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विकास के जरिये समाजवाद, आसान नहीं है

soch ki jameen‘विकास के जरिये समाजवाद’ के जिस अवधारणां को लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों में विकसित किया जा रहा है, वह आसान नहीं है। गये साल पराग्वे में राष्ट्रपति फर्नाण्डो लुगो का जिस तरह वैधानिक तख्तापलट किया गया और वेनेजुएला में, राष्ट्रपति हयूगो शावेज के निधन के बाद, 14 अप्रैल 2013 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों से, यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है, कि जिन वैधानिक रास्तों से होकर समजवादी सरकार की स्थापना की जा सकती है, उन्हीं वैधानिक गलियों और उसके प्रावधानों के जरिये दक्षिणपंथी ताकतों की वापसी भी हो सकती है। वेनेजुएला में यह वापसी नहीं हुर्इ है, लेकिन निधन से पूर्व शावेज के द्वारा उन्हें उपराष्ट्रपति नियुक्त करना और क्यूबा इलाज के लिये जाने से पहले निकोलस मदुरो को अपना उत्तराधिकारी और चुनाव होने की स्थिति में उन्हें अपना समर्थन देने की अपील के बाद भी, जो समर्थन निकोलस मदुरो को मिला है, वह चौंकाने वाला है।

यह बात राष्ट्रपति चुनाव से पहले ही तय था कि मदुरो की जीत सुनिश्चित है। चुनाव पूर्व प्रारम्भिक सर्वेक्षण से भी यही प्रमाणित हो रहा था, कि हार और जीत के बीच भारी अंतर होगा। 10 से 20 प्रतिशत के अंतर का पूर्वानुमान लगाया गया था। लेकिन, चुनाव से ठीक पहले यह अंतर सहसा ही काफी घट गया। चुनाव परिणाम जब सामने आया निकोलस मदुरो को 50.75 प्रतिशत वोट मिले और विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार हेनरिक कैप्रिलस को 48.98 प्रतिशत वोट मिले।

वेनेजुएला में कुल 19 मिलियन -1 करोड़ 90 लाख- मतदाता हैं। 78 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मतदान किये। 3 लाख से भी कम -2 लाख 34 हजार- मतों से मदुरो की जीत हुर्इ। जीत का अंतर इतना कम है, कि विपक्ष के कैप्रिलस ने, पहले चुनाव के परिणाम को मानने से इंकार कर दिया। बाद में पुर्न मतगणना की मांग की। दूसरी बार मतगणना शुरू हुर्इ। वर्तमान राष्ट्रपति चुनाव, 3000 राष्ट्रीय पर्वेक्षक और 240 अंतर्राष्ट्रीय पर्वेक्षकों की निगरानी में हुआ। वैसे भी वेनेजुएला के चुनाव प्रणाली को दुनिया के सबसे अच्छे चुनाव प्रणाली के रूप में माना जाता है। मगर सवाल जो पहले था, वही अब भी है, कि जीत का अंतर इतना कम क्यों है? इसे हम वेनेजुएला में शावेज और समाजवाद की सफलता या असफलता से जोड़ कर नहीं देख सकते।

”जनवाद के बिना समाजवादी क्रांति सफल नहीं हो सकती” लेनिन कहा करते थे। उन्होंने अपने एक परिपत्र में लिखा था- ”समाजवाद सभी राष्ट्रों में आयेगा- यह अनिवार्य है। लेकिन यह सभी जगह एक ही तरीके से नहीं आयेगा। जनवाद और सर्वहारा के अधिनायकत्व के किसी-किसी या कर्इ रूपों में, ये राष्ट्रवाद अपना योगदान देंगा।” वे क्रांति और समाजवाद को, ऐतिहासिक भौतिकवाद के नाम पर, एक ही रंग में रंगने को अज्ञानता और व्यावहारिक रूप में हास्यास्पद मानते थे। लातिनी अमेरिकी देशों का समाजवाद, क्रांति और वैधानिक पद्धति से, राज्य की आम जनता के पक्ष में, उसके हितों से जोड़ने का समाजवाद है। जिसमें नेतृत्व और जनवाद की भूमिका बड़ी है। यह सर्वहारा वर्ग की तानाशाही को बिना, समाज के बहुसंख्यक वर्ग के लिये, समाजवादी कार्यक्रमों के जरिये समाजवाद का निर्माण है, या यूं कहें कि समाजवादी समाज के निर्माण की प्रक्रिया है। वैसे भी समाजवादी क्रांति निर्माण की सतत प्रक्रिया ही होती है।

