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ब्रजील में हड़ताल और जनप्रदर्शनों का दौर जारी है

latine america (2)ब्रजील में हो रहे जन प्रदर्शनों के बारे में, अपने देश में हो रहे जन प्रदर्शनों से तुलना करते हुए, तुर्की के प्रधानमंत्री ने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और विदेशी ताकतों पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने तुर्की के पार्लियामेण्ट में कहा कि ”क्योंकि दोनों ही देशों ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के कर्ज का भुगतान कर दिया है।” इसलिये पश्चिमी देश और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय इकार्इयां, देश में अस्थिरता पैदा कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय इकार्इयां और यूरो-अमेरिकी साम्राज्यवाद तीसरी दुनिया के देशों पर अपनी पकड़ बनाये रखने के लिये, किसी भी स्तर तक जा सकती है, का यकीन हमें है। राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की कार्यवाहियां, वो करती रही है, जिसमें अपनी समस्याओं के समाधान के लिये, जायज मांगों के तहत हो रहे जन प्रदर्शनों को गलत दिशा दे कर, वो उपयोग कर लेती है। मिस्त्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से बेदखल करने का कारनामा 3 जुलार्इ 2013 को दुहराया गया। जिसमें दो साल से जारी जन संघर्षों का बड़े ही चालाकी से उपयोग किया गया। जबकि मिस्त्र तुर्की की तरह ही अमेरिका और यूरोपीय देशों का मित्र देश है। वहां की सरकारों पर उनका नियंत्रण है। ब्रजील की स्थिति भले ही थोड़ी सी भिन्न है, मगर वह पूरी तरह उनसे अलग भी नहीं है।

ब्रजील में जन प्रदर्शनों की शुरूआत फुटबाल का वल्र्ड कप और 2016 में ओलमिपक खेलों के आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन से हुर्इ। देश की आम जनता की मांग थी, कि इन अन्तर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों के स्थान पर, पहले जन समस्याओं का समाधान जरूरी है। स्वास्थ्य-चिकित्सा, शिक्षा, परिवहन और अर्थव्यवस्था में सुधार की जरूरत है। जरूरत इस बात की है, कि सरकार इन खेल आयोजनों पर खर्च करने के बजाये, जन समस्याओं का समाधान करे। कर्ज ले कर, अंतर्राष्ट्रीय खेलों का आयोजन गलत है। ब्रजील के सभी बड़े शहरों में, सरकारी आश्वासनों के बाद भी, जन प्रदर्शन जारी है।

28 जून को ब्रजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ ने जन समस्याओं के समाधान के लिये देश के युवा वर्ग से संवाद बनाये रखने का मार्ग चुना। उन्होंने स्टूडेण्ट एसोसिएशन और सामाजिक आन्दोलनकर्ताओं के 25 प्रतिनिधियों के साथ, देश की राजधानी ब्रजीलिया में आवश्यक बैठक की। सरकारी तौर पर यह जानकारी दी गयी, कि युवाओं की समस्याओं पर केनिद्रत एक सरकारी वेबसार्इट जल्द ही लांच की जायेगी, ताकि समस्याओं का समाधान आसान हो सके। राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ अपनी घटती लोकप्रियता से परेशान हैं।

29 जून को ‘डाटाफोल्या सर्वे’ ने एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसके अनुसार- ब्रजील की राष्ट्रपति का समर्थन दर 57 प्रतिशत से घट कर 30 प्रतिशत रह गया है। मार्च में राष्ट्रपति डिम रोसेफ को 65 प्रतिशत लोगों का समर्थन हासिल था। ऐसे लोगों की संख्या जो यह सोचते हैं, कि रोसेफ सरकार गलत नीतियों के तहत बुरा काम कर रही है, 9 प्रतिशत से बढ़ कर 25 प्रतिशत हो गयी है। यह सर्वे 196 शहरों में 9717 लोगों के बीच कराया गया।

22 जून को ‘ऐपोका’ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार- ब्रजील के 75 प्रतिशत लोगों का समर्थन, सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ है।

ब्रजील की सरकार ने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को कम करने के लिये राजनीतिक सुधारों का प्रस्ताव रखा है। राष्ट्रपति ने कहा है, कि ”इस प्रस्ताव पर मतदान कराया जायेगा, ताकि आर्थिक एवं राजनीतिक समस्याओं का ठोस समाधान जल्द से जल्द निकाला जा सके।” जिसमें स्वास्थ्य, चिकित्सा, परिवहन और शिक्षा की समस्यायें भी शामिल हैं। जिसके तहत राज्य सरकार और सिटी मेयर संयुक्त रूप से काम करेंगे।

सरकार के द्वारा प्रस्तावित सुधार कायक्रमों की घोषणां का देश की जनता पर अब तक कोर्इ सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। 3 जुलार्इ को खबरें सामने आयीं, कि पिछले दो दिनों से ब्रजील के सभी प्रमुख हार्इवे को ट्रकों से जाम कर दिया गया। ट्रक ड्रार्इवरों ने मांग रखी, की पेट्रोल एवं डीजल में छूट दी जाये, काम की परिस्थितियों में सुधार हो, और सड़क सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था हो। स्थानीय मीडिया के अनुसार- मातो ग्रोसो स्टेट में साओ-पोलो को ब्रजील के प्रमुख सैंटोस पार्टो से जोड़ने वाली हार्इवे पर लार्इन से ट्रकों को खड़ा कर के जाम कर दिया गया। सबसे बुरी स्थिति मिनस गैरेस राज्य की है, जहां, 14 हार्इवे को जाम कर दिया गया है। ब्रजील के बाहर वाले हार्इवे पर प्रदर्शनकारियों ने एक बस में आग लगा दी और तीन बसों में तोड़-फोड़ की गयी। जिसकी वजह से यातायात 6 घण्टे तक पूरी तरह बाधित रहा।

