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कम्युन को राष्ट्रीय मुददा बनाया जाये

latine americaवेनेजुएला में ‘विकास के जरिये समाजवाद’ के निर्माण की पहल की जा चुकी है। सरकार को सड़कों पर उतारने और मजदूर वर्ग के हाथों में औधोगिक इकार्इयों की कमान सौंपने की अच्छी शुरूआत के साथ ही कम्युनों के निर्माण को राष्ट्रीय मुददा बनाया गया है।

यह शुरूआत उस समय की गयी है, जब नवउदारवादी वैश्विक शक्तियां दुनिया को मुक्तबाजारवाद का क्षेत्र बनाने की लड़ार्इयां लड़ रही हैं, मजदूरों के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं, और सरकारों को आम जनता के विरूद्ध खड़ा किया जा चुका है। जिन पर निजी कम्पनियां, विशालतम कारपोरेशनों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय इकार्इयों का अधिकार है। वेनेजुएला में भी दक्षिण पंथी ताकतें साजिशें रच रही हैं, और अमेरिकी सरकार हर हाल में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहती है।

इसके बाद भी, वेनेजुएला की मदुरो सरकार ‘शावेज की सामजवादी अवधारणा’ और ‘देश की आम जनता पर पक्का यकीन’ रखने की नीति पर चल रही है। ‘स्ट्रीट गर्वमेण्ट’ के जरिये सरकार सामाजिक विकास योनजाओं में न सिर्फ आम जनता की हिस्सेदारी बढ़ा रही है, बल्कि उसके निर्माण की जिम्मेदारी भी वह उन्हें सौंप रही है। समाज और सरकार के बीच की दूरियां तय की जा रही हैं। कामगर वर्ग के हाथों में औधोगिक इकार्इयों को सौंपने और कम्युनों के निर्माण को राष्ट्रीय मुददा बनाने का सीधा सा मतलब है, कि वेनेजुएला में वर्गगत राजनीतिक संस्कृति का निर्माण हो रहा है, और ‘मैनेजमेण्ट’ के स्थान पर ‘मजदूर वर्ग के नियंत्रण’ को वरियता दी जा रही है। उन परिस्थितियों की रचना की जा रही है, जहां कामगर वर्ग समाजवादी क्रांति के निर्माण की पहल करती है।

23 जून को, वेनेजुएला के मजदूर आंदोलनों से जुड़े ‘एक्टीविस्टों’ ने ‘वर्कर्स कांग्रेस’ का आयोजन किया। जिसमें उन्होंने ”श्रम पर आधारित जनतंत्र और समाजवाद का निर्माण” पर चर्चायें की।

”फस्र्ट, वर्कर्स, कांग्रेसेस: बैलेंस एण्ड चैलेंजेज़ आफ वर्क कण्ट्रोल एण्ड वर्कर्स कांउसिल फार द कन्स्ट्रक्शन आफ सोशलिज्म” का आयोजन ‘नेशनल वर्कर कण्ट्रोल मोमेन्ट’ के द्वारा किया गया। जिसमें वेनेजुएला के 50 से ज्यादा कामगर ग्रूपों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा यूनार्इटेड़ सोशलिस्ट पार्टी आफ वेनेजुएला के रेडिकल एक्टीविस्ट, वेनेजुएला की कम्युनिस्ट पार्टी की वर्तमान ट्रेड यूनियन और लेफ्टीस्ट यूनियन तथा नेशनल यूनियन आफ वर्कर्स के प्रतिनिधियों ने भी, इस कांग्रेस में भाग लिया।

इस कांग्रेस का मूल उददेश्य उत्पादन के साधन पर मजदूर वर्ग के अधिकार की लड़ार्इ को सुनिश्चित करना है। उसे निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचाना है। जिसे वेनेजुएला में ”मजदूरों का नियंत्रण” के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन की शुरूआत हयूगो शावेज के समय में हुर्इ थी, जिसके अंतर्गत कामगरों के द्वारा कारखानों के मैनेजमेण्ट को अपने हाथों में ले लिया जाता है। अब यह आंदोलन, वेनेजुएला की सरकार का महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय है।

