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यूरोपीय संघ के खिलाफ, यूरोपीय देशों की आम जनता में बढ़ती एकजुटता

europeग्रीस की राजधानी एथेन्स में, 8 जून को हजारों लोगों ने सरकार के द्वारा थोपी गयी कटौतियों और यूरोपीय संघ के आर्थिक नीति के खिलाफ प्रदर्शन किये। इस प्रदर्शन में पूरे यूरोप से आये प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया। यह ‘हम सब ग्रीसवासी हैं’ के उस सोच का विस्तार है, जो यूरोप की संकटग्रस्त आम जनता के बीच फैल गयी है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी, कि ‘यूरोपीय संघ अपनी वित्तीय नीतियों को बदले।’ उन्होंने ग्रीस की संसद के बाहर रैलियां निकाली और अंतर्राष्ट्रीय कर्जदाताओं के खिलाफ नारे लगाये। उन्होंने ग्रीस के वित्तीय संकट के लिये यूरोपीय संघ की नीतियों को दोषी करार दिया।

आज अघोषित रूप से ग्रीस की सरकार दिवालिया हो चुकी है, और विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, तथा यूरोपीय सेण्ट्रल बैंक का उसके वित्तीय व्यवस्था पर कब्जा हो गया है, जिसे बचाने के लिये कर्ज का भारी बोझ उस पर लाद दिया गया। यह सवाल अपने आप में महत्वपूर्ण है कि यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय इकार्इयों के भारी-भरकम सशर्त कर्ज का लाभ न तो ग्रीस की आम जनता को मिला, ना ही ग्रीस की अर्थव्यवस्था को बचाया जा सका, तो लाभ किसे हुआ? ऐसा कैसे हुआ कि सरकार के हाथ से तमाम वित्तीय संसाधन और अधिकार तो निकल गये, मगर अर्थव्यवस्था के संभलने का भरम तक नहीं हुआ। हुआ यह कि ग्रीस के प्रशासनिक भवन, हवार्इ अडडे, बंदरगाह नीलाम हो गये। सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण हो गया। नये कर, नयी कटौतियों, गिरता हुआ जीवन स्तर और बढ़ती हुर्इ बेरोजगारी की वजह से लोग सड़कों पर आ गये। और यह दौर आज भी जारी है। सामाजिक हताशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।

‘मेघ-आनलार्इन’ में 23 जून को एक रिपोर्ट प्रकाशित हुआ है, कि ”ज्यादातर मध्यम वर्गी ऐसे अभिभावक, जो अपने बच्चों को भोजन तक नहीं दे पा रहे हैं, वो अपने बच्चों को अनाथ आश्रमों में डाल रहे हैं।” ताकि वो वहां भूखों मरने से बच जाये। इससे भी बुरी स्थिति समाज के सबसे कमजोर वर्ग की है, जिसके पास कोर्इ काम नहीं है। वो काम करना चाहते हैं, मगर भीख मांगने और डस्टबिन में खाना तलाशने के लिये विवश है।

‘सेण्टर आफ प्लानिंग एण्ड इकोनामिक रिसर्च’ ने 22 जून को अपने रिपोर्ट में कहा है कि ”2009 में, जब से देश में मंदी आर्इ है, ग्रीस में रोज 100 से 1000 लोगों को अपने काम से हाथ धोना पड़ा है।” रिपोर्ट के अनुसार 2014 में ग्रीस का बेरोजगारी दर 30.4 प्रतिशत हो जायेगा। ग्रीस की अर्थव्यवस्था में संकुचन लगातार जारी है, और वर्तमान में 27.4 प्रतिशत बेरोजगारी दर है। ग्रीस के पश्चिमी मेसिडोनिया में 2012 के अंत तक 72.5 प्रतिशत युवा बेरोजगारी दर है। ग्रीस के 4 लाख (चार सौ हजार) परिवार के पास आय का कोर्इ जरिया नहीं है। और 3,00,000 कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है।

