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वेनेजुएला की नयी सरकार, राष्ट्रपति निकोलस मदुरो

latine america (2)शावेज के असामयिक निधन का लाभ संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करके, वैधानिक तख्तापलट के रूप में, उठाना चाहता है। विपक्ष के राष्ट्रपति चुनाव में पराजित उम्मीदवार कैप्रिलस ने न सिर्फ अपने पराजय को मानने से इंकार कर दिया है, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिये प्रदर्शन, तोड़-फोड़ और हिंसक कार्यवाहियों का भी सहारा ले लिया है। वेनेजुएला के चुनाव प्रणाली, चुनाव आयोग -नेशनल इलेक्शन कांउसिल- 3000 राष्ट्रीय एवं 240 अंतर्राष्टीय पर्वेक्षकों के निर्णय को इसलिये अस्वीकार कर दिया है कि निकोलस मदुरो को 50.75 प्रतिशत वोट मिले हैं, और उन्हें 48.98 प्रतिशत। कुल मतदान 78 प्रतिशत से अधिक हुआ और निकोलस मदुरो 2 लाख 34 हजार मतों से जीत गये।

कैप्रिलस के पीछे अमेरिका है। अमेरिका के राजदूत विहीन दूतावास में साजिशें रची जा रही हैं। सवाल खड़े किये जा रहे हैं।

आर्इये! वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुनाव के आंकड़ों के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के आंकड़ों को देख लें। जहां साल भर के चुनाव प्रचार और प्रचार घमासान के बाद भी मात्र 42.3 प्रतिशत अमेरिकी मतदाताओं ने मतदान किया और 57.7 प्रतिशत मतदाताओं ने राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं किया। जिसमें डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बराक ओबामा को 49.85 प्रतिशत और रिपबिलकन मिट रोमनी को 49.29 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इस तरह देखा जाये तो अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति को 21 प्रतिशत से जयाद और 22 प्रतिशत से कम लोगों का समर्थन हासिल है। वास्तव में पूरी चुनावी प्रक्रिया और उसके परिणामों को आम अमेरिकी मतदाताओं ने खारिज कर दिया है।

पराजित प्रत्याशी केप्रिलेस ने पुर्न मतगणना की मांग की। जिसे कांउसिल ने स्वीकार कर लिया। 54 प्रतिशत पुर्न मतगणना में एक भी गल्ती नहीं मिलने और अपनी हार तय देखकर, उन्होंने पुर्न मतगणना परिणाम को अस्वीकार कर दिया। मतगणना रोक दी गयी। उन्होंने अव्यवहारिक मांग रखी कि एक-एक प्रत्याशी की शिनाख्त के साथ मतगणना की जाये। उनके फिंगर प्रिंट की जांच हो। मतलब, कांउसिल सिर्फ विपक्ष को संतुष्ट करती रहे। वेनेजुएला की चुनाव प्रणाली के अनुसार फिंगर प्रिंट से पहचान होने के बाद ही मतदाता मत दे पाता है। जिसका सीधा सा अर्थ निकलता है, कि मतदान में गड़बडियां संभव नहीं हैं।

15 अप्रैल को विपक्ष द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान झड़पों में 9 लोगों की मौत हो गयी और 61 लोग घायल हुए। अधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार वेनेजुएला के कर्इ शहरों में प्रदर्शन हुए, उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया और टायर जलाये। उन लोगों की सुरक्षा सेना के साथ झडपें हुर्इं। देश की राजधानी काराकस में चेहरे पर मुखौटा पहनले लोग विपक्ष के समर्थन में नारे लगा रहे थे। पत्थरबाजी की गयी। पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियां चलार्इ।

