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अमेरिकी अर्थव्यवस्था में गिरावट जारी है

americaसंयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न राज्यों में सामाजिक एवं आर्थिक विसंगतियां और असमानतायें इतनी तेजी से बढ़ती जा रही है, कि आकोपायी वालस्ट्रीट मोमेण्ट फिर से खड़ा हो रहा है। अमेरिका के संघीय सरकार के बारे में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि उसकी जमीन दरक गयी है, और विस्फोट की स्थितियां रोज बढ़ती जा रही हैं। दुनिया का सबसे विकसित देश होने के बाद भी, समाज के गैर अनुपातिक विकास की स्थितियां साफ होती जा रही हैं। आम लोगों में ओबामा सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी है। 12 दिसम्बर 2012 तक, अमेरिका के 122 शहरों में 7,119 आकोपायी वालस्ट्रीट आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया था। आकलैण्ड में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां हुर्इ थीं। अमेरिकी गुप्तचर एजेनिसयां और एफबीआर्इ के कारनामों को देखते हुए कहा जा सकता है, कि जो गिरफ्तारियां दर्ज हैं, उससे कर्इ गुणा ज्यादा गिरफ्तारियां हुर्इ होंगी। जिनके बारे में, उनके होने या न होने के बारे में यकीन के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता। यह नहीं बताया जा सकता है, कि अब वो हैं या नहीं? और यदि वो हैं, तो किस हाल में हैं? कहां हैं?

विभिन्न राज्यों के सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं को अनुपात भले ही अलग-अलग हैं, किंतु उनकी वजह एक है। वित्तीय पूंजी ने अमेरिकी व्हार्इट हाउस और सीनेट पर अधिकार जमा लिया है। इसलिये, उनकी नीतियां आम अमेरिकी की समस्याओं का समाधान करने के बजाये नयी कटौतियों को उन पर थोपने की है। सामाजिक कार्यक्रमों में कटौतियों का सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ रहा है।

15 मर्इ को ‘हाउस एगि्रकल्चरल कमेटी’ ने अपना वर्ष 2013 का ‘फार्म बिल’ फेडरल एगि्रकल्चर रिफार्म एण्ड रार्इटस मैनेजमेण्ट एक्ट- 2013, पास किया। इस बिल के अनुसार -सपिलमेण्टल न्यूट्रीशन एशिसटेन्स प्रोग्राम- एसएनएपी- से 21 बिलियन डालर की कटौती 10 सालों में की जायेगी। इस तरह लगभग 39.7 बिलियन डालर की कटौती पूरे फार्म बिल में की जायेगी। और आधा से ज्यादा कटौती एसएनएपी से की जायेगी। जिसका परिणाम यह होगा, कि इससे सहयोग पाने वाले 4 लोगों के परिवार को 25 डालर प्रतिमाह की हानि होगी। पिछले साल एसएनएपी कार्यक्रम पर 48 मिलियन लोग अपने गुजारे के लिये निर्भर थे, जिनमें आधी तादात बच्चों की थी।

साल 2012 के वित्तीय वर्ष में अमेरिकी सरकार ने एसएनएपी को 74.6 बिलियन डालर आबंटित किया। वजह बतार्इ गयी, कि इस आबंटन से बुरी स्थिति में जी रहे अमेरिकी लोगों को कुछ सहायता मिल जायेगी। सुनने में यह तर्क सही है, मगर आबंटन जरूरत से ज्यादा कम है। अमेरिकी सेना के 9 दिन का खर्च 74.6 बिलियन डालर है। जिसमें किसी किस्म की कोर्इ कटौती नहीं की जाती, क्योंकि अमेरिकी साम्राज्य इन्हीं पर टिका हुआ है। वह आम अमेरिकी के जीवनस्तर में लगातार गिरावट पर भी टिकी हुर्इ है। ओबामा प्रशासन के पूर्वानुमान के अनुसार 51 बिलियन डालर का लाभ अमेरिकी विधार्थियों को दिये कर्ज से सरकार को होना है, जोकि, किसी बड़ी कम्पनी के लाभ से भी ज्यादा है।

