Home / विश्व परिदृश्य / यूरोप / इटली में जारी राजनीतिक अस्थिरता

इटली में जारी राजनीतिक अस्थिरता

europe”हम ऊब गये हैं, पुराने राजनीतिक बिरादरी से।”

यूरोप की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की हालत बुरी है। आम जनता की नाराजगी और राजनीतिक गतिरोध अब, राजनीतिक संकट में बदल गया है। 6 बार के चुनाव के बाद भी एक राष्ट्रपति नहीं चुना जा पाता और संसद में किसी भी राजनीतिक दल के पास बहुमत नहीं है, कि वह सरकार बना सके। फरवरी 2013 से कार्यकारी सरकार काम कर रही है, और लोग कह रहे हैं- ”हम ऊब गये है, पुराने राजनीतिक बिरादरी से।” क्योंकि इस बिरादरी के मुखौटे तो अलग-अलग हैं, मगर उसके भीतर की सूरत एक है। और लोग सूरत बदलना चाहते हैं।

इटली कार्यकारी काम चलाऊ सरकार ने निर्णय लिया है, कि इटली की सरकार पर निजी कम्पनियों के जो 40 बिलियन यूरो का कर्ज है, उसे आनेवाले 12 महीनों में, उन कम्पनियों को, भुगतान कर दिया जाये।” 6 अप्रैल को लिये गये इस निर्णय का उददेश्य है, कि ”रूकी हुर्इ अर्थव्यवस्था में फिर से तरलता लाना, ताकि नये सिरे से काम की शुरूआत हो सके।”

कार्यकारी प्रधानमंत्री मारियो मोण्टी ने कहा कि ”कर्ज का भुगतान न करना, हमारी बुरी आदत बन गयी थी, जिसका प्रभाव उन निजी कम्पनियों पर काफी बुरा पड़ रहा था, जिनका कर्ज हम पर बचा था।” उन्होंने आगे कहा कि ”स्टेट सप्लायरों के भुगतान में देरी स्वीकार की जाने वाली स्थिति नहीं है, जो काफी दिनों से बनी हुर्इ थी।

सरकार की इस नीति का प्रभाव उसकी अर्थव्यस्था में तरलता ला पायेगी या नहीं? यह सवाल है, लेकिन यह तय है, कि इतनी बड़ी धनराशि को एक ऐसी वित्त व्यवस्था के लिये कठिन है, जो पहले से ही लड़खड़ा रही है, और इस बात की आशंकायें रोज बढ़ती जा रही हैं, कि वह भी ग्रीस और पुर्तगाल की कतार में खड़ा होने वाला है, जिन्हें बेल आउट पैकेजों की जरूरत पड़ती रहती है।

सरकारी अनुमान के अनुसार साल 2012 में इटली के परिवारों के आय में, भारी कमी दर्ज की गयी है, और आने वाले दिनों में स्थितियों का और भी बिगड़ना तय है। इटली की नेशनल स्टेटिसटिक्स एजेन्सी र्इसतात ने 9 अप्रैल को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार इटली के परिवारों के खरीद करने की क्षमता में 4.8 प्रतिशत की कमी आयी है। जो 1990 के बाद से सबसे बुरी स्थिति है। इस बारे में उपभोक्ता समूह की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों के लिये यह नाटकीय स्थिति है, तो कुछ लोगों का मानना है, कि ऐसी स्थिति के लिये 2002 में ‘यूरो’ को अपनी मुद्रा के रूप में स्वीकार करना है।

यूनार्इटेड नेशन चिल्ड्रन फण्ड -यूनिसेफ- के एक तात्कालिक रिपोर्ट के अनुसार इटली के लगभग 2 मिलियन बच्चे गरीबी में जी रहे हैं। विकसित देशों में बच्चों की स्थिति पर जारी इस रिपोर्ट में यूरोजोन की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश 29 देशों में 22वें स्थान पर है। इटली के 17 प्रतिशत बच्चे गरीबी की सीमारेखा के नीचे जी रहे हैं, मतलब 1.8 मिलियन बच्चों के पास खाना जैसे मूलभूत जरूरत की पूर्ति के साधन नहीं हैं।

16 अप्रैल को इटली के 3 बड़े यूनियनों ने पार्लियामेण्ट के सामने देश में कामगरों की बिगड़ती हुर्इ स्थितियों को लेकर प्रदर्शन किये। थोड़े समय के लिये सस्पेण्ड किये गये कामगरों के लिये सरकार से ‘स्टेट फण्ड’ में पैसे डालने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि 7,00,000 बेरोजगार कामगरों के लिये साल के अंत तक ‘गारण्टी पेमेण्ट’ की व्यवस्था की जाये, उन्होंने 1 बिलियन यूरो की मांग की।

बढ़ती हुर्इ बेरोजगारी, गिरता हुआ लोगों का जीवनस्तर, घटती आये और बढ़ती समस्याओं के साथ इटली की आम जनता राजनीतिक अस्थिरता की भी परेशानियां झेल रही है। पार्लियामेण्ट के सदस्यों ने देश के राष्ट्रपति चुनाव में 5 बार मतदान करने के बाद भी किसी को राष्ट्रपति चुनने में नाकाम रहे। छठे दौर में मतदान का परिणाम यह निकला, कि पूर्व राष्ट्रपति जिर्योजियो नापोलितानो को दूसरी बार राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार कर लिया गया, जिसे देश की आम जनता स्वीकार नहीं करना चाहती।

20 अप्रैल को रोम में वहां की लोवर हाउस के सामने 5 स्टार मोमेण्ट ने जन प्रदर्शन का आयोजन किया। जो यह मानती है कि ”राष्ट्रपति चुनाव एक तरह का तख्ता पलट हैं 5 स्टार मोमेण्ट के नेता ग्रीलो ने कहा- ”सभी परम्परागत राजनीतिक दल देश में यथास्थिति बनाये रखने के लिये इन राजनीतिक दलों ने आपसी सहमति बना ली है, बंद दरवाजे के पीछे समझौता हो गया है, कि इटली में कोर्इ परिवर्तन होने नहीं दिया जायेगा। वो गठबंधन की सरकार बना कर यही करना चाहते हैं।” भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच नये राष्ट्रपति ने उम्मीद जाहिर की है, कि देश को वित्तीय संकट से बाहर निकाल लिया जायेगा।” उन्होंने सभी दलों से एक गठबंधन सरकार बनाने की बात भी की। उन्होंने सेण्टर-लेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी के एनरिको लेत्ता को संयुक्त सरकार बनाने के लिये नामित किया है। कहा यही जा रहा है, कि ”फरवरी से जारी राजनीतिक गतिरोध अब समाप्त हो जायेगा”, लेकिन ऐसा न होने की स्थितियां ज्यादा हैं।

इटली की इस राजनीतिक अस्थिरता ने यूरोपीय देशों को डरा दिया है। निवेशकों ने भी चेतावनी दी है कि इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी। उन्होंने जल्द से जल्द कुछ करने की अपील की है।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top