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फ्रांस में कर और कटौतियों के खिलाफ बढ़ता जन असंतोष

europe (3)फ्रांस की आम जनता सरकार के द्वारा पेश बजट, कटौती और निर्माण योजनाओं पर नजर रखने लगी है। सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिये कटौतियों का सहारा ले रही है। लगातार सरकारी करों में वृद्धि कर रही हैं इसके बाद भी अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष का आंकलन है, कि वर्ष 2014 तक सुधार की संभावनायें नहीं हैं।

फ्रांस की सेना में 2,28,000 सैनिक एवं सैन्य अधिकारी हैं। इसके अलावा हथियारों के उधोग में 1,65,000 लोग काम करते हैं। फ्रांसीसी सरकार की योजना अपनी सेना में 34,000 सैनिकों एवं अधिकारियों की कटौती करने की है। यह कटौती उस समय की जा रही है, जब यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही है। औधोगिक विकास थम सा गया है, और इस बीच फ्रांस से उधोगों के पलायन के साथ कर्इ औधोगिक इकार्इयां बंद हुर्इ हैं।

24 जुलार्इ को श्रममंत्री द्वारा पेश किये गये आंकड़ों के अनुसार जून में फ्रांस की बेरोजगारी दर 11.2 प्रतिशत पर पहुंच गयी। यह अब तक की सबसे ऊंची दर है।

फ्रांस की होलान्दे सरकार आने वाले 5 सालों में अपने घाटे को घटाने के लिये 60 बिलियन यूरो की कटौती सरकारी खर्च में करने का लक्ष्य निर्धारित की है। यह कटौती सार्वजनिक एवं सामाजिक कार्यों में ही की जायेगी, यह अघोषित सच है। क्योंकि इसी दौरान फ्रांस के रक्षामंत्री ने कैबिनेट के सामने 190 बिलियन यूरो का रक्षा बजट पेश किया है। जिस पर अगले महीने चर्चा होगी, और इस साल के अंत में मतदान होगा। वर्ष 2014 से 2019 तक के इस रक्षा बजट पर मतभेदों का होना तय हैं सरकार की नीतियों के खिलाफ जनअसंतोष बढ़ता जा रहा है।

4 अगस्त को फ्रांस के हजारों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगभग 600 मिलियन यूरो के नये इण्टरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के विरूद्ध प्रदर्शन किये। यह एयरपोर्ट नोटरे डम डि लैनिडस में बनाया जायेगा। प्रदर्शनकारियेां के अनुसार सरकार विरोधी प्रदर्शन में 25,000 लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि पुलिस का कहना है, कि 8-9 हजार लोग इक्टठा हुए। प्रदर्शनकानरी नये एयरपोर्ट के स्थान पर पहले से ही बने एयर पोर्ट में विस्तार की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की समझ बिल्कुल साफ थी, कि आर्थिक संकट के दौर में इस तरह के किसी भी प्रोजेक्ट पर सरकारी धनखर्च करना गलत है। उन्होंने ”आकोपायी द स्कार्इ” के तहत हजारों पतंग उड़ाये, जिस पर लिखा था- ”स्वतंत्र जनता!स्वतंत्र आकाश!”

एयरपोर्ट निर्माण के इस प्रोजेक्ट को 2008 में मंजूरी दी गयी थी, जिसे 2017 तक बन कर तैयार होना है। सरकार फ्रांस की बदलती हुर्इ स्थितियों को समझने और जनसमस्याओं का समाधान करने के बजाये भारी सरकारी कर, सरकारी खर्च में कटौती, जैसे कदम उठा रही है, जिसका स्वाभाविक परिणाम यह हो रहा है, कि काम के अवसर घटते जा रहे हैं और बेरोजगारी दर बढ़ती जा रही है। इन कटौतियों का प्रभाव उसकी अर्थव्यवस्था पर ही नकारात्मक पड़ रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने कहा है कि ”फ्रांस की अर्थव्यवस्था के विकास के लिये यह जरूरी है, कि फ्रांस की सरकार अपनी कटौती की नीति की रफ्तार कम करे।” 5 अगस्त को प्रकाशित वार्षिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार- ”साल 2013 के अंत तक, अपने घाटे को घटा कर, अपनी वित्त व्यवस्था को संभालने के लिये, सरकार को अपनी दो-तिहार्इ क्षमता लगानी होगी।” सरकार को यह सलाह दी गयी है, कि पिछले सालों की स्थिति को देखते हुए सामंजस्य के निर्णयों की गति को धीमी कर देनी चाहिये। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष यह भी कहता है कि ”फ्रांस को अपने खर्च को और भी घटाना चाहिये। लेकिन, सरकारी करों में वृद्धि नहीं करना चाहिये।” रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस में सरकारी कर दुनिया में सबसे ज्यादा है। यदि उसमें वृद्धि की गयी तो उससे निवेश तथा नये रोजगार में बाधा आयेगी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की रिपोर्ट में यह माना गया है, कि यह साल फ्रांस के लिये मंदी का ही रहेगा, मगर एकीकरण की मजबूती आयेगी और 2014 में विकास दर सामान्य रूप से बढ़ने लगेगा। उसने चेतावनी दी है, कि 1990 के दशक से उत्पादन दर के विकास में कमी हो रही है। जोकि सही नहीं है।

फ्रांस अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिये संघर्ष कर रहा है, जिसमें पिछले दो सालों से ठहराव आ गया है, और बमुश्किल विकास के नाम पर, थोड़ा-बहुत ही विकास हुआ है। फ्रांस के वित्त मंत्री ने 10 अगस्त को कहा, कि इस साल फ्रांस की वित्त विकास दर कमजोर रहेगा। 0.1 प्रतिशत या उससे थोड़ा अधिक का अनुमान लगाया गया है।

12 जुलार्इ को ग्लोबल रेटिंग एजेन्सी- फिटच ने फ्रांस की रेटिंग ट्रीपल ए से घटा कर डबल ए प्लस कर दिया हैं

इसके बाद भी होलांदे सरकार ने देश के भारी भरकम कर्ज को कम करने के लिये सरकारी करों में भारी वृद्धि की है। और सुधार के लिये कटौतियों को लागू किया है।

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