अमेरिकी सरकार की शिक्षा नीति ऐसी है, कि छात्रों के ऊपर कर्ज का भारी बोझ लद जाता है। काम के अवसर में हुर्इ कमी और बढ़ती बेरोजगारी दर ने छात्रों की स्थिति बिगाड़ दी है और वो सरकार के सामाजिक सहयोग पर ज्यादा निर्भर हो गये हैं। ‘नेशनल सेण्टर फार एजुकेशन स्टेटिसटिक्स’ के जारी आंकड़ों के अनुसार- अमेरिका में हर साल 1.3 मिलियन छात्र हार्इस्कूल की पढ़ार्इ छोड़ रहे हैं। 25 वर्षीय छात्र -जिन पर ‘छात्र कर्ज’ है- की दर 2003 में 25 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2012 में बढ़ कर 43 प्रतिशत हो गयी है।

16 मर्इ को अमेरिकी श्रम विभाग ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया है, कि अमेरिका में बेरोजगारी का लाभ उठाने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। यह संख्या अर्थशासित्रयों के अनुमान से कहीं ज्यादा है। 11 मर्इ को खत्म हुए सप्ताह में 32,000 बेरोजगारों ने दावे किये।

उधोगों के पलायन, बंद होती औधोगिक, खनिज एवं व्यावसायिक इकार्इयों, तथा आवश्यक सामानों के उत्पादन में कमी का प्रभाव भी बढ़ती हुर्इ बेरोजगारी दर पर पड़ रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है, कि अप्रैल और मर्इ के बीच यह गिरावट अनुमानित 0.2 प्रतिशत से कहीं ज्यादा 0.5 प्रतिशत है। वालमार्ट जैसी व्यावसायिक इकार्इ ने कहा है कि 2013 की पहली वार्षिक तिमाही में खरीददारों की संख्या 1.8 प्रतिशत तथा खरीदी में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आयी है। अमरिकी सरकार सरकारी खर्च घटाने के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्रों की इकार्इयों का निजीकरण करती गयी है, और अब निजी इकार्इयां ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने के लिये उत्पादन लागत कम करने के लिये, तीसरी दुनिया के देशों में अपने उधोगों को स्थानांतरित करती जा रही हैं। यूरोप की अर्थव्यवस्था की तरह ही, अमेरिकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठहर गयी है। काम के घटते हुए अवसर के बीच ओबामा सरकार ने मार्च 2013 में 1,38,000 और अप्रैल 2013 में 1,65,000 लोगों के लिये काम की व्यवस्था की। जिसका भारी प्रचार किया गया। यह संभावना भी व्यक्त की गयी कि अमेरिकी वित्त व्यवस्था अब संभलने की ओर बढ़ रही है। किंतु जितने काम के नये अवसरों की व्यवस्था की गयी, वह बाजार में आये नये कामगरों के लिये भी अपर्याप्त है, इसलिये बेरोजगारी दर घटने के बजाये आज भी बढ़ रही है। पूंजी का निजी क्षेत्रों में केंदि्रयकरण की वजह से वैसे भी अमेरिकी सरकार के पास काम के नये अवसर बनाने की संभावनायें कम हैं। बढ़ती हुर्इ बेरोजगारी और गिरता हुआ जीवन स्तर, अब सामाजिक हताशा और अपराध की ओर मुड़ गया है। भूख और गरीबी ने, आवासहीन और सामाजिक खर्चों मे ंकी कटौतियों ने जन असंतोष को बढ़ा दिया है। जार्जिया जैसे राज्य की गरीबी दर 41 प्रतिशत से ज्यादा हो गयी है।

23 मार्च 2013 को, जार्जिया राज्य के आगस्टा शहर में लेंसी वाकर सुपरमार्केट के पास सैकड़ों लोग जमा थे। उन्होंने अपने साथ बैग और बास्केट ले रखा था। उन्हें दूर से देख कर ही कहा जा सकता था, कि वो गरीब तबका के ऐसे लोग हैं, जो बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी जमा कर पाते होंगे। वो आये भी थे सुपरमार्केट से बाहर फेके जाने वाले उन सामानों के लिये, जो खाने के लायक हो, और खराब न हुए हों। स्थानीय चर्च के द्वारा ऐसी व्यवस्था की गयी थी। किंतु उस दिन सुपरमार्केट के मालिक ने उन बचे-खुचे सामानों को कचड़ा फेके जाने वाले जगह पर फेकने का आदेश दे दिया।