कांग्रेस के आयोजक समिति के अनुसार- इस कांग्रेस का मूल उददेश्य कारखानों पर मजदूरों के नियंत्रण के आंदोलन को पुर्नजीवित करना है। जिसके लिये कामगर वर्ग में वर्गगत एकजुटता, संगठनात्मक एकता, संघर्ष की अटूट क्षमता और कामगर वर्ग की एकता को जनरेट किया जाना है।

पिछले दशक में -शावेज सरकार के विरोध में मालिकों ने कारखाने में काम बंद कर दिया था। मैनेजमेण्ट ने तालाबंदी की। इस आंदोलन का परिणाम यह हुआ, कि दर्जनों कारखानों का मैनेजमेण्ट या तो पूरी तरह वहां काम करने वाले कामगरों के हाथों में आ गया, या कामगर मैनेजमेण्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गये। ‘वर्कर्स कण्ट्रोल मोमेण्ट’ 2009 में, ‘प्लान सोसलिस्ट ग्वाइयाना’ के प्रस्ताव के साथ ही अपनी ऊंचार्इ पर पहुंच गया, जहां कामगरों के नियंत्रण में पूर्वी ग्वाइयाना के सरकारी स्टील कारखानों का मैनेजमेण्ट, कामगरों के नियंत्रण में, सीध तौर पर आ गया। जिसका विरोध नौकरशाह मैनेजमेण्ट और शावेजवादी आंदोलनों के कुछ सुधारवादी राजनीतिज्ञों ने किया। परिणाम स्वरूप, शावेज के समर्थन के बाद भी यह आंदोलन अनिश्चयता का शिकार हो गया। किंतु शावेज ने इस आंदोलन का लगातार समर्थन किया। और इसे कार्यरूप में बदलने की नीतियों की योजना को आगे बढ़ाया।

21 से 23 जून तक हुआ पहला वर्कर्स कांग्रेस ग्वाइयाना के सरकारी स्टील प्लांट में हुआ। यह कांग्रेस पिछले साल भर से जारी कामगर वर्ग से लगातार सम्पर्क का परिणाम है। जिसका एक मात्र मकसद कामगरों के नियंत्रण के आंदोलन को मजबूत करना है। कांग्रेस ने कामगरों के हाथ में पूरे अधिकार को सौंपने की घोषणा की। वेनेजुएला के रेडिकल और वामपंथी लोगों के स्लोगन को स्वीकार किया गया कि कारखानों के संचालन का अधिकार न तो पूंजीपति, ना ही नौकरशाहों के हाथों में हो, बल्कि सभी अधिकार कामगरों के पास हो।

नेशनल वर्कर्स कण्ट्रोल मोमेण्ट के एक संयोजक अलेक्जेण्डर कोरियानों ने कहा कि ”इस आंदोलन का लक्ष्य सिर्फ कामगरों को कम्पनी को चलाने के लिये नियुक्त करना नहीं होना चाहिये, बल्कि उन्हें एक ऐसा मैनेजमेण्ट का माडल पेश करना चाहिये, जिसमें कामगर निर्णय ले सकें और उसे निर्देशित एवं नियंत्रित करने के लिये हस्तक्षेप कर सकें।” इस मुददे पर वेनेजुएला में एक बहस सी छिड़ी हुर्इ है। वेनेजुएला का स्थानीय समाचार पत्र दिआरो दे ग्वाइयाना में कोरियानों ने कहा कि ”कलेकिटव मैनेजमेण्ट का प्रस्ताव जटिल है, जिसका विश्लेषण एवं स्पष्टीकरण जरूरी है। कामगरों के हाथों में मैनेजमेण्ट देने का उददेश्य ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस उददेश्य को पाने के लिये कार्य प्रणाली का निर्माण भी जरूरी है, जिसे पाने के लिये बहस और संगोषिठयां भी जरूरी हैं।” उन्होंने जानकारियां दी कि कांग्रेस का लक्ष्य है- वेनेजुएला में मजदूरों के नियंत्रण के अनुभवों को जमा कर, उनका विश्लेषण करना, राष्ट्रीय राजनीतिक स्थिति और मजदूर आंदोलन पर एक निर्णायक घोषणा पत्र को तैयार करना और आम सहमति तक पहुंचना तथा संघर्ष की कार्यनीति तय करना, जिस आधार पर वर्कर्स कण्ट्रोल मोमेन्ट को संगठित किया जा सके।