लोगों को बेरोजगार करने की नीति के तहत 11 जून को ग्रीस की सरकार ने देश के ‘नेशनल ब्राडकास्टर र्इआरटी’ को बंद करने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद ही राजधानी एथेन्स में हजारों लोाग र्इआरटी के मुख्यालय के बाहर इक्कटठा हो गये।

सरकार ने यह कदम उन अंतर्राष्ट्रीय कर्जदाताओं के कहने पर उठाया जो ग्रीस की अर्थव्यवस्था को संभालने के नाम पर अपनी मुटठी में ले चुके हैं, और जिनकी नीतियां सरकारी खर्च घटाने के लिये ग्रीस की सरकार पर दबाव बनाये रखना है। र्इआरटी के अंद होते ही 2700 कर्मचारियों के हाथ से उनका काम निकल गया। सरकार के इस निर्णय के विरूद्ध ग्रीस प्रमुख ट्रेड यूनियन, विपक्षी राजनीतिक दल, मीडिया ग्रूप, ग्रीस, यूरोप और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों ने सरकार को चेतावनी दी।

इस खबर के आते ही न्यूज एडिटर यूनियन ने सभी निजी प्रसारण कर्ताओं को हड़ताल पर जाने को कहा। एथेन्स जनरलिस्ट यूनियन ने 48 घण्टे के हड़ताल की घोषणा कर दी।

र्इआरटी की शुरूआत 1938 में हुर्इ थी। यह तीन घरेलू चैनलों को चलाता था। इसके साथ चार राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन, क्षेत्रीय रेडियो स्टेशन और एक एक्सटेनशनल सर्विस व्हार्इस आफ ग्रीस चलाता था।

प्रमुख ट्रेड यूनियन और विपक्षी दलों ने भी हड़ताल की घोषणा कर दी। उन्होंने 12 एवं 13 जून को होने वाले विरोध प्रदर्शन में लोगों से भाग लेने की अपील की। सरकार के इस कटौती कार्यक्रम के खिलाफ जनरल स्ट्रार्इक की घोषणा कर दी गयी। 13 जून को हजारों मजदूरों एवं कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किये। र्इआरटी के कर्मचारियों ने स्टेशन के मुख्यालय भवन पर कब्जा कर लिया, और उसे प्रोटेस्ट चैनल में बदल दिया। पूरी दुनिया के लोग ‘प्रोटेस्ट चैनल’ के सिगनल को वेबसार्इट और रेडियो तथा सेटेलार्इट के जरिये ‘री-ट्रांसमिट’ करना शुरू कर दिया।

ग्रीस की पुलिस ने मुख्यालय को हड़ताली कर्मचारियों से खाली कराने की कार्यवाही के तहत बिजली कनेक्शन काट दिये। और उसे खाली करने की चेतावनी देने लगे। वो सख्त कार्यवाही की योजना ही बना रहे थे कि र्इआरटी मुख्यालय के सामने 2700 कर्मचारियों के पक्ष में 10,000 से ज्यादा समर्थक वहां जमा हो गये। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- ‘Hand off Public Broadcasting’ उनके बैनरों पर लिखा था-‘Fire Samaras, not ERT Workers’

30 वर्षीय आफिस कर्मचारी थामस ल्यूकोरियस ने गार्जियन को बताया कि ”वो हमें नहीं बता सकते कि हमें क्या देखना चाहिये, और क्या नहीं?” उन्होंने कहा- ”यह सिर्फ र्इआरटी कर्मचारियों का मुददा है।”

एक बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने जर्मन पबिलक टेलीविजन स्टेशन- एआरडी से कहा- ”मैं यहां आज सिर्फ इसलिये आया हूं कि नहीं तो यह सरकार आज नहीं तो कल, सभी को अपने काम से निकाल देगी।”