बचे-खुचे खाने लायक सामान को यूं गाडि़यों में भर कर फेके जाने के खिलाफ जमा हुए लोगों में गहरी नाराजगी पैदा हो गयी। चारो तरफ अजीब सी अफरा-तफरी मच गयी। कुछ लोग उन गाडियों के पीछे भागे, जिन्हें वहां से खदेड़ दिया गया और पुलिस ने ऐसे लोगों को अपने नियंत्रण में ले लिया। और जमा लोग खाने के सामान को कचड़ा बनते देखते रहे।

एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि ”दंगे की स्थितियां बन गयी थीं।” राबर्ट सिटन लैम्बर्ट ने ‘फाक्स- 54’ पर कहा कि ”लोग अपने बच्चों के साथ यहां आये थे। वो भूखे-प्यासे थे। उन सामानों को फेंकने के बजाये लोगाें को बांटा जा सकता था।”

सन ट्रस्ट बैंक इस मुददे पर ‘सही या गलत’ के बीच उलझा हुआ था। उन्होंने अपने ऊपर पूरी जिम्म्ेदारी नहीं ली। उसके मीडिया रिलेशन आफिसर ने कहा- ”हम स्टोर सप्लायर के साथ-साथ कानून के अमल का काम कर रहे थे। स्टोर के बचे हुए सामानों के निपटारे के अलावा सुपरमार्केट को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हमारी है।” उन्होंने कहा- ”खाने के सामानों का सम्बंध सन ट्रस्ट बैंक से नहीं है।”

रिचमन्ड काउन्टी के मार्शल आफीस के चीफ डिप्यूटी टैरेसा रसेल ने कहा कि ”बिलिडंग के मालिक ने खाने के सामान को कचड़ा में फेंकने का आदेश दिया था। कुछ लोग ट्रक के पीछे-पीछे वहां तक गये, जहां उसे कचड़े के ढूह में फेंका जाना था। मगर उन्हें वहां से भी भगा दिया गया।”

रिचमंड काउन्टी में इस तरह से कचड़े का निपटारा हर दिन लगभग 20 बार होता है। और इस तरह के सुपरमार्केट के चारो तरफ का क्षेत्र सबसे गरीब इलाकों से घिरा है। वैसे भी 2000 से 2011 के बीच शहरी क्षेत्रों की बेरोजगारी दर में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुर्इ।

राष्ट्रसंघ के ‘चिल्डरन फण्ड’ द्वारा पिछले महीने जारी रिपोर्ट में विकसित देशों में गरीबी का जीवन जीने वाले बच्चों की सूची में अमेरिका का स्थान 29वां है। ग्रीस की स्थिति भी उससे अच्छी है, उससे नीचे यूरोप के सर्वाधिक कमजोर देश लिथुआनिया, लाटीविया और रोमानिया हैं। अमेरिका की मौजूदा स्थिति कर्इ यूरोपीय देशों से भी बुरी है, जहां यूरोप का वित्तीय संकट अपने चरम पर है।

अमेरिकी सरकार अपने ही द्वारा प्रचारित झूठ को सच बनाने के जाल में इस तरह फंस गयी है, कि सच को वह स्वीकार नहीं कर पा रही है, और प्रचारित झूठ को सच बनाना उसकी वित्तीय ढांचे के बस में नहीं है।