इस आयोजन के अंत में यह घोषणा की गयी, कि 27 जुलार्इ को एक बैठक आयोजित की जायेगी, जिसमें कांग्रेस के घोषणापत्र और विज्ञपित को अंतिम रूप दिया जायेगा। जिसे प्रकाशित कर, विचार के लिये राष्ट्रपति मदुरो के सामने पेश किया जायेगा।

वेनेजुएला की मदुरो सरकार और कामगर वर्ग के बीच विश्वास की रेखायें गहरी हो गयी हैं। सरकार कामगर वर्ग पर यकीन कर रही है, और कामगर वर्ग सरकार की नीतियों के साथ है। इसके बाद भी वह सरकार के निर्णयों के प्रति अपनी असहमति खुल कर सामने रखने लगी है, जो इस बात का प्रमाण है कि वेनेजुएला में एक नये किस्म की वर्गगत राजनीतिक चेतना का उदय हो गया है।

कामगरों के द्वारा संचालित इण्डस्ट्रीज डिआना प्लांटस के कामगर खाध मंत्री फेलिक्स ओसोरिओ के द्वारा वेनेजुएला के उधोगपति डेविड मेंडोज़ा को कम्पनी के मैनेजर नियुक्त किये जाने के निर्णय के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त किया। जिस दिन से मेंडोज़ा और नये बोर्ड ने आफिस का कार्य भार संभाला कामगरों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कामगरों की असहमति सिर्फ इस बात से नहीं है, कि खाधमंत्री ने किसी उधोगपति को कम्पनी का मैनेजर नियुक्त कर दिया, उनकी असहमति उस प्रक्रिया से भी है, जिसके तहत कम्पनी के कामगरों से सहमति नहीं ली गयी थी।

औधोगिक संस्थान डिआना का राष्ट्रीयकरण वर्ष 2008 में किया गया था। वेनेजुएला के वालेंसिया के इस प्लांट के साथ इसके अन्य 5 प्लांटों का भी राष्ट्रीयकरण किया गया। यह प्लांट मुख्य रूप से खाध तेल एवं उससे बने सामान जैसे- खाने का तेल, मार्जरीन (वनस्पति से बना घी, जो बटर का विकल्प है) , मेयोनेज, शास और साबुन का उत्पादन करता है। यह इकार्इ वेनेजुएला के मार्जरीन बाजार का 35 प्रतिशत भाग की आपूर्ति करता है। डिआना का वार्षिक उत्पादन 2,07,761 टन है। 2008 की तुलना में 160.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुर्इ है। उसके पूर्ण-कालिक कामगरों की तादाद में भी 2350 की वृद्धि हुर्इ है। कम्पनी अपने उत्पादन का 20 प्रतिशत निजी बाजार में बेचती है और 80 प्रतिशत उत्पाद राज्य के द्वारा संचालित वितरण कम्पनियों को देती है।

डिआना के कामगरों ने उत्पादन ही नहीं, मैनेजमेण्ट की बारीकियों को भी अच्छी तरह सीख लिया है। 2011 एवं 2012 में डिआना ने राज्य को 3.5 मिलियन बोलिवर (मुद्रा)का लाभांश पहुंचाया है। सरकार ने भी हाल-फिलहाल में 30 मिलियन बोलिवर (मुद्रा) उसके विस्तार के लिये लगाया है, ताकि पाम-ट्री हारवेसिटंग को बढ़ाया जा सके।