स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों पर जुर्माना लगाने और ड्रार्इवर यूनियन से बात कर 3 जुलार्इ तक जाम हटाने को कहा।

सैंटोस पोर्ट जाने वाली हार्इवे के जाम को 24 घण्टे के बाद 2 जुलार्इ को फिर से खोल दिया गया। 2 जुलार्इ को ही दंगा विरोधी पुलिस ने साओ-पोलो के यातायात कर चौकी को जाम किये ट्रक ड्रार्इवरों पर अंश्रुगैस के गोले दागे।

5 जुलार्इ को पुलिस और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच रियो-डी-जनेरियो में झड़पें हुर्इ। यह संघर्ष गर्वनर हाउस के सामने हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अंश्रुगैस छोड़े और प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की। कचड़े के डब्बे में आग लगा दिया। संघर्ष आस-पास के इलाकों में भी फैल गया। पुलिस के द्वारा 6 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। कर्इ पुलिस अधिकारी भी घायल हुए।

11 जुलार्इ को सबसे बड़े ट्रेड यूनियन फेडरेशन ने राष्ट्रीय स्तर पर हड़ताल का आव्हान किया। इनकी मांग काम की शर्तों में परिवर्तन लाने की थी। औधोगिक मजदूर, दुकानदार, सरकारी कर्मचारी, टीचर्स और अस्पताल कर्मचारियों ने प्रदर्शनों में भाग लिया। उन्होंने अर्थव्यवस्था में आयी गिरावट के विरूद्ध सकारात्मक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने वेतन वृद्धि, नौकरी सुरक्षा, पबिलक ट्रांसपोर्ट में विकास, स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर ज्यादा खर्च की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने देश के 18 राज्यों में हार्इवे को जाम कर दिया। साओ-पोलो में प्रदर्शनकारियों के बैनर पर लिखा था- ‘अमीरों पर टैक्स ज्यादा हो, और गरीबों पर टैक्स कम!’

म्यूनिस्पल में काम करने वाले एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि- ”हम यह प्रदर्शन इस लिये कर रहे हैं, कि ब्रजील में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में वास्तव में संकट है! हम चाहते हैं कि इस स्थिति में बदलाव आए।”

इन देशव्यापी प्रदर्शनों का जन जीवन और ब्रजील की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है। मगर, सरकार जन आक्रोश से सबक लेने के बजाये, खेलों के आयोजन जैसे गैर-सामाजिक कायक्रमों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है। ऐसे कायक्रमों पर सरकारी धन खर्च कर रही है, जिससे लोगों की नाराजगी घटने के बजाये बढ़ती जा रही है। पोप फ्रांसिस की ब्रजील यात्रा का भारी विरोध हो रहा है।

ब्रजील के लोग पोप फ्रांसिस के एक सप्ताह के दौरे का विरोध इसलिये कर रहे हैं, कि खर्च सार्वजनिक धनराशि से किया जायेगा। जबकि देश की आम जनता सार्वजनिक एवं सामाजिक विकास योजनाओं के तहत खर्च चाहती है, ताकि ब्रजील में गहराता वित्तीय संकट, सामाजिक असमानता और लोगों के गिरते हुए जीवन स्तर को संभाला जा सके।

रियो डी जनीरियो में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिये पुलिस ने अंश्रुगैस और वाटर कैनन का उपयोग किया। 22 जुलार्इ को रियो में गर्वनर बिलिडंग के सामने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ब्रजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ और पोप की आपसी बैठक के बाद हुआ। प्रदर्शन के दौरान एक फोटोग्राफर के सिर पर गहरी चोट आयी। 5 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। दंगा विरोधी पुलिस ने सख्त लाठी चार्ज किये।

21 जुलार्इ को बासीलीक के एक सार्वजनिक शौचालय के करीब पुलिस को घरेलू विस्फोटक मिला। जहां पोप को 24 जुलार्इ को आना था।

ब्रजील की सरकार पोप की यात्रा पर 53 मिलियन डालर खर्च कर रही है। आम ब्रजीलियन की नाराजगी सबसे ज्यादा इसी मुददे की वजह से है।

26 जुलार्इ को रियो डी जनेरियो के कोपाकबाना समुद्र तट में पोप की यात्रा के अंतिम पड़ाव में ‘विश्व युवा दिवस’ समारोह का आयोजन किया गया था, जहां 1.5 मिलियन कैथलिक इक्कटठा थे। इस मौके पर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। सुरक्षा सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिये वाटर कैनन का उपयोग किया। सुरक्षा के लिये सुरक्षा अधिकारी हथियारबद्ध गाडि़यों में मौजूद थे। इस बीच साओ पोलो में 300 प्रदर्शनकारियों ने 5 बैंकों को लूट लिया। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कर्इ जगह सड़कें जाम की गयी।

पोप की इस यात्रा ने सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

31 जुलार्इ को ब्रजील के एयरपोर्ट वक्र्स अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गये। कर्मचारियों की मांग- काम की स्थितियों में परिवर्तन और वेतन वृद्धि की है। नेशनल एयरपोर्ट पबिलक कम्पनी द्वारा संचालित इन्फ्राएरो के 65 एयरपोर्ट के 80 प्रतिशत कर्मचारियों ने काम बंद कर दिये हैं।

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