी है, और युवाओं में लगभग 50 प्रतिशत बेरोजगारी है। स्पेनवासियों की नाराजगी अपने चरम पर है। लोग यह मानते हैं कि ”सरकार के द्वारा वित्तीय संकट से उबरने के लिये उठाये गये कदम गलत हैं। उसने अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को ब्रुसेल्स (यूरोपीय संघ का मुख्यालय) में बैठे चंद लोगों के समूह को सौंप दिया है, जो अपने हित और फायदे के लिये इसका उपयोग कर रहे हैं।” और यह बात पूरी तरह गलत भी नहीं है। स्पेन का वित्तीय संकट भले ही उसकी वित्तीय व्यवस्था की उपज है, मगर, उसे बढ़ाने और उसका लाभ उठाने के लिये यूरोपीय संघ, यूरोपीय सेण्ट्रल बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने उसका उपयोग किया है।

10 मार्च को स्पेन की राजधानी मेडि्रड और 60 अन्य शहरों में हजारों लोगों ने सरकार के द्वारा लागू नीतियों और कटौतियों के खिलाफ प्रदर्शन किये। उन्होनें इस बात की आलोचना की कि अयोग्य, अक्षम और भ्रष्ट सरकार यूरोपीय मंदी से स्पेन को बचाने में नाकाम रही है। उसने गलत नीतियों को लागू किया है। इस प्रदर्शन में 150 ट्रेड यूनियन और अन्य संगठनों ने भाग लिया।

मेडि्रड के क्षेत्रीय सरकार ने 20 में से 6 सार्वजनिक अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 10 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करने के निर्णय का प्रस्ताव रखा है। तेजी से बढ़ती बेरोजगारी और सार्वजनिक हितों में की जा रही कटौतियों के प्रस्ताव ने जन असंतोष को बढ़ा दिया है। पिछले महीने 5.04 मिलियन लोगों ने खुद को बेरोजगार लोगों में दर्ज कराया। व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित लोग और युवाओं का पलायन दूसरे देशों में हो रहा है। वो काम के लिये अपना देश छोड़ने को विवश हुए हैं।

स्पेन की अर्थव्यवस्था 2008 के मध्य से ही मंदी की चपेट में है। उस पर 2013 में अपना बजट घाटा 4.5 प्रतिशत पर लाना है और 2014 में उसे घटा कर 2.8 तक लाने का लक्ष्य दिया गया है। जोकि स्पेन की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए संभव नहीं है। वह तेजी से ग्रीस और पुर्तगाल की ओर बढ़ रहा है। स्पेन के लेबर मिनिस्टर ने बताया है, कि अधिकारिक तौर पर पंजिबद्ध बेरोजगारों की संख्या 5 मिलियन से कहीं ज्यादा है। उन्होंने 4 मार्च को आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि ”फरवरी 2013 में 59,444 बेरोजगारों की वृद्धि हुर्इ है। जिन्हें बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार है। स्पेन का सार्वजनिक कर्ज 2012 के अंत में उसके सकल घरेलू उत्पाद का 24.1 प्रतिशत था, जोकि अपने आप में एक नया रिकार्ड है। 2013 में इसके बढ़ने की स्थितियां पहले से ही बन गयी हैं।

14 मार्च को हजारों छात्र एवं शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में की जाने वाली कटौतियों के खिलाफ, प्रदर्शन किये। जिसका आयोजन ‘नेशलन स्टूडेण्ट यूनियन’ ने किया था। स्टूडेण्ट यूनियन की तरफ से जारी घोषणा पत्र में कहा गया है कि ”देश के प्रधानमंत्र मारियानो रेजाय की पुरातनपंथी सरकार ने पिछले साल शिक्षा बजट में 5 बिलियन यूरो -6.5 बिलियन डालर- की कटौती की थी।” उन्होंने कहा है कि ”विश्वविधालयीन शिक्षा शुल्क में दो तिहार्इ की बढ़ोत्तरी की गयी है, और 80,000 शिक्षकों को नौकरी से निकाला गया है।” एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि ”वे विश्वविधालयीन शिक्षा का निजीकरण कर रहे हैं। और खर्च घटाने के लिये एक ही क्लास में ज्यादा से ज्यादा विधार्थियों को पढ़ा रहे हैं।”
कर्ज और निजीकरण का दबाव स्पेन की अर्थव्यवस्था पर है, जो अब राजनीतिक संकट के रूप में भी बदलता जा रहा है। जिस रियल स्टेट में आयी मंदी ने स्पेन की व्यवस्था को यूरोपीय मंदी का हिस्सा बनाया, वह मंदी आज भी जारी है, और उसके साथ अन्य क्षेत्रों का भी निजीकरण किया जा रहा है। यही कारण है कि आम स्पेनवासी अब अपने देश की सरकार ही नहीं यूरोपीय कमीशन के भी खिलाफ हो गये हैं।

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