डिआना के कामगर पूरी तरह संगठित हैं। सोशलिस्ट वर्कस कांउसिल कम्पनी के काम-काज का न सिर्फ निर्धारण करती है, बल्कि उसे सामाजिक विकास की ओर भी मोड़ चुकी है। रेडियो, रिर्पोटर्स और उसके द्वारा संचालित विश्वविधालय भी है। 2008 से 2013 के बीच उन्होंने जो भी उपलबिधयां पायी है, अब उसे वो घटाना नहीं चाहती। उनकी राजनीतिक समझ में भी इजाफा हुआ। इसलिये खाधमंत्री के द्वारा किसी उधोगपति को मैनेजर के रूप में की गयी नियुक्ति को वो स्वीकार करना नहीं चाहते। उन्होंने कहा- ”मेंडोज़ा के बारे में हमसे चर्चा नहीं की गयी।”

डिआना के कामगरों की सोच बिल्कुल स्पष्ट है। 26 जुलार्इ को हुर्इ बैठक में उन्होंने कहा कि ”निजी कम्पनियों को संचालित करने वाला व्यक्ति कामगरों के द्वारा संचालित कारखाने की समस्याओं और उसकी दिशा को नहीं समझ सकता। वह कामगरों की संगठित शक्ति का सम्मान भी नहीं कर सकता है।” वैसे, कामगरों का यह कहना पूरी तरह जायज है, क्योंकि 2005 में ‘स्टेट टैक्स आर्गनाइजेशन’ के मेंडोज़ा रिजननल मैनेजर थे, और मजदूरों की पत्रिका ‘वर्कर्स ज्वाइर्ंस’ के लिये लिखने वाले राबर्टो येपेज़ के अनुसार- ”उन दिनों मेंडोज़ा ने उन मजदूरों को काम से निकाल दिया था, जो वर्गगत आधार पर संगठित हो रहे थे।” 23 जुलार्इ को खाध मंत्री के द्वारा नये मैनेजर की घोषणा की गयी और 26 जुलार्इ को जब मेंडोज़ा कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे उनके साथ सुरक्षा के नाम पर निजी हथियारबद्ध लोगों का एक जत्था था। कामगरों ने इसे ‘सैन्यकरण’ का दर्जा दिया।

डिआना के कामगरों ने प्रेस से कहा कि ”यदि बोर्ड इस स्थिति पर कमगरों से चर्चा नहीं करती है, तो वो इस स्थिति की निंदा करने के लिये नेशनल असेम्बली तक जायेंगे।” उन्होंने नेशनल असेम्बली के प्रेसिडेण्ट डिओसडाडो कैबेलो से ”विकास के दो माडल पर चर्चा करने की मांग की।” उन्होंने कहा- यह दो माडल है- एक सरकार के द्वारा मैनेजममेण्ट को कामगरों पर थोपना, दो- मजदूरों से सहयोग से संचालन।

26 जुलार्इ को कामगरों ने एक विज्ञपित जारी की। जिसमें कहा गया कि ”कामगरों की प्रतिबद्धता बोलिवेरियन क्रांति और राष्ट्रपति निकोलस मदुरो के प्रति है। उनका मकसद प्रदर्शन या हड़ताल नहीं, बल्कि खाध सुरक्षा की गारण्टी के महत्व को सुनिश्चित करना है।” जिसमें डिआना की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। शावेज के द्वारा कम्पनी के राष्ट्रीयकरण के बाद से, जिस प्रक्रिया की शुरूआत हुर्इ, अब वह पूरी तरह से कामगरों के नियंत्रण की प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है। जिसमें राज्य एवं सरकार की भूमिका सर्वोच्च शक्ति के स्थान पर सहयोगी की है।

डिआना के मैनेजर के पद पर मेंडोज़ा से पहले एंजल ओरसिनि को भी ‘नेशनल गर्वमेण्ट एक्जीक्यूटिव’ ने ही चुना था। डिआना के कामगर लुर्इस रामोस के अुनसार- ”एंजल ओरसिनि को राष्ट्रीयकरण के समय चुना गया था। ताकि वो मजदूरों के नियंत्रण में कम्पनी को देने की प्रक्रिया में सहयोग दे सके। उन्होंने कामगरों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करने में प्रभावशाली भूमिका भी अदा की।” रामोस ने बैठक में कहा कि ”हम किसी की जबरन नियुक्ति को स्वीकार तब तक नहीं करेंगे, जब तक कि असेम्बली आफ वर्कर्स के द्वारा उसे स्वीकार नहीं किया जाता है।” उन्होंने कहा ”यह शावेज की विरासत है… कि आम जनता ही निर्णय ले।”