सर्वहारा वर्ग की तानाशाही समाजवाद के निर्माण के लिये पूंजीवादी समाज व्यवस्था के अवशेषों को सख्ती से मिटाने की कार्यवाही है। इसी दौरान निजी सम्पतित का राष्ट्रीयकरण होता है, और राज्य समाज की जिम्मेदारियों को पूरी तरह संभाल लेता है। शोषक वर्ग के अधिकारों का अंत हो जाता है। श्रमजीवी वर्ग सही अर्थों में अपने ऐतिहासिक दायित्वों को संभाल लेता है।

पश्चिमी प्रचारतंत्र हयूगो शावेज को तानाशाह करार देती रही है, किंतु उन्होंने वेनेजुएला के नये संविधान के जरिये देश की आम जनता को जो निर्णायक अधिकार दिये हैं, जितनी आर्थिक एवं राजनीतिक शक्तियां दी है, अपने को जनतंत्र कहने वाली किसी भी पूंजीवादी देश की आम जनता के पास यह अधिकार नहीं है।

वेनेजुएला का आम बजट, वास्तव में देश की आम जनता ही पास करती है, सरकार प्रस्तावक और उसकी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणां करने वाली इकार्इ की तरह है। बजट बनाती सरकार है, मगर आम जनता की स्वीकृति के बिना, वह उसे पारित नहीं कर सकती।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है, किंतु तब, जब 3 साल बाद आम जनता उसे वापस नहीं बुलाना चाहे। यदि देश की आम जनता को यह लगता है, कि निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित समाजवादी नीतियों और आदर्शों के विरूद्ध काम कर रहे हैं, तो आम जनता उन्हें तीन साल बाद वापस बुला सकती है।

शावेज के रहते -कर्इ आर्थिक एवं सामाजिक विसंगतियों के बाद भी -दक्षिणपंथी ताकतें, संविधान के इन प्रावधानों का राजनीतिक लाभ नहीं उठा पाती थीं, क्योंकि 23 में से 20 राज्यों का समर्थन उन्हें हासिल था। आज स्थितियां थोड़ी सी बदल गयी हैं, और हेनरिक कैप्रिलस ने ”राजनीतिक अवरोध” पैदा करने की घोषणां भी की है। हम यह भी मान सकते हैं, कि आज वेनेजुएला में जो हो रहा है, दक्षिणपंथी ताकतें जो कर रही हैं, और निकोलस मदुरो की सरकार जो करना चाह रही है, वह अप्रत्याशित नहीं है, ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि, पूंजीवादी ताकतें पलटवार नहीं करेंगी, ऐसा हो नहीं सकता। यह पलटवार हो चुका है और मदूरो की सरकार से ज्यादा वेनेजुएला की और लातिनी अमेरिका की आम जनता की जिम्मेदारी है, कि वह अपनी उपलबिधयों को बचाने के लिये निर्णायक संघर्षों की शुरूआत करे, निर्मम मगर संतुलित प्रहार करे।

हमारा यकीन लातिनी अमेरिका और वेनेजुएला की आम जनता और वहां के समाजवादी देशों पर है। यह दौर इस बात को समझने का है, कि किसी भी देश का निर्माण सामूहिक शक्ति के बिना संभव नहीं है। समाजवादी एकजुटता ही हमारा हथियार है। और हम यह मानते हैं, कि वेनेजुएला अकेला नहीं है। हम यह भी मानते हैं, कि क्यूबा लातिनी अमेरिका में है, और फिदेल कास्त्रो भी हैं। और यह होना विकास के जरिये समाजवाद की मुश्किलों को सुलझाने की सोच देती है, कि सामाजिक विकास की दिशा का समाजवादी होना पहली शर्त है। आम जनता के बीच आम जनता के साथ होने के अलावा हमारे पास और कोर्इ विकल्प नही है। आज पूरे महाद्वीप और पूरी दुनिया के बारे में सोचे बिना एक देश का निर्माण नहीं किया जा सकता। हमारी नीतियां सामूहिक ही होनी चाहिये, हम अपने घरों में जैसे हैं, हमें बाहर भी वैसे ही होना चाहिये। राजनीति साफ सुथरी नहीं है, और अपने को ढंक कर जीने वालों की भी कमी नहीं है, मगर, हमें अपने चेहरे पर नकाब डालने की जरूरत, अब नहीं है। कभी यह जरूरत थी, मगर अब नहीं है, स्थितियां अब खुलेआम हो गयी हैं।