5 जुलार्इ को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने 1,95,000 काम के नये अवसर बनाये हैं। मगर जारी किये गये इन आंकड़ों के तह में जाने पर पता चलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने पिछले महीने 1,24,000 फुल टार्इम जाब को गंवाने का काम किया है। अब तक 2013 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने मात्र 1,30,000 फुलटार्इम जाब को बनाने का काम किया है, जबकि हर महीने 90,000 फुलटार्इम जाब को गंवाने का काम किया है, वह अपने आंकड़ों को सच बनाने और आम अमरिकी को धोखे में रखने के लिये पार्टटार्इम जाब से काम चला रही है। अब तक 5,00,000 ऐसे काम के अवसर बनाये गये हैं। जिससे आम अमेरिकी की हालत सुधरने के बजाये और भी बिगड़ती जा रही है। नाराजगी भी तेजी से बढ़ रही है।

america (2)जनवरी 2000 में अमेरिका में कुल 130.8 मिलियन काम के अवसर थे। दिसम्बर 2007 -मंदी से ठीक पहले- 138.0 मिलियन तक पहुंच गया। काम के अवसर के मामले में यह अमेरिका का सर्वोच्च विकास था। जून 2009 में 138.0 घट कर 130.6 मिलियन हो गया। मतलब 130.8 से भी कम। सितम्बर 2012 में कुल 133.5 मिलियन। इस आंकड़े के हिसाब से सिर्फ 40 प्रतिशत काम की भरपार्इ हो पायी। मंदी के दौरान अमेरिका ने 5.6 मिलियन काम के अवसर को गंवा दिया। जून 2009 से हर महीने 5000 ऐसी नौकरियों से हाथ धोता चला गया, जिससे पूरा परिवार चलता था। इस तरह 5.6 मिलियन काम के अवसर बनाने में -यदि यही रफ्तार रही तो- 90 साल लग जायेंगे। क्योंकि ओबामा सरकार मात्र 2 लाख काम के अवसर बना पायी है। 47 प्रतिशत युवाओं के पास ही फुल टार्इम नौकरियां हैं। शेष 53 प्रतिशत या तो पूरी तरह बेरोजगार है, या उनके पास पार्टटार्इम जाब है। सीएनएन के रिपोर्ट के अनुसार- 101 मिलियन अमेरिकी अलग-अलग खाध सहायता कार्यक्रमों में पंजीबद्ध है।

अमेरिका में काम और वेतन के स्तर पर भी भारी गिरावट आयी है। मंदी में 60 प्रतिशत मध्यवर्गीय वेतनमान वाली नौकरियों का अंत हुआ और 58 प्रतिशत न्यूनतम वेतनमान वाली नौकरियों की व्यवस्था हो सकी है। अस्थायी कामगरों की संख्या अमेरिका में 2.7 मिलियन है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है। जो आर्थिक अनिश्चयता के शिकार है। ‘सेण्टर फार इकोनामिक एण्ड पालिसी रिसर्च’ के अध्ययन के अनुसार अमेरिका में 24.6 प्रतिशत नौकरियां ही अब अच्छी नौकरियों की श्रेणी में आती है।

ओबामा सरकार इस झूठ को रोज हवा दे रही है, कि अमेरिकी वित्त व्यवस्था मंदी के दौर से बाहर निकल गयी है। वैश्विक स्तर पर इस बात का प्रचार भी बड़े पैमाने पर हो रहा है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डालर में आयी मजबूती के साथ घरेलू स्तर पर आयातकों और बैंकों में भारी मांग है। यह प्रचार का बढ़ता प्रभाव है कि 1960 में अमेरिका के राजनीतिक विज्ञापन का खर्च 109 मिलियन डालर था, जो बढ़ कर 2012 में 6 बिलियन डालर हो गया है। वास्तव में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जो पैसा हर माह बाजार में डाला जा रहा है, उसकी वजह स्टाकमार्केट की हालत सुधरी हुर्इ लग रही है, मगर सही अर्थों में यह एक ऐसा वित्तीय बुलबुला (फार्इनेसियल बबल) है, जो मौजूदा दौर से भी बड़े अमेरिकी मंदी की रचना कर रहा है, जिसका फटना तय है। ओबामा सरकार अमेरिकी वित्तीय संकट से उबरने के लिये उससे भी बड़े वित्तीय संकट को दावत दे चुकी है। कहा जाता है, कि डेट्रायट में जो पहले होता है, बाद में वही अमेरिका में होता है, और डेट्रायट ने अपने कर्ज का भुगतान करने के लिये दिवालिया होने की पेशकश की है। क्या अमेरिका का आने वाला कल डेट्रायट है?

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