वर्ष 2010 में शावेज ने जब डिआना कारखाने का दौरा किया था, तब उन्होंने कहा था- ”इस तरह के महत्वपूर्ण कम्पनी के राष्ट्रीयकरण ने मूलभूत खाध पदार्थों के राष्ट्रीय उत्पादन को बढ़ावा देने का काम किया है।” उसने महत्वपूर्ण विकास को हासिल किया है। उन्होंने 2012 में भी डिआना के बारे में कहा कि ”डिआना का कारखाना हमारे लिये एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, कि कैसे एक कम्पनी, जो पहले पूंजीवादी थी, अब राष्ट्रीयकरण के बाद मजदूरों के हाथों में है, और उसकी उत्पादकता और कुशलता अपने चरम पर है। उसके द्वारा उत्पादित वस्तुओं का मूल्य भी अब घटता जा रहा है।”

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने डिआना संघर्ष के ऊपर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा, मगर 13 अगस्त को यह रिपोर्ट आयी, कि उन्होंने मेंडोज़ा की नियुक्ती को रददर कर दिया। जिसका मजदूरों ने स्वागत किया। मेंडोज़ा के स्थान पर पूर्व आर्मी बि्रगेडियर डेक्सटर रोडि्रगेज को नियुक्त किया गया।

latine america (2)15 अगस्त को रोडि्रगेज, डिआना के अलग-अलग विभागों के कामगरों से मिले। वर्कर्स असेम्बली में उन्होंने कहा- ”मुझे आप एक कामगर ही समझें। मेरी नीति खुलेद्वार की है। मैं यहां आप लोगों से कुछ सीखने आया हूं।” उन्होंने कामगरों के नियंत्रण में कम्पनी के संचालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहीर की।

डिआना के कामगर इसे अपनी बड़ी उपलबिध मानते हैं कि सरकार के खाध मंत्री के निर्णय को बदला जा सका और कारखाने पर मजदूरों के नियंत्रण को नये मैनेजर के द्वारा न सिर्फ मान्यता दी गयी, बल्कि उन्होंने सरकार की नीतियों के अनुकूल अपने काम की शुरूआत की। इसके बाद भी सच यह है, कि कामगर कम्पनी प्रमुख को अपने द्वारा चुनने के प्रति संवेदनशील है, वो सरकार के द्वारा नियुक्त किसी भी व्यक्ति को मैनेजर के पद पर नहीं चाहते।

डिआना इण्डस्ट्रीज के कामगर और सोशलिस्ट वर्कर्स कांउसिल के सदस्य हेक्टर मिएरे का कहना है, कि हमारे लिये यह बढ़ी बात है, कि इस संघर्ष ने उस रास्ते को खोल दिया है, जिस पर चल कर कामगर वर्ग अपनी उपलबिधयों और ज्यादा विस्तार दे सकेगा। आने वाले कल में, ‘मजदूरों के नियंत्रण की नीति’ वे और ज्यादा लोकतांत्रिक होगा, और हमारे वर्ग की हिस्सेदारी बढ़ती चली जायेगी।” उन्होंने कहा- ”हम हमारे कमाण्डेण्ट हयूगो शावेज की विरासत को बढ़ाने का काम लगातार करते रहेंगे।”

इस बीच कम्पनियों और कारखानों पर मजदूर वर्ग के नियंत्रण की मांग अन्य कारखानों में भी होने लगी है। वेनेजुएला की मदुरो सरकार विकास के जरिये समाजवाद की नीति के तहत कम्युनों के निर्माण की प्रक्रिया के बीच से गुजर रहा है। राष्ट्रपति निकोलस मदुरो इसे राष्ट्रीय मुददा बनाये जाने की नीति से संचालित हो रहे हैं।

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