निकोलस मदुरो ने कहा- ”मान लें कि विपक्ष जो कर रही है, हम भी वही करने लगें और लोगों से, हथियारों से लैस सेना से सड़कों पर उतरने की अपील करें, तो क्या होगा? कितने लाख लोग सड़कों पर होंगे?” मदुरो की इस चेतावनी को गंभीरता से लिया गया। विपक्ष इस बात को समझ गयी, कि मिली हुर्इ छूट का गलत उपयोग उनके लिये अब घातक हो सकता है। उन्होंने कहा- ”हम इस संकट को चंद घण्टों में ही खत्म करने के लिये, सरकार से वार्ता करना चाहते हैं।” मगर उन्होंने अपने प्रेस कांफ्रेन्स में मदुरो और सरकार पर आरोप लगाना जारी रखा।

बोलेविया के राष्ट्रपति र्इवो मोरालिस ने 16 अप्रैल को कहा कि ”अमेरिका वेनेजुएला में तख्तापलट की योजना बना रहा है।” उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुनाव परिणाम पर वाशिंगटन द्वारा सवाल उठाने को देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुए, एक प्रेस कांफ्रेन्स में कहा कि ”वाशिंगटन के इन सवालों का कोर्इ मतलब नहीं है। व्हार्इट हाउस को दुनिया भर के चुनाव परिणामों पर सवाल उठाने का कोर्इ अधिकार नहीं है।” निकोलस मदुरो ने भी संयुक्त राज्य पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर तख्तापलट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- ”यह खुले तौर पर वेनेजुएला के लोकतंत्र में हस्तक्षेप है।” उन्होंने कहा- ”ना ही किसी प्रवक्ता को, ना ही अमेरिकी सरकार को यह अधिकार है, कि वह लातिनी अमेरिका के किसी देश या दुनिया के किसी भी देश के चुनाव परिणामों पर सवाल करे।”

latine america (3)19 अप्रैल को निकोलस मदुरो ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। नेशनल असेम्बली में असेम्बली के प्रेसिडेण्ट दिओसदादो कैबेलो ने शपथ दिलार्इ। शपथ लेते हुए उन्होंने कहा- ”मैं, वेनेजुएला के सभी लोगों और सुप्रिम कमाण्डर हयूगो शावेज में विश्वास रखते हुए शपथ लेता हूं कि ‘मैं, ‘कन्स्टीटयूशन आफ द लास आफ द रिपबिलक’ संविधान का पालन करते हुए, सभी के लिये आत्मनिर्भर, स्वतंत्र और समाजवादी राष्ट्र का निर्माण करूंगा।’ ”

इस शपथ ग्रहण समारोह में 61 देशों के प्रतिनिधियों सहित कर्इ सम्मानित लोगों ने भाग लिया। राष्ट्रपति के रूप में मदुरो ने अपने पहले वक्तव्य में चुनाव के दौरान और उसके बाद घटी घटनाओं का उल्लेख किया। विपक्ष समर्थकों द्वारा क्यूबा के डाक्टरों पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने देश के उन लोगों की ओर भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया, जो किन्हीं कारणों से उन्हें अपना समर्थन नहीं दे सके। उन्होंने उनसे शांति की मांग की। उन्होंने सरकार की क्षमता को आम लोगों के हितों को बढ़ाने, बढ़े हुए सामाजिक एवं आर्थिक अपराधों को घटाने, उन्हें स्थायी रूप से हल करने का विश्वास दिलाया।

उन्होंने वेनेजुएला के लिये एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा भी कि ”2019 तक वेनेजुएला में गरीबी दर शून्य करने का लक्ष्य है।” उन्होंने कहा कि ”2019 तक गरीबी दर को शून्य के स्तर तक ले जाने के लिये सामाजिक कार्यक्रमों को जारी रखा जायेगा और गरीबी के विरूद्ध कुछ अन्य महत्वपूर्ण कदम भी उठाये जायेंगे।”

अंत में उन्होंने जनतांत्रिक क्रांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि ”जनतांत्रिक क्रांति को आगे बढ़ाने के लिये कम्युनिटी कांउसिल और कम्यूनों पर काम किया जायेगा और सोसलिस्ट मोड आफ लिविंग की ओर कदम बढ़ाये जायेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि ”यह सब सिर्फ सरकार के द्वारा नहीं किया जा सकता है, यह लोगों (समाज) के द्वारा किया जाने वाला काम है।” शावेज ने अपनी प्रतिबद्धता समाज के सबसे कमजोर वर्ग और समाज के प्रति ही व्यक्त की थी।