सामाजिक विकास की दिशाओं को अवरूद्ध करने वाली ताकतें हमेशा से रही हैं। यह सामाजिक विकास की स्वाभाविक अवस्था है, आज अमेरिकी साम्राज्य और पश्चिमी देशों की सरकारें ही नहीं, दुनिया में बन रहे रूस और चीन के विकल्पों की दुनिया भी वैश्वीकरण और मुक्त बाजारवाद के इर्द-गिर्द घूम रही है। इसलिये, कहा जा सकता है कि सही विकल्प लातिनी अमेरिकी देशों में ही बन रहा है। और क्यूबा के बाद, वेनेजुएला ने विश्व की आम जनता को आकर्षित किया है। इसलिये, वेनेजुएला पर किया गया कोर्इ भी हमला, समाजवाद के बनते विकल्पों पर किया गया हमला होगा, और हम जानते हैं कि यह हमला होगा। इस हमले का होना तय है। यह हमला हो रहा है।

सोवियत संघ के निर्माण के दौरान, लेनिन के असामयिक निधन के बाद, स्टालिन के सामने जो स्थितियां थीं, भले ही वो स्थितियां मदुरो के सामने पूरी तरह नहीं है। मगर वह खतरों से परे नहीं है। मुश्किलें हैं। किसी भी देश में एक नयी समाज व्यवस्था का निर्माण करने के लिये 14 साल का समय जरूरत से ज्यादा कम है, जोकि हयूगो शावेज को मिला। और जिन्हें अमेरिकी तख्तापलट का सामना भी करना पड़ा। उन स्थितियों का सामना करना पड़ा जिन स्थितियों ने अमेरिकी साम्राज्य और उसकी वैश्विक वित्त व्यवस्था को हिला कर रख दिया। यूरोप की सड़कें प्रदर्शनकारियों से भर गयीं। टयूनीसिया से शुरू हुआ आंदोलन अरब जगत ही नहीं, एशिया और अफ्रीका में प्रदर्शनों की नयी सोच भर गयी।

सोच के सामने नयी मुश्किलें भी खड़ी हुर्इं। लीबिया का तमाचा विश्व जनमत को पड़ा। मगर यह तमाचा अमेरिकी साम्राज्य और यूरोपीय देशों के गालों पर आज भी पड़ रहा है। तीसरी दुनिया के देश पसीने से लथपथ और लहूलुहान हैं, मगर पश्चिमी ताकतों के पांव के नीचे की जमीन खिसकती जा रही है। विश्वव्यापी मंदी ने यह समझा दिया है कि ”जनाब, बाजार के मुक्त होने से सरकारों की कमर टूट जाती है। निजीकरण हमारी समस्याओं का समाधान नहीं है। भूख, गरीबी और बेरोजगारी का समाधान नहीं है। वित्तीय पूंजी का वर्चस्व राज्य को बौना बनाने की साजिश है।” और हम इन साजिशों के शिकार हैं। वैश्वीकरण अमेरिकी मनमानी है। शैतान की तेजाबी गंध और युद्ध की आशंकाओं के बीच आम आदमी के दम घुटने का खतरा है। हम खतरों से घिरे हैं। यह खतरा आभी घटा नहीं है, वेनेजुएला इस बात का प्रमाण है, जहां वैधानिक हमलों के साथ तख्तापलट की साजिशें चल रही हैं।

वेनेजुएला इस बात का प्रमाण है, कि आम जनता अपने ही विरूद्ध रची गयी साजिशों का शिकार हो जाती है। मगर हम आम जनता पर यकीन करना बंद नहीं कर सकते। और यह अच्छी बात है, कि वेनेजुएला की नयी सरकार ने कहा है कि ”हमें आम जनता के साथ, सड़कों पर होना चाहिये।” उसने पूर्व राष्ट्रपति शावेज के प्रति ही नहीं, समाजवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शायी है। उसने घोषणां की है कि ”नयी सरकार का लक्ष्य समाजवादी सामर्थ को हासिल करना है।” उसने लोकतांत्रिक क्रांति के लिये कम्युनिटी कांउसिल और कम्यून के निर्माण और सोशलिस्ट माडल आफ लीविंग की ओर बढ़ने के लिये, सरकार से ज्यादा आम जनता के प्रति अपना यकीन जाहिर किया है।

यह अच्छी बात है कि आम जनता के साथ वेनेजुएला के विकास और समाजवादी समाज के निर्माण को लातिनी अमेरिकी महाद्वीप के देशों के विकास के साथ जोड़ कर देखा जा रहा है।

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