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इटली की मिली-जुली सरकार और यूरोपीय संघ के खिलाफ

europe (2)इटली में 11 प्रतिशत लोग ही आज ऐसे हैं, जो अपने देश को यूरोपीय संघ में बने रहने का समर्थन करते हैं। 89 प्रतिशत लोेगों का मानना है, कि इटली को यूरोपीय संघ से अलग हो जाना चाहिये। वो मानते हैं, कि इटली की समस्याओं का सबसे बड़ा कारण यूरोपीय संघ से उसका जुड़े रहना है।

2013 के पहली तिमाही में इटली की अर्थव्यवस्था में 0.5 प्रतिशत का संकुचन हुआ, और 2012 के आखिरी तिमाही में 0.3 प्रतिशत का संकुचन हुआ था। इस साल 1.8 प्रतिशत संकुचन का पूर्वानुमान है। ‘नेशनल स्टेटिसटिक्स इन्स्टीटयूट’ की इटली सम्बंधी आंकड़े में इसके अलावा वहां की बेरोजगारी दर पर भी आंकड़े उपलब्ध कराये हैं। वर्तमान में 11 प्रतिशत बेरोजगारी है, जो वर्ष 2014 में 12.3 प्रतिशत तक हो सकती है।

इटली में आम आदमी की स्थिति रोज बद से बदतर होती जा रही है। समाज का सबसे गरीब तबका डस्टबिन और सब्जी बाजार के कचड़ों पर निर्भर हो गया है। जिनके पास अपना घर है, उनकी स्थिति यह है कि वो अपने घरों को गर्म रखने का खर्च तक नहीं उठा सकते। मंदी का सबसे भयानक प्रभाव उन लोगों पर पड़ा है, जो पहले से ही कमजोर थे। मध्यम वर्ग की हाल ऐसी हो गयी है, कि वह अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है, और बढ़ती हुर्इ महंगार्इ, बढ़ते हुए सरकारी कर, और बढ़ती हुर्इ आर्थिक अनिश्चयता उसके सामान्य जीवन को तोड़ती चली जा रही है। वह न तो अपने बच्चों को शिक्षा दिला पा रहा है, ना ही उनकी परवरिश कर पा रहा है।

22 मर्इ को इटैलियन्स-नेशनल स्टेटिसटिक्स इन्स्टीटयूट ने जो रिपोर्ट जारी किया है, उसमें कहा गया है, कि ”इस तरह के लोगों की संख्या पिछले दो सालों में दो गुणा हो गयी है, जो अपने अपने घरों को गर्म रखने और मांस की खरीदी करने के लायक भी नहीं हैं। पिछले दो सालों से जारी मंदी का प्रभाव सामान्य इटलीवासी पर काफी बुरा पड़ा है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ”23.9 प्रतिशत युवा इटलीवासी न तो शिक्षा से जुड़ा हुआ है, ना ही उसके पास कोर्इ काम है। ऐसे युवाओं की तादाद पूरे यूरोप में, इटली में सबसे ज्यादा है।” इटली की कुल आबादी के 14 प्रतिशत लोग ऐसे मकानों में रह रहे हैं, जो अब रहने लायक नहीं हैं।

इटली के लोग यह मानने लगे हैं, कि मौजूदा व्यवस्था में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। वो अपनी सरकार, यूरोपीय संघ और पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ हैं। 18 मर्इ को हजारों ऐन्टी आस्टैरिटी प्रदर्शनकारियों ने सरकारी खर्चों में कटौती के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन रोम में किया।

यूरोप की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के सरकार की हालत यह है, कि मर्इ के शुरूआत में जब वहां मिली-जुली सरकार बनी थी, तो उसे 43 प्रतिशत लोगों का समर्थन हासिल था, मगर 7 मर्इ को कराये गये सर्वेक्षण के आधार पर मात्र 34 प्रतिशत लोग ही मौजूदा सरकार के पक्ष में रह गये हैं।

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