देश की राजधानी के अलावा लगभग सभी छोटे बड़े शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। थेसालोनिकी में र्इआरटी-3 बिलिडंग के सामने हजारों लोग जमा हैं। इस बिलिडंग पर भी कर्मचारियों ने कब्जा कर लिया है। ग्रीस के बस ड्रार्इवर, रेलवे कर्मचारी और जहाज कर्मचारियों ने भी र्इआरटी कर्मचारियों के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने के लिये हड़ताल पर थे। कर्इ स्कूल, अस्पताल के आपात कर्मचारी भी हड़ताल पर थे। एयर ट्रैफिक कण्ट्रोलर ने भी 2 घण्टो का सांकेतिक हड़ताल किया। पत्रकारों ने घोषणां की, कि उनका हड़ताल तब तक जारी रहेगा, जब तक र्इआरटी को फिर से खोला नहीं जाता है।

र्इआरटी कर्मचारी अभी भी नेट टेलीविजन को इण्टरनेट के जरिये प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने हड़ताल की जानकारियों को आम जनता तक पहुंचाने का जरिया र्इआरटी को बना दिया है। वो एक-एक पल की जानकारी यूरोप और दुनिया को दे रहे हैं। और दुनिया के लोग उनसे जुड़ रहे हैं। सरकार के द्वारा तकनीकी बाधा पहुंचाने की कोशिशें भी नाकाम हो गयी हैं। 13 जून को जीनेवा के तहत- ‘यूरोपीय ब्राडकास्टिंग यूनियन’ ने र्इआरटी के स्टूडियो से सिग्नल लिया और उसे वापस सेटेलार्इट के जरिये ‘ग्रीस होम्स’ तक पहुंचा दिया।

ग्रीस की कम्युनिस्ट पार्टी ने भी र्इआरटी के प्रोग्राम के सिग्नल को ट्रांसमीट करने का आफर दिया है। 50 यूरोपीयन टीवी ब्राडकास्टर की तरफ से भी सहयोग एवं समर्थन मिल रहा है। उन्होंने एक संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया है। कर्इ अन्य वेबसार्इट भी लार्इव ट्रांसमीट कर रहे हैं। र्इआरटी के एक सपोर्टर ने तो nerit.gr वेब एड्रेस तक को रजिस्टर कर लिया है, ताकि कार्यक्रम को प्रसारित किया जा सके। असल में एनर्इआरटीआर्इ नये पबिलक ब्राडकास्टर का प्रस्तावित नाम है। जिसे सरकार र्इआरटी के स्थान पर खड़ा करना चाहती है। यदि र्इआरटी कर्मचारी अपनी यह लड़ार्इ हार जायें, तो उनका इरादा एनर्इआरआर्इटी को कम काम करने वाले और कम वेतन पर काम करने वालों के साथ काम की शुरूआत करने की है।

ग्रीस की सरकार ने पिछले 5 महीनों में, तीन प्रमुख हड़तालों को बड़े ही हिंसक तरीके से कुचला है। वह इस हड़ताल को भी कुचलने पर आमादा है। सरकार ने र्इआरटी कर्मचारियों को न सिर्फ जेल में डालने की धमकी दी है, बल्कि मिल रहे सहयोग की वजह से, वह अपने र्इरादों में कामयाब नहीं हो पा रही है। ग्रीस के वित्त मंत्रालय ने प्रसारण कर्ताओं को एक र्इ-मेल भेजा है, जिसमें कहा गया है कि ”र्इआरटी के सिग्नल का कोर्इ भी प्रसारण, अवैध है। ऐसा करने पर उन्हें प्रतिबंधित किया जा सकता है।”

