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न चाहते हुए भी

न चाहते हुए भी राजनीति लोगों को समझदार बना रही है।

तोता कहते ही, सीबीआर्इ नजर आता है। और पिंजरा कहते ही सरकार। जो अजब-अजब कारनामें करती है। और तोते से उन कारनामों का जांच कराती है।

उनके कारनामों का ही प्रभाव है मुझे पर, कि कोर्इ ‘कोल ब्लाक’ कहता है, तो कोयले की खदानें नहीं, मनमोहन सिंह जी की छवि छप जाती है।

बुरा लगता है मुझे जी, जब गुंदे मैदे की तरह उजले लोग, कोयला नजर आते हैं।

उससे भी बुरा लगता है जब अपना बच्चे लाल हथौड़े से कोयले को तोड़ कर भटठे में डालता है।

बेचारे मनमोहन सिंह इतने भी बुरे नहीं हैं, कि उन्हें भटठे में झोंक दिया जाये। मगर, वह दिन में चार बार ऐसा करता है। और हर बार मेरे चाय का स्वाद बिगड़ जाता है।

कि ‘पिंजरे में बंद तोता ही, आदमी की जुबान बोलता है।’

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नक्सलियों ने बड़ी ज्यादती की कि ”उन्होंने ‘लोकतंत्र पर हमला’ बोल दिया। सोनिया जी कहती हैं। मनमोहन सिंह जी भी यही कहते हैं। और राजनाथ सिंह जी भी यही कहना है। और जब सबने कह दिया, तो हम कौन होते हैं कि कहें यह कांग्रेसी नेताओं पर हमला है?

बड़े भयानक लोग हैं जी, बोलते बाद में हैं, गोली पहले चलाते हैं, कि ”यह लोकतंत्र पर नहीं, सलवा जुडूम के जरिये, आदिवासियों पर किये गये अत्याचार का बदला है।”

अब कांग्रेस की सरकार कहती है- ”हम भी बदला लेंगे।”

और वह भाजपा सरकार पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाती है।

भाजपा कहती है- ”बयानबाजी बंद हो। नहीं तो कच्चा चिटठा खोल देंगे, कि नक्सलियों के छुपे समर्थक कहां रहते हैं।”

और फिर ‘विकास रैली’ और ‘परिवर्तन रैली’ की तू-तू, मैं-मैं शुरू हो जाती है। लोकतंत्र ‘सुरक्षित’ होने लगता है।

भारत में राजनीति ही लोकतंत्र है।

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”जब गृह मंत्री जी को यहां होना चाहिये वो अमेरिका में जमे हैं, और प्रधानमंत्री जी जापान की सैर कर रहे हैं।”

यह हम नहीं भाजपा कह रही है।

हम तो कहेंगे- वो जापान में हंस रहे हैं कि ”चीन बड़ा दुष्ट है।”

वैसे, इसमें हंसने की कोर्इ बात नहीं है, मगर वो हंस रहे हैं। जापान में भारत की सुरक्षा ढूंढ रहे हैं। भारत को अमेरिका के लिये जापान बना रहे हैं। समझौते पर समझौते की नाव उतार रहे हैं।

कहीं हमने पढ़ा नहीं, किंतु हमें लगता है कि मनमोहन सिंह जी बड़े अच्छे तैराक हैं। वो बहती गंगा में हाथ नहीं धोते डुबकी लगाते हैं, और तैर कर गंगा पार कर जाते हैं।

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मनमोहन सिंह जी नरेंद्र मोदी जी से बड़े खुश हैं। कि वो सेंधमारी कर रहे हैं। मिशन 2014 के जरिये अमेरिका में उनकी बात फैला रहे हैं।

उनके चेहरे पर असली मुस्कान है।

व्हार्इट हाउस खुश है, कि हवा भरे मुददों से काम चल जाता है। देश डरते हैं। अरब जगत र्इरान से डरता है। भारत चीन और पाकिस्तान से डरता है।

आज कल बराक ओबामा जी, सुबह उठते ही फूंक मारने लगते हैं। कभी र्इरान के बबुआ में हवा भरते हैं, तो कभी सीरिया के मुददे में। कभी रूस से डराते हैं, तो कभी चीन के डर को हवा देते हैं।

मनमोहन सिंह जी आज कल देश की सुरक्षा को फूंक मार रहे हैं।

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