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बड़ी बे-अदबी हो रही है

समाज में बड़ी बे-अदबी हो रही है।

सीमा पर जवान शहीद हो जाते हैं। जो संतरी बनने की काबलियत नहीं रखते, वो मंत्री कुछ ऐसा कहते हैं, जैसे खस्सी की जान चली गयी हो, कि ‘जवान होते ही है, शहीद होने के लिये।’

हर मामले में किसी न किसी मंत्री, राजनेता या ऐसे ही लोगों की जुबान फिसल जाती है, और उसी फिसली हुर्इ जुबान से, वो माफी मांग लेते है।

माफी उन्हें मिल जाती है।

अपने को प्रधानमंत्री का प्रबल दावेदार समझने वाले नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फरमाते हैं- ”देश की आजादी में गुजरात की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। महात्मा गांधी और सरदार बल्लभ भार्इ पटेल गुजरात के थे।” यानी गुजराती थे।

अखबार में खबरें छपती है। टीवी चैनलों पर प्रसारित होता है। कोर्इ कुछ नहीं कहता। उनकी नाफरमानियों को अच्छी जगह मिलती है। उत्तरखण्ड के प्राकृतिक आपदा के बीच वो चुनावी राजनीति चलते हैं। गुजरातियों के लिये सहायता और भारतीयों के लिये बेअदबी खुलेआम होती है। मामला जहां था, वहीं रह जाता है। ऊंट किसी करवट नहीं बैठता। गांधीजी से यह सवाल तो पूछना ही चाहिये कि ”बाबा! देश आपको राष्ट्रपिता क्यों मानता है? आप गुजरात पिता क्यों नहीं हैं?” सरदार पटेल से यह बात तो पूछनी ही चाहिये, कि रियासतों का एकीकरण आपने भारतीय संघ में क्यों किया? गुजरात में ही आपको टिके रहना चाहिये था?

हम जानते हैं कि गांधी-पटेल के चेहरे पर गजब की शर्मिंदगी होगी। अफसोस! वो तो अब हैं नहीं, सवाल नरेंद्र मोदी से कर ले। हमें यकीन है कि उनके चेहरे पर शर्मिंदगी नहीं, उनके चेहरे पर अनाम थेथरोलाजी की सम्मानित डिगरी होगी। उन्होंने बेअदबी की छूट राहुल गांधी की तरह हासिल कर ली है। जिन्होंने भरे पेट के फलसफा को अपने तरीके से दुहराया।

‘क्या दुहराया?’ शब्दश: तो याद नहीं, जो समझ में आया वह इतना है कि ”गरीबी मानसिक अवस्था है?”

बेचारे नाजुक हैं। नजाकत में बेअदबी हो ही जाती है। खूबसूरत लड़की के भार्इ यदि मुसदण्डे हों, तो उसे हक है कि वह अदब से सलाम करने वालों के साथ बेअदबी करे। फटीचरों की तादाद हमेशा से बड़ी रही है। और खूबसूरती भी तो एक रूतबा है। रूतबे में जो हैं, वही बेअदब है। बस! अदब कायदों के शिकार मनमोहन सिंह हैं, सोनिया जी के सामने हों या सोन चिरर्इया के, सभी के सामने बा-अदब रहते हैं। चिकने घडे़ पर जैसे पानी नहीं ठहरता, मगर पानी घड़ा में ही रहता है, वैसे ही, वो बेअदब और बाअदब कुनवे को समेट कर रहते हैं। पाकिस्तान हमला करे या नरेंद्र मोदी वो कुछ नहीं कहते। आप चाहें तो उन्हें धीर, गंभीर और समझ के दार जी कह सकते हैं।

नरेंद्र मोदी वैसे तो उन्हीं के उदारीकरण के अविदित चेले हैं। मगर ऐसा भी होता है, कि गुरू गूड़ रह जाये और चेला चीनी। इसलिये, चेले से प्रेरणा लेकर गुरू ने भगत सिंह को हार्इजेक कर लिया, तो कांग्रेस युवा हो जायेगा। गांधी बूढ़े हैं, पटेल भी। मगर, कांगे्रस नौजवान हो जायेगी। मगर समझ के दार जी ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि गांधी जी पहले से हार्इजैक हैं।

वैसे भगत सिंह के रिश्तेदार भी उनके साथ बड़ी बेअदबी कर रहे हैं। जिनकी शहादत को सारी दुनिया तह-ए-दिल से सम्मान देती है, उनकी शहादत के लिये वो उनके साथियों के साथ, शहीद का दर्जा मांग रही है। माना सरकार भारत की है, मगर उसकी सोच, समझा और नीतियां तो साम्राज्यवादी हैंं। आज भगत सिंह होते तो निश्चय ही इसके खिलाफ होते।

जमाना बहुत बुरा है भार्इ, बेटा ताऊ से ही नहीं, बाप से भी बेअदबी कर रहा है। संसद में बेअदबी है। समाज में बेअदबी है, न्यायालय में भी बेअदबी हो रही है। संसद में सांसद शिवा प्रसाद बांसुरी बजाते-बजाते चाबूक फटकारने लगते हैं। अम्बानी घराने के चश्मे-चिराग अनिल अम्बानी की याददासत सीबीआर्इ अदालत में सहसा ही खो जाती है।

आपने बैठकों में भाग लिया?

याद नहीं।

नयी कम्पनी बनार्इ गयी?

याद नहीं।

990 करोड़ का निवेश हुआ?

याद नहीं।

शेयर का ट्रांसफर हुआ?

याद नहीं।

जज साहब ने घुडकी नहीं लगार्इ, चुटकी ली- ”साहब आप कुछ ज्यादा ही भूल रहे हैं। कुछ तो याद करने की कोशिश कीजिये।”

उन्हें याद आया कि ”वो अनिल अम्बानी है। उनकी पत्नी टीना अम्बानी हैं।”

टीना अम्बानी समाज सेविका और घरेलू महिला हैं। बड़ी बे-अदबी है।

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