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स्पेन और स्लोवानिया में बढ़ता वित्तीय असंतुलन

यूरोपीय संघ ने चेतावनी दिया है कि ”स्पेन और स्लोवानिया की अर्थव्यवस्था मंदी और बेरोजगारी के बीच उलझ गयी है।” उसने चंद हफ्तों में ही इस असंतुलन को दूर करने का निर्देश दिया है। उसने कहा है कि ”ये दोनों देश सबसे बड़े आर्थिक खतरों से घिरे हैं। उन्हें चाहिये कि वो अपने आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिये बैंकिंग सेक्टर को ठीक करें।”

बैंकों और वित्तीय इकार्इयों के भरोसे मंदी से उबरने और अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिशें होती रही हैं। यूरोपीय संघ की ऐसी कोशिशें आज तक सफल नहीं हो सकी हैं -खास कर उस देश और उस देश की आम जनता के हित मे। इसके बाद भी ऐसी कोशिशें जारी हैं।

यूरोपीय संघ ने स्पेन के संदर्भ में कहा है कि अप्रैल के अंत तक स्पेन को एक सुधार कार्यक्रम को पेश करना है। उसके सामने कर्ज का संकट विकास दर में कमी और वित्तीय विकास की समस्या है। वह असंतुलन का शिकार है। यूरोपीय संघ ने स्वीकार किया है कि स्पेन और स्लोवानिया के अलावा 11 अन्य सदस्य देश आर्थिक असंतुलन (माइक्रो-इकोनामी) से ग्रस्त है। ये देश हैं- बेलिजयम, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ्रांस, इटली, हंगरी, माल्टा, निदरलैण्ड, फिनलैण्ड, स्वीडन और बि्रटेन। यूरोपीय संघ के नये नियम के अनुसार ”इन 13 सदस्य देशों को अपनी समस्या से उबरने के लिये किये जाने वाले उपायों की जानकारी यूरोपीय संघ के मुख्यालय- बु्रसेल्स को, लिखित रूप में देनी है, ताकि उसे स्वीकृति दी जा सके।”

इस नियम के अंतर्गत अब यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लेना चाहता है। वह अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करने और उन्हें एक ही सांचे में ढ़ालने का प्रयत्न कर रहा है। समस्या और समाधान की निश्चित रूपरेखा बनाना ही उसका लक्ष्य है।

21 अप्रैल को स्पेन के स्वास्थ्य कर्मचारी और उनके समर्थकों ने, मेडि्रड में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। वो स्वास्थ्य सेवा के निजीकरण और कटौतियों का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारी ”निजीकरण के लिये कुछ नहीं है” के नारे लगा रहे थे। उन्होंने मुख्य हास्पीटल से लेकर प्लाजा डि सोल स्क्वायर तक मार्च किये। जिसमें 70,000 लोगों ने भाग लिया। मगर पुलिस सूत्रों का मानना है कि 3000 से 5000 लोगों ने भाग लिया था। स्पेन की आम जनता यूरोपीय संघ और निजीकरण के खिलाफ है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2013 की पहली तिमाही में यहां बेरोजगारी दर 27.16 के नये रिकार्ड तक पहुंच गयी है। 25 अप्रैल को स्पेन के नेशनल स्टेटिसटिक्स इंस्टीटयूट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारों की संख्या 6 मिलियन के आंकड़े को पार कर 6.2 मियिलन हो गयी है। स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो रिजाय ने कहा है कि ”यह साल काम के अवसर के लिये खास अच्छा नहीं रहेगा। मगर यह पिछले साल के मुकाबले कम बुरा होगा।” स्पेन का युवा बेरोजगारी दर 57.22 प्रतिशत के आंकड़े को छू चुका है। 62,027,000 मजदूर बेरोजगार हैं। इनमें से 3.5 मिलियन कामगर पिछले 1 साल से बेरोजगार हैं। 2 मिलियन कामगर पिछले दो सालों से ज्यादा समय से बेरोजगारी झेल रहे हैं। यह दर और भी ज्यादा होती, मगर 2,80,000 युवा काम की तलाश में स्पेन से बाहर जा चुके हैं। 2008 से अब तक स्पेन 4 मिलियन नौकरियां गवां चुका है और बेरोजगारी दर में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुर्इ है।

स्पेन की बिगड़ती अर्थव्यवस्था का बढ़ता संकट, खतरे के निशान को पार कर चुकी बेरोजगारी दर और क्षेत्रीय विभाजन की आशंकाओं के बीच 19 अप्रैल को स्पेन की सरकार ने एक साल के लिये अमेरिकी सेना की तैनाती के प्रस्ताव की अपनी स्वीकृति दे दी। स्पेन ने अपने दक्षिण-पश्चिम प्रांत के मोरोन डि ला फ्रानटेरा शहर के एयरबेस में 500 अमेरिकी नौसैनिक और 8 एयरक्राफ्ट तैनात रहेंगे। मेडि्रड के अमेरिकी दूतावास ने कहा कि ”उत्तर पश्चिमी अफ्रीका के संकट के दौरान जल्द से जल्द कार्यवाही के लिये हमें फोर्स की जरूरत थी।”

अमेरिकी सेना के अफ्रीकन कमाण्डेन्ड के प्रमुख जनरल डेविड राड्रीगेज़ ने 14 फारवरी को अमरिकी सीनेट में कहा था कि ”अमेरिकी सेना को अफ्रीका में अपने खुफिया कार्यवाहियों को चलाने के लिये, लगभग 15 गुणा गुप्त एजेन्टों को बढ़ाने की जरूरत है।”

इससे पहले भी मार्च से नवम्बर 2011 में स्पेन ने अमेरिकी सेना के 45 एयरक्राफ्ट को रूकने की स्वीकृति दी थी।

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