13 जून की शाम को ग्रीस के प्रधानमंत्री समरास यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारी से मिले। उन्होंने कर्ज की अगली किस्त 3.3 बिलियन यूरो के बारे में बातें की। इस किस्त को पाने के लिये 2000 कामगर-कर्मचारियों को महीने के अंत तक, काम से हटाने की शर्त है। र्इआरटी के 2700 लोगों को एक साथ काम से हटाने की मूल वजह यही है। जोकि अब आसान नहीं रह गया है। 6 साल के मंदी में ग्रीस ने 8,50,000 से भी ज्यादा काम गवांये हैं। और इसी दौरान 35 से 50 प्रतिशत वेतन में कटौतियां की गयी है। बढ़ते हुए बाजारभावों ने मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। साथ ही सरकारी करों में भारी वृद्धि ने ऐसी स्थितियां बना दी है कि आम ग्रीसवासी पर कर्ज का बोझ निजी तौर पर भी बढ़ता जा रहा है। उसके पास खाने और जीने की समस्या है।

14 जून को यूरोपियन ब्राडकास्टिंग यूनियन ने ग्रीस की सरकार से कहा है कि वह स्टेट ब्राडकास्टर र्इआरटी को फिर से शुरू करे। यूनियन के प्रसिडेण्ट जीन पाल फिलिपो इस वक्त ग्रीस की राजधानी एथेन्स में हैं। माना यही जा रहा है कि वो ग्रीस के वित्तमंत्री से मिलेंगे और उन्हें 51 यूरोपियन डायरेक्टर्स जनरल द्वारा हस्ताक्षर किये गये मांग पत्र को सौपेंगे, जिसमें र्इआरटी सिग्नल को फिर से शुरू करने की मांग की गयी है।

17 जून को ग्रीस की अदालत ने कहा कि ”र्इआरटी को फिर से शुरू किया जाये।” उसने कहा है कि ”स्वीकृति के उसे बंद नहीं किया जा सकता है।”

20 जून को प्रधानमंत्री समरास और पीएएसओ के चेयरमेंन इवान जेलस वेनेजिलास के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि काम से निकाले गये 2000 कर्मचारियों को गर्मी तक अस्थायी करार पर रखा जायेगा। उस समय तक एक नये पबिलक ब्राडकास्टिंग सर्विस की स्थापना की जायेगी।

र्इआरटी कर्मचारियों को काम से निकाले जाने की सूचना मात्र 5 मिनट पहले दी गयी थी। ‘ट्रोयेका’ की मांग के अनुसार ग्रीस को इसी महीने 40,000 काम की कटौती करनी है। सरकार के द्वारा र्इआरटी को बंद करने का कदम ‘ट्रोयेका’ के अधिकारियों की एथेंस यात्रा के एक दिन बाद लिया गया। वे लोग एथेन्स ग्रीस सरकार के काम को निर्देशित करने आये थे।

16 जून को जर्मनी की चांसलर ऐंजीला मार्केल ने ग्रीस के प्रधानमंत्री समरास को फोन करके कहा है कि ”वो अपने निर्णय पर टिके रहें।” ग्रीस सरकार की योजना र्इआरटी को बंद करके अगले गर्मी तक, नये ब्राडकास्टिंग की शुरूआत करने की है जिसमें मात्र 1200 कर्मचारियों को नये वेतन एवं नये शर्तों के तहत काम पर रखा जायेगा।

ग्रीस यूरोप में, यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय इकार्इयों के लिये, तीसरी दुनिया का देश बन गया है। जिनका विकास और आर्थिक सहयोग के नाम पर शोषण और दोहन किया जाता है। जिनकी सरकारें अपने देश की आम जनता के हितों के विरूद्ध अमेरिकी सरकार और पश्चिमी ताकतों के हितों का खयाल रखने के लिये विवश होती है। यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय कर्जदाताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि ग्रीस की अर्थव्यवस्था अब संभलने लगी है। यदि संभलने का मतलब देश की सरकार को बिचौलिया बनाना, सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण करना, सरकार के आय के स्त्रोतों को बंद करना, उसका सामाजिक जिम्मेदारियों से हाथ खींचना और आम जनता की बदहाली है, तो निश्चय ही ग्रीस की व्यवस्था तेजी से संभल रही है।

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