जिस दिन शपथ ग्रहण समारोह हुआ, वह दिन वेनेजुएला की स्वतंत्रता का 203वां स्वतंत्रता दिवस भी था।

इस शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष ने भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ”जब तक पुर्न मतगणना सौ प्रतिशत नहीं हो जाती, तब तक वह इसके परिणाम को स्वीकार नहीं करेंगे।” विपक्ष ने शपथ ग्रहण समारोह को नेशनल असेम्बली में ना होने देने के लिये आवेदन दिया था, जिसे 18 अप्रैल को कोर्ट ने यह कह कर खारिज कर दिया कि ”चुनाव परिणामों को चुनौती नेशनल इलेक्शन कांउसिल के माध्यम से ही दी जा सकती है।” जो कि नहीं किया गया है। उसने स्पष्ट कर दिया, कि इसका नेशनल असेम्बली से कोर्इ संबंध नहीं है। विपक्ष अपनी वैधानिक लड़ार्इ, चुनाव की तरह ही हार चुकी है, मगर वह ऐसे मुददों को खड़ा रखना चाहती है, कि राजनीतिक अनिश्चयता बनी रहे और वह यह प्रचारित करती रहे कि ”वेनेजुएला की वर्तमान सरकार अवैधानिक सरकार है।” वह अंतर्राष्ट्रीय रूप से यह प्रचारित करने में लगी है कि कांउसिल, कोर्ट और प्रशासनतंत्र निकोलस मदुरो की समर्थक है। वो इस मुददे को लातिनी अमेरिका में संयुक्त राज्य अमेरिकी समर्थक संगठन ‘आर्गनाइजेशन आफ अमेरिकी स्टेटस’ में उठाने की तैयारी में लगे हैं। जिसने शावेज के चुनाव परिणामों को भी विवादित बनाने की नाकाम कोशिशें की थी।

22 अप्रैल को राष्ट्रपति मदुरो ने अपने कैबिनेट की घोषणां की। उन्होंन कैबिनेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि ”नयी सरकार का लक्ष्य है समाजवादी सामथ्र्य को हासिल करना।” केबिनेट में 17 मंत्री ऐसे हैं, जो सामाजिक क्षेत्रों में काम करने के लिये जाने जाते हैं। शावेज ने जिसकी पहल की थी, मदुरो उसे ही सही अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। राजनीति को ऊंचे भवनों और बंद कमरे से निकाल कर आम जनता के साथ आम जनता के बीच पहुंचाना ही उनका मकसद है। उन्होंने कहा कि ”हम सचेत हैं। हम बोलिवेरियन क्रांति की नयी शुरूआत कर रहे हैंं। हमें उसके नवीनीकरण की जरूरत है। ताकि सभी वैचारिक, राजनीतिक, संगठनात्मक और रणनीतिक ताकतों को पुर्नजीवित किया जा सके।” उन्होंने शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ”सरकार का नया कार्यकाल आम जनता के साथ सड़कों पर होना है।”

उन्होंने उन लोगों को भी संदेश दिया जो क्रांतिकारी कार्यक्रमों के विरोधी हैं। उन्होंने बोलिवेरियन वार्ता के पहल की बात की। उन्होंने कहा- ”मैं उन कारणों को सुनना और जानना चाहता हूं। मगर बुजर्ुआ वर्ग के साथ यहां कोर्इ समझौता नहीं होगा। यहां पूरे देश के साथ वार्ता होगी।”

सरकार ने 2013-19 तक के अपने कार्यकाल में उन समाजवादी कार्यक्रमों को ही कार्यरूप में बदलने का काम करेगी, जो गये साल शावेज के द्वारा प्रस्तावित था। इसके अलावा उत्पादन पर आधारित अर्थव्यवस्था, विधुत व्यवस्था को विकसित करना तथा सामाजिक लक्ष्य का निर्धारण करना। जमीनी रूप से जुड़ कर नयी शकित और समाजवादी जीवन पद्धति का निर्माण करना।

अपने कार्यक्रमों, सामाजिक एवं राजनीतिक उददेश्यों की दृषिट से वेनेजुएला की नयी सरकार शावेज के उददेश्यों से अलग नहीं है। वह उन्हीं के अधूरे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के संकल्प से जुड़ी हुर्इ है, इसके बाद भी सच यह है कि शावेज के बाद का वेनेजुएला राजनीतिक अस्थिरता, सामाजिक असंतुलन और आर्थिक पुर्ननिर्माण के बीच खड़ा है। स्थिरयां पूरी तरह पक्ष में नहीं हैं। विकास के जरिये समाजवाद के निर्माण की प्रक्रिया जटिल हो गयी है। और यह स्वाभाविक है। शावेज की स्थिर वेनेजुएला में परिवार के पिता और बेटे की थी। मदुरो सामूहिक रूप से उस जगह को पाने में लग गये हैं। उन्होनें आम जनता से सरकार को जोड़ने और सरकार को आम जनता के बीच खड़ा करने के लिये वेनेजुएला के हर एक क्षेत्र की यात्रा शुरू कर दी है। जनसमस्याओं से जुड़ने, उनका समाधान करने और समाजवादी कार्यक्रमों को आम वेनेजुएलावासियों तक पहुंचाने की योजना को कार्यरूप में बदला जा चुका है।

latine america (4)वेनेजुएला के आने वाले कल के साथ लातिनी अमेरिकी देशों और विकास के जरिये समाजवाद की अवधारणां का आने वाला कल जुड़ा है। राष्ट्रपति के रूप में, क्यूबा की यात्रा कर उन्होंने यह जता किया है कि शावेज के बाद वेनेजुएला की सम्बद्धता लातिनी अमेरिकी देशों से शावेज की सम्बद्धता ही होगी।

27-28 अप्रैल को उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा, राष्ट्रपति के रूप में, क्यूबा की की। क्यूबा और वेनेजुएला के बीच 51 द्विपक्षीय समझौते किये गये। ये समझौते ऊर्जा एवं सामाजिक कार्यक्रमों के अंतर्गत किये गये हैं। जिनमें स्वास्थ्य, चिकित्सा तथा 2 बिलियन डालर खर्च के वायदे के साथ द्विपक्षीय सामाजिक विकास कार्यक्रम है। मदुरो ने क्यूबा के प्रेस से कहा- ”हम यहां रणनीतिक एवं ऐतिहासिक समझौते को मजबूती देने के लिये आये हैं। क्यूबा के राष्ट्राध्यक्ष राउल कास्त्रो ने कहा कि ”ये समझौते क्यूबा द्वारा वेनेजुएला के साथ एकजुटता, सहयोग जारी रखने की दृढ़ता और वेनेजुएला की महान जनता के साथ अपने आज एवं आनेवाले कल को साझा करने के विश्वास को दोहराने के लिये है।”

ए0एफ0पी 2 बिलियन डालर के समझौते को क्यूबा के विदेशी पूंजी के लिये सबसे बड़ी उपलबिध के रूप में देखता है।

राष्ट्रपति के रूप में मदुरो क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो से भी मिले। ‘हवाना टार्इम्स’ के अनुसार मदुरो ने कहा- ”मैंने फिदेल कास्त्रो के साथ 5 घण्टे से ज्यादा समय बिताया। हमने शावेज के बारे में बातें की। हमने शावेज के साथ के अनुभवों को बांटा। हमने इस बात को भी याद किया कि किस तरह उन्होंने और शावेज ने इस गठबंधन को बढ़ाया, जो एक साझे की रणनीति से कहीं ज्यादा है।” उन्होंने कहा- ”दोनों देश एकसाथ काम करना जारी रखेंगे।”

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