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चिली में छात्रों एवं चिलीवासियों का देशव्यापी प्रदर्शन

latine america (5)11 अप्रैल को, 1 लाख से ज्यादा चिलीवासियों ने, देशव्यापी प्रदर्शन किये। आधिकारिक रूप से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 1,50,000 लोगों ने लाभ पर आधारित शिक्षा को बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ”चिली की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह गलत और अन्याय पूर्ण है।” जिसे बदले बिना समाज को भी बदला नहीं जा सकता है। इसलिये, शिक्षा व्यवस्था को बदलने की मांग अप्रत्यक्ष रूप में समाज व्यवस्था को बदलने की मांग बन जाती है। यही कारण है कि चिली की मौजूदा सरकार इन मांगों और प्रदर्शनों के खिलाफ है। और यही कारण है कि छात्रों के इस मांग से आम चिलीवासी भी अब जुड़ गये हैं।

चिली की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की गुंजार्इशें खत्म हो गयी हैं। प्रदर्शनकारी उसमें आवश्यक सुधार की नहीं, बल्कि उसे बंद कर, पूरी तरह बदलना चाहते हैं। चिली के विभाजित समाज की तरह ही वहां की शिक्षा व्यवस्था भी तीन वर्गों में विभाजित है। जिसकी शुरूआत तानाशाही के जमाने में की गयी और मौजूदा पूंजीवादी जनतंत्र की सरकार ने भी जिसे स्वीकार कर लिया है। जो लातिनी अमेरिकी देशों में हो रहे परिवर्तन और जरूरतों के अनुरूप नहीं है, बल्कि वह पूरी तरह समान शिक्षा व्यवस्था के आदर्शों के विरूद्ध है। समाज के सबसे समृद्ध और सत्ताधारी वर्ग के लिये अलग शिक्षा व्यवस्था है, और मध्यम तथा समाज के सबसे कमजोर बहुसंख्यक वर्ग के लिये अलग व्यवस्था है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ”मध्यम वर्ग के छात्रों की पहुंच लातिनी अमेरिका के अच्छे स्कूलों तक भी नहीं हो पाती है, और निम्न वर्ग के छात्रों की पहुंच सरकार की सहायता से चलने वाले स्कूलों से ऊपर नहीं हो पाती है।” विश्वविधालयीन शिक्षा इतना महंगा और विशिष्ठ वर्ग के लिये सुरक्षित रखने की सोच से संचालित होने की वजह से, शेष दोनों ही वर्ग के छात्रों की पहुंच से बाहर है। जहां सप्लार्इ भी प्रार्इवेट फर्मों के द्वारा होती है।

स्टूडेण्ट फेडरेशन आफ द पोंटिफिकल कैथलिक यूनिवरसीटी आफ चिली के प्रेसिडेण्ट डियेगोवेला ने कहा कि ”देश को जिस बदलाव की जरूरत है, उसे लाने का काम हम चिलीवासियों पर निर्भर करता है, जो आज के प्रदर्शन में शामिल हैं।” देश की राजधानी सेणिटयागो में हुआ यह प्रदर्शन पिछले दो दशकों में हुए प्रदर्शनों में सबसे बड़ा प्रदर्शन है। अधिकारियों के अनुसार भी 80,000 लोगों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। जबकि छात्र नेताओं के आधार पर 1,50,000 लोगों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन तब झडपों और हमलों में बदल गया, जब दंगा विरोधी पुलिस के द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिये उन पर आंसू गैस के गोले दागे गये और वाटर कैनन का उपयोग किया गया। प्रदर्शनकारियों के ग्रूप ने भारी विरोध किया और पुलिस से झडपें हुर्इं। सेणिटयागो पुलिस के अनुसार- 8 पुलिस अधिकारी घायल हुए और 109 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया।

latine america (6)देश की दक्षिणपंथी सरकार ने छात्रों एवं चिलीवासियों के इस देशव्यापी प्रदर्शन की निंदा की है। चिली के डिफेंस मिनिस्टर रोडरिगो ने कहा कि ”छात्रों के प्रतिनिधि उसी तरह की बातें कर रहे हैं, जिस तरह से उन्होंने 2011 में किया था। वो नहीं जानते कि इन दो सालों में क्या किया गया है।”

2011 में चिली ने 6000 प्रदर्शन हुए थे। हार्इ स्कूल के छात्रों ने कर्इ स्कूलों पर कब्जा कर लिया था, और उन्होंने छोत्रों एवं उनके अभिभावकों तथा शिक्षकों के सहयोग से उन स्कूलों को सफलता से संचालित किया था। छात्रों के इस परिपक्व कदम ने अभिभावकों को आकर्षित किया, शिक्षकों ने भी अपना सहयोग दिया। इसे चिली की समाज व्यवस्था में अभूतपूर्व सामाजिक परिवर्तन की शुरूआत का दर्जा हासिल है।

चिलीवासियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिये प्रार्इवेट विश्वविधालयों पर निर्भर होना पड़ता है, जिनका मासिक शिक्षा शुल्क 900 डालर है, जबकि एक आम चिलीवासी की आय -वहां की जीडीपी के आधार पर 20,000 डालर वार्षिक है।

माना यही जा रहा है कि चिली का छात्र आंदोलन अब चिली की समाज व्यवस्था को बदलने के आंदोलन में बदल गया है, जिसे रोक पाना देश की दक्षिणपंथी सरकार के लिये मुश्किल है।

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