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पुर्तगाल के 40 शहरों में एक साथ 15 लाख लोग सड़कों पर उतरे

europe2 मार्च को पुर्तगाल के 40 शहरों में लगभग 15 लाख लोगों ने प्रदर्शन किये। प्रदर्शनकारियों ने फासिस्ट तानाशाही के खिलाफ 1974 में गाये गये ”ग्रैनडोला झुलसा हुआ शहर” को गाया। पुर्तगाल की सड़कें ”Who most rules within you, is the people” से गूंज गयीं। यह कारनेशन की क्रांति की शुरूआत थी। जिसने पुर्तगाल से तानाशाही को उखाड़ फेंका था। माना यही जा रहा है कि यह यूरोपीय संघ, यूरोपीयन सेण्ट्रल बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष -ट्रोएका- की वित्तीय तानाशाही के खिलाफ और इनकी शर्तों के आगे झुकने वाली सरकार के खिलाफ क्रांति की शुरूआत है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने पुर्तगात की सरकार के सामने 4 बिलियन यूरो खर्च में कटौती का प्रस्ताव रखा है।

पुर्तगाल की अर्थव्यवस्था में वर्ष 2012 में 3.8 प्रतिशत का संकुचन हुआ है, और 2012 में ही उसके खपत में 5.9 प्रतिशत की कमी आर्इ है, और यही कमी 14.2 प्रतिशत पूंजी निवेश में भी आयी है। जिसका व्यापक प्रभाव बढ़ती हुर्इ बेरोजगारी दर से आंका जा सकता है। वर्ष 2012 से 2013 जनवरी तक 14.8 प्रतिशत से लेकर 17.6 प्रतिशत की वृद्धि हुर्इ है। हाल ही मे ”आर्गनाइजेशन फार इकोनामिक्स को-आपरेशन एण्ड डवलपमेण्ट” द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पुर्तगाल के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में किये जाने वाले खर्च में कटौती को दो गुणा कर दिया गया है। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि प्रस्तावित कटौती का प्रस्ताव ट्रोयेका का है।

आम जनता की नाराजगी बढ़ती हुर्इ बेरोजगारी और हर क्षेत्र में कटौती के नये प्रस्ताव की वजह से है। जिसे पुर्तगाल की सरकार हर हाल में लागू कर रही है। हालांकि पुर्तगाल के हेल्थ मिनिस्टर ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, मगर रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उम्मीद है, कि साल 2013 में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में आने वाले खर्च में कटौती की जाये। उसे घटा कर 5.1 प्रतिशत तक पहुंचाया जाये, जो कि, वर्ष 2010 में सकल घरेलू उत्पाद का 10 प्रतिशत से ज्यादा है।

पुर्तगाल के कामगर वर्ग की स्थिति रोज-ब-रोज बद से बदतर होती जा रही है। गरीब इलाकों में ऐसे बच्चों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो रविवार की छुटटी के बाद सोमवार को स्कूल में बेहोश हो जाते हैं, क्योंकि उनके पास स्कूल में दिये जाने वाले खाने के अलावा खाने के लिये कुछ भी नहीं है।

15 मार्च को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों सीविल कर्मचारियों ने सरकार द्वारा की जाने वाली भयानक कटौतियों की वजह से सरकार को सत्ता छोड़ने की मांग के साथ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन कर्इ यूनियनों ने मिल कर आयोजित किया था। यह प्रदर्शन पुर्तगाल के वित्तमंत्री द्वारा घोषित नयी कटौतियों की घोषणां के चंद घण्टों बाद ही हुआ। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- ”यह समय सरकार के लिये सत्ता छोड़ने का है।” और ”आर्इएमएफ यहां से बाहर जाओ।” प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ”यह मंदी 78 बिलियन यूरो के बेल आउट पाने के लिये सरकार के द्वारा थोपी गयी है। जो खर्चों में कटौती और टैक्सों में बढ़ोत्तरी कर